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Tuesday, 8 April 2014

Circulation ram coins in 300 years

भगवान राम को देव स्वरूप में स्थापित करने के 2200 साल पुराने प्रमाण प्रकाश में आए हैं। ये प्रमाण हैं दुर्लभ सिक्के संग्रहित करने के शौकीन शहर के रिटायर्ड प्रोफेसर डीएल नीमा के पास। ऐसे ही एक सिक्के पर दो शोधपत्र भी लिखे गए हैं। यह सिक्कामहेश्वर में नर्मदा से मिला था।

इस प्रकार के सिक्कों का चलन मौर्य वंश की समाप्ति के बाद शुंग काल में करीब 300 साल रहा। इनमें से एक अंडाकार सिक्का 4.15 ग्राम का है, जो प्रोटीन धातु (लेड, टिन और कॉपर) का बना है। इस पर राम-लक्ष्मण और सीता का वनगमन का दृश्य है। यह अपनी तरह का एकमात्र ज्ञात सिक्का है। यह सिक्का अध्ययन की दृष्टि से भी खास है।

बुरहानपुर में है मिलता-जुलता सिक्का

इस सिक्के पर दो शोधपत्र लिखने वाले मुद्रा शास्त्री और पंजाब यूनिवर्सिटी के विभाग प्रमुख डॉ. देवेंद्र हांडा के अनुसार यह सिक्का ईसा से दूसरी शताब्दी पूर्व का है। इस पर वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड का दृश्य उकेरा गया है। इससे मिलता-जुलता एक अन्य सिक्का तांबे का है जो बुरहानपुर के डॉ. गुप्ता के पास है। मुद्रा शास्त्री के अनुसार किसी भी सिक्के को नापने के छह पैमाने होते हैं। इस आधार पर इस सिक्के को वेरी गुड (बहुत अच्छा) की श्रेणी में रखा गया है।

5 हजार सिक्कों का संग्रह

मुझे सिक्कों के संग्रह का शौक है और करीब 5 हजार विभिन्न सिक्कों का संग्रह मेरे पास है। सिक्का करीब 2200 हजार साल पुराना है। मूर्तिकला के हिसाब से राम-लक्ष्मण, सीता के जो प्रतिबिंब हैं, उनमें यह सबसे प्राचीन है। कई विषय के जानकार अध्ययन और शोध की दृष्टि से मेरे पास इन्हें देखने के लिए आते हैं। भगवान राम की उपलब्ध मूर्तिया भी इसके बाद की है।

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