'मोबाइल में हजारों सुविधाएं होती हैं, पर वह डिस्चार्ज हो जाए तो सब बेकार है। ठीक वैसे ही जीवन परमात्मा की ओर से मिला बेशकीमती उपहार है। अगर हम इसका आनंद न ले पाएं तो जीवन बेकार है।
हमारा मोबाइल भले ही डिस्चार्ज हो जाए, उसमें ज्यादा दिक्कत नहीं है, पर जिंदगी हमेशा चार्ज रहनी चाहिए। जो जिंदगी को उत्साह, आनंद और आत्मविश्र्वास से जीते हैं, उनके लिए जीवन स्वर्ग बन जाता है।'
यह बात राष्ट्रसंत महोपाध्याय ललितप्रभसागर महाराज ने सोमवार को कही। वे दशहरा मैदान पर आयोजित आध्यात्मिक प्रवचनमाला में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जैसे खाली बोरी को खड़ा करने के लिए उसमें कुछ भरना जरूरी है, वैसे ही जिंदगी को खड़ा करने के लिए हम ऊंची सोच, अच्छा स्वभाव और उत्तम व्यवहार के मालिक बनें।
वे लोग नासमझ हैं जो खुद को बाहरी वस्तुओं से संवारते हैं। जिंदगी को हंसते-मुस्कराते जीना या रोते-झिकते, यह हम पर निर्भर है। हम जिंदगी को जीभर के जिएं और जीवन में मिलने वाली हर चीज का आनंद उठाएं। याद रखें, भगवान ने हमें जो दिया है हम उससे सुखी भी हो सकते हैं और दुःखी भी।
जो मिला है, उसका हम आनंद उठाना सीख जाएं तो सुखी हो जाएंगे। जो नहीं मिला है उसका रोना रोते रहेंगे तो दुःखी हो जाएंगे।
हमारा मोबाइल भले ही डिस्चार्ज हो जाए, उसमें ज्यादा दिक्कत नहीं है, पर जिंदगी हमेशा चार्ज रहनी चाहिए। जो जिंदगी को उत्साह, आनंद और आत्मविश्र्वास से जीते हैं, उनके लिए जीवन स्वर्ग बन जाता है।'
यह बात राष्ट्रसंत महोपाध्याय ललितप्रभसागर महाराज ने सोमवार को कही। वे दशहरा मैदान पर आयोजित आध्यात्मिक प्रवचनमाला में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, 'जैसे खाली बोरी को खड़ा करने के लिए उसमें कुछ भरना जरूरी है, वैसे ही जिंदगी को खड़ा करने के लिए हम ऊंची सोच, अच्छा स्वभाव और उत्तम व्यवहार के मालिक बनें।
वे लोग नासमझ हैं जो खुद को बाहरी वस्तुओं से संवारते हैं। जिंदगी को हंसते-मुस्कराते जीना या रोते-झिकते, यह हम पर निर्भर है। हम जिंदगी को जीभर के जिएं और जीवन में मिलने वाली हर चीज का आनंद उठाएं। याद रखें, भगवान ने हमें जो दिया है हम उससे सुखी भी हो सकते हैं और दुःखी भी।
जो मिला है, उसका हम आनंद उठाना सीख जाएं तो सुखी हो जाएंगे। जो नहीं मिला है उसका रोना रोते रहेंगे तो दुःखी हो जाएंगे।
Source: Spirituality News & Rashifal 2014

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