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Friday, 22 August 2014

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नगर में 24 व 25 अगस्त को आयोजित दो दिवसीय 19वें धर्मसंसद में देशभर के साधु संत, प्रमुख अखाड़ों के मंडलेश्वर, चारो पीठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि और चारों धाम के मुख्य पुजारी संतों ने शामिल होने की सहमति दी है। नगर में धर्म संसद का आयोजन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा शिर्डी के सांई बाबा पर की गई टिप्पणी से उपजे विवाद को निपटारे के लिए किया जा रहा है।

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने शिर्डी के सांई बाबा के भगवान होने और उसके गुरू होने पर आपत्ति की थी। जिसके बाद देश भर में शंकराचार्य व सांई भक्तों के बीच मे विवाद की स्थिति निर्मित हो गई है। विवाद को खत्म करने के लिए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने धर्मसंसद आयोजित की है। जिसमें सनातन धर्म के सभी साधु संत दसों अखाड़ा गोवर्धनमठ पुरी व श्रृंगेरी मठ के शंकराचार्य सहित चारोधाम के मुख्य पुजारियों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही शिर्डी सांई ट्रस्ट को भी धर्म संसद में शामिल होने का आमंत्रण दिया जा चुका है।

धर्म संसद का आधार होंगे वेद शास्त्र

धर्म संसद का आधार वेद शास्त्र होगा। जिसमें शिर्डी के सांई ट्रस्ट के लोगों को प्रमाणित करना होगा कि सांई बाबा का अवतार हुआ था और वे भगवान व गुरू हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने बताया कि दो दिवसीय धर्म संसद में सांई बाबा के भगवान होने तथा उनके गुरू होने का मुद्दा प्रमुख है। इसके अतिरिक्त देश भर में हो रहे धर्मातंरण के साथ -साथ स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में रामायण गीता व महाभारत को शामिल करने के विषय पर अन्य विद्वानों द्वारा रखे गए प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

धर्म संसद का संचालन

काशी के विद्वान के द्वारा धर्म मंच का संचालन किया जाएगा। जहां जयघोष, मंगलाचरण व दीप प्राकट्य के साथ धर्मसंसद का शुभारंभ होगा। उसके बाद चातुर्मास्य आयोजन समिति के अध्यक्ष के द्वारा स्वागत भाषण होगा और प्रस्तावना रखी जाएगी। आए हुए संतों का स्वागत किया जाएगा। शिर्डी सांई बाबा ट्रस्ट से आए हुए अतिथियों का भी स्वागत किया जाएगा। स्वागत उपरांत शिर्डी ट्रस्ट के लोग और शंकराचार्य अपना-अपना पक्ष रखेंगे। अंत में काशी विद्वत परिषद जो कि निर्णायक है के द्वारा अपना निर्णय सुनाया जाएगा।

काशी विद्वत परिषद होगा निर्णायक

सांई बाबा के भगवान व गुरू न होने के औचित्य विषय का निर्णायक काशी विद्वत परिषद होगा। जब कभी भी धर्म के विषय पर निर्णय लेना कठिन होता है उस समय पूरे देश के संत व विद्वान ,काशी विद्वत परिषद के निर्णय को अंतिम मानते आए है। इसलिए इस धर्म संसद का निर्णय काशी विद्वत परिषद के 5 विद्वानों के प्रतिनिधि मंडल करेंगे। जिनके कवर्धा आने की स्वीकृति प्रापत हो चुकी है।

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