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Monday, 24 March 2014

Rahul jumped barricade of his security cover in paratapgarh uttarpradesh

प्रतापगढ़ (यूपी)। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 2014 लोकसभा चुनावों के प्रचार के लिए शनिवार को प्रतापगढ़ पहुंचे थे। वहां पहुंचने पर लोगों को देखकर वो उत्‍साहित हो गए और अपनी सुरक्षा का ध्‍यान न रखते हुए समर्थकों से मिलने लगे।

दरअसल, समर्थकों का जोश देखकर राहुल अपने अंदर के उत्साह को रोक नही पाए और बैरीकेट से कूदकर समर्थकों से मिलें। यही नहीं राहुल ने अपनी एसपीजी वीआईपी सिक्योरिटी का भी ख्याल नहीं रखा।

Source: Lok Sabha Election 2014 News

Sharad pawar says give vote in satara and mumbai two times

अपने कार्यकर्ताओं को फर्जी मतदान के लिए उकसाना राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। चुनाव आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पवार के उस बयान का वीडियो मंगाया है।

शरद पवार रविवार को मुंबई के भांडुप क्षेत्र में सिर पर बोझा ढोनेवाले मजदूरों के बीच अपनी पार्टी की चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। ये मजदूर ज्यादातर महाराष्ट्र के सतारा जनपद से आते हैं।

पवार ने कहा कि पिछली बार मुंबई और सातारा में चुनाव एक ही दिन पड़ा था, इसलिए यहां से सभी लोग वोट डालने के लिए सतारा चले गए थे। वो यहां वोट नहीं डाल पाए। इस बार सतारा में 17 अप्रैल को और मुंबई में 24 अप्रैल को मतदान है। इसलिए आप लोग पहले सतारा में घड़ी (राकांपा का चुनाव निशान) पर मुहर लगाएं। फिर मुंबई आकर यहां भी घड़ी को मतदान कीजिए।

मतदाताओं को यह शिक्षा देते हुए पवार उन्हें सावधानी बरतने के तरीके बताना भी नहीं भूले। उन्होंने कहा कि पहली बार मतदान करते समय अंगुली पर लगाइ गई स्याही मिटा दें। शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता द्वारा अपने मतदाताओं को दी गई यह शिक्षा अन्य दलों को रास नहीं आ रही है।

महाराष्ट्र में उनके इस बयान का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी की मुंबई इकाई ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह फर्जी मतदान के लिए लोगों को उकसाने के लिए शरद पवार की शिकायत चुनाव आयोग से करते हुए वह उन पर सख्त कार्रवाई की मांग करेगी।

अपने बयान पर हो हल्ला मचते देख पवार पलटी मारने में भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने सफाई दी है कि मैंने तो मजाक में ऐसा कहा था। पवार का तर्क है कि चुनावी सभाओं में एक ही जैसी बातें सुनते-सुनते लोग ऊब जाते हैं। इसलिए कभी-कभी ऐसी हल्की-फुल्की बातें भी करनी पड़ती हैं। इसे गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

Jaswant singh slams bjp to contest from barmer

जोधपुर। पार्टी टिकट नहीं मिलने से नाराज वरिष्ठ भाजपा नेता जसवंत बागी हो चले हैं। आज उन्होंने बाड़मेर से निदर्लीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भर दिया।

भाजपा छोड़ने के बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है। इस मुद्दे पर उन्होंने सुबह कहा था, मैं जोधपुर जा रहा हूं। वहां समर्थकों से चर्चा के बाद इस बारे में फैसला किया जाएगा। उन्होंने कहा, जोधपुर के लोग अपमानित महसूस कर रहे हैं।

पार्टी ने नहीं किया संपर्क

भाजपा से इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे की समयसीमा के बारे में पूछे जाने पर जसवंत ने कहा- मैं बाड़मेर में अपने सहयोगियों तथा अन्य लोगों से सलाह कर इस बारे में बाद में बात करूंगा। पार्टी से किसी ने भी मुझसे संपर्क करने की कोशिश नहीं की।

तो किसके लिए भावुक होऊं

सिंह ने कहा- यदि मैं अपने घर और पार्टी को लेकर भावुक न होऊं तो किसके लिए होऊं? यदि पार्टी मुझसे बात करना चाहती है तो उन्हें मेरा नंबर मालूम है। उन्हें पता है कि मुझ तक कैसे पहुंचा जा सकता है।

मैं फर्नीचर का टुकड़ा नहीं

पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह की इस टिप्पणी पर कि उनकी सेवा का उचित इस्तेमाल किया जाएगा, सिंह ने कहा- मैं कोई फर्नीचर का टुकड़ा नहीं हूं। "एडजस्ट" जैसे शब्द का इस्‍तेमाल व्‍यक्ति की मानसिकता को दर्शाता है। आप सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं कर सकते, यह अपमानित करने वाली बात है।अपने समर्थकों द्वारा राजस्थान में नरेंद्र मोदी का पोस्टर फाड़े जाने पर जसवंत सिंह ने कहा- यदि पोस्टर फाड़े गए हैं तो मैं समझता हूं कि पार्टी को यह बताना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है?

बेटे ने पार्टी से मांगी एक महीने की छुट्टी

इस बीच, जसवंत सिंह के पुत्र भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह ने खराब स्वास्थ्य के आधार पर पार्टी से एक महीने की छुट्टी मांगी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि मानवेंद्र बीमार हैं और उन्हें बेड रेस्ट की जरूरत है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने लोकसभा चुनाव की रणनीति तय करने के लिए बाड़मेर तथा जैसलमेर के विधायकों की एक बैठक बुलाई है, लेकिन मानवेंद्र संभवतः उसमें भी हिस्सा नहीं लेंगे। मानवेंद्र बाड़मेर जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

जेटली की नसीहत : नेता "ना" स्वीकारना सीखें

वहीं, वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने जसवंत सिंह मामले को लेकर नसीहत दी है कि कभी-कभी नेताओं को "ना" भी स्वीकार करना चाहिए और यही पार्टी के प्रति उनकी वफादारी की परीक्षा है। उन्होंने कहा- किसी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता एक विशेषाधिकार है। यह एक प्रकार से आत्म उत्पीड़न भी है, जब निजी विचार और महत्वाकांक्षा पार्टी के सामूहिक विवेक के अधीन होता है। ऐसे में कभी-कभी निजी आकांक्षा को लेकर "ना" भी स्वीकारना चाहिए। टिकट नहीं दिए जाने के फैसले को "मुस्कुराकर" स्वीकार करना चाहिए। संयम और चुप रहना हमेशा बेहतर विकल्प होता है।

बिहार में भी बगावत

दूसरी ओर, बिहार भाजपा में भी टिकट को लेकर बगावत हो गई है। चार बार सांसद चुने गए लालमुनि चौबे भी पार्टी टिकट नहीं मिलने से नाराज हैं। उन्होंने पार्टी छोड़ने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वह बक्सर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने रविवार को कहा- मैं सोमवार को अपने फैसले का एलान करूंगा। वाजपेयीजी, आडवाणीजी और जसवंतजी जैसे वरिष्ठ नेताओं की पार्टी में अनदेखी से मैं आहत हूं। मालूम हो कि पार्टी ने इस बार बक्सर सीट से चौबे का टिकट काटकर बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार को टिकट दिया है।