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Tuesday, 24 June 2014

Facing troubles the mind wanders

कुछ छोटे लेकिन कारगर उपायों पर अमल करके मन की शांति तलाशी जा सकती है। बहुत सारी चुनौतियों के बीच, उलझनों और भटकावों से जूझते हुए मन अशांत रहने लगता है।

मन की शांति पाने के लिए कोशिश इसलिए भी जरूरी है कि मन शांत नहीं है तो मिलने वाली सफलताओं में भी आपका मन नहीं लगेगा। जब हमारा मन शांत होता है तो हम चीजों को सही रूप में देख पाते हैं। उनके नए अर्थ और आशय तलाश पाते हैं।

सहज और शांत मन के जरिए ही हम जीवन को जी सकते हैं। मन की शांति के लिए कुछ छोटे कदम मददगार साबित हो सकते हैं।

कुछ समय अकेले रहें

किसी शांत जगह पर कुछ देर अकेले बैठें और अपने बारे में सोचें। अपनी जिंदगी, अपने विश्वासों, अपनी इच्छाओं और अपनी भावनाओं को लेकर विचार करें। अपनी जिंदगी के सभी पक्षों के बारे में विचार से आपको अपने लिए सही दिशा तलाशने में मदद भी मिलेगी।

गुणों और दोषों पर विचार

अपने गुणों का विस्तार करने की दिशा में सोचें और अपनी कमियों को सुधारने की तरफ ध्यान दें। अगर आप अपनी कमियों को किसी तरह अपनी खासियत में बदल सकते हैं तो उस दिशा में भी सोचें। अपने गुणों और अपनी कमियों के बारे में जानकर आप अधिक बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।

नई चीजों के साथ जुड़ें

खुद को नई गतिविधियों और नई संस्कृति में ढालने का प्रयास करें। इस तरह आप अपने ईगो के बारे में भी जान पाएंगे और उसे संभालना भी सीखेंगे। अगर आप नए लोगों के बीच भी असहजता महूसस नहीं करेंगे तो आप अपने कठिन समय में भी शांति तलाश सकेंगे।

ध्यान की मदद लें

ध्यान के जरिए आप भटकते हुए मन को एकाग्र करने का सामर्थ्य जुटा सकेंगे। ध्यान आपको आंतरिक शांति और अपने बारे में जानने में मदद करता है। ध्यान के जरिए आप कठिनाइयों के हल तक पहुंच पाते हैं। यह भटकाव को खत्म करने और स्व पर केंद्रित करने में मदद करता है। ध्यान के जरिए हम अपने मानसिक सामर्थ्य का भी विस्तार करते हैं।

प्रेमभाव से जीवन को देखें

अपने आसपास की चीजों, प्रकृति और संसार को प्रेमभाव के साथ देखें। उनकी बहुत छोटी-छोटी विशेषताओं पर गौर करें। बिना किसी शर्त के अपने मित्रों के प्रति प्रेम व्यक्त करें। दुनिया की आलोचना करना बंद करें। दूसरों के दोषों को नहीं उनकी खासियत तलाशें। ऐसा करते ही आप पाएंगे कि अब कोई भी द्वंद्व नहीं है और जीवन शांत अवस्था में है।

दूसरों के प्रति आभारी रहें

अपनी जिंदगी, परिजनों, प्रियजनों, मित्रों और अन्य साथियों के प्रति आभारी रहें। वे किस तरह आपकी जिंदगी को खुशनुमा बनाते हैं उसके लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करें। यह आभार शब्दों में नहीं बल्कि आपके व्यवहार और आपके उनके प्रति प्रेम द्वारा व्यक्त होना चाहिए। इससे सच्ची शांति मिलेगी।

Monday, 10 March 2014

Ten easy steps to please lakshmi ji

अगर आप धन की कमी से परेशान हैं तो घबराने की जरूरत नहीं, यहां हम कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिनको आजमाकर आप भी धन धान्य और समृद्धि से पूर्ण हो सकते हैं।

1. सबसे पहले सुबह उठ कर अपनी हथेलियों को जरूर देखें और मन ही मन मां लक्ष्मी की कृपा मांगें।

2. किसी भी विशेष कार्य पर या ऑफिस जाते समय एक दाना केसर का मुंह में रखकर घर से निकलें। ऐसा करने से आपको लक्ष्मी जी की कृपा मिलती है।

3. कभी भी कर्ज मंगलवार के दिन न लें। साथ ही कर्ज की पहली किश्त बुधवार को देना शुरु करें। कर्ज के लिए कोई बात भी मंगलवार से शुरू न करें।

4. यदि आपके आस पास लक्ष्मी मंदिर या अन्नपूर्णा मंदिर हो तो वहां से थोड़े से अक्षत (चावल) घर लाकर लाल वस्त्र में लपेट कर घर में ही धन रखने के स्थान में रखें।

5. मूंग की दाल खाना और दान करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। अगर आप इसकी शुरुआत बुधवार से करते हैं तो उसकी शुभता की ज्यादा वृद्धि होती है।

6. सप्ताह में एक दिन अपने कार्य क्षेत्र के किसी कर्मचारी को भरपेट भोजन अवश्य कराएं। विशेष तौर पर शनिवार को भोजन करवाने से आपको धन लाभ मिलेगा।

7. अपने कार्यक्षेत्र या वर्क टेबल पर एक खड़ी हल्दी की गांठ भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के चरणों से स्पर्श करा कर के पीले कपड़े में बांधकर रखना आर्थिक स्थिति में विशेष लाभ देता है।

8. ऋण को कम करने वाले गणपति स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा ऋण मोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करना आर्थिक पक्ष को मजबूत करता है। आप इनके तीन पाठ करते हैं यानी 90 दिनों का अनुष्ठान करते हैं तो कितना भी आप पर कर्ज हो दूर हो जाएगा। ताकि आप पर कर्ज न रहे और आप धनवान बन सकें।

9. घर में देसी घी का दीपक जलाना और पूजा के स्थान पर थोड़ा-सा देसी घी खुले पात्र में रखना मां लक्ष्मी को आकर्षित करता है। ऐसा इसलिए क्याेंकि मां लक्ष्मी को देसी घी की सुगंध आकर्षित करती है।

10. श्री सूत्र कणक धारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। मां लक्ष्मी का दिव्य मंत्र 'ऊं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसिद्व नमः' मंत्र का नियमित 108 बार जाप करें।