Monday, 7 April 2014

Mahagauri fulfill wishes of devotees

नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी शक्ति की पूजा की जाती है। इनका रूप गौर वर्ण है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसलिए इन्हें श्वेताम्बरधरा कहा जाता है। मां की चार भुजाएं हैं और वाहन वृषभ है।

इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किए हुए है। इनकी पूरी मुद्रा शांत है। शिव को पति रूप में पाने के लिए महागौरी ने तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया। यही वजह है कि वे महागौरी कहलाईं।

फल की प्राप्ति

मां महागाैरी की अाराधना अमोघ फलदायिनी है और उससे भक्तों के तमाम पाप नष्ट हो जाते हैं। महागौरी का पूजन, अर्चना, उपासना करने से अलौकिक सिद्धियों की प्राप्ति होती है।

इस मंत्र का करें जाप

श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्धान्महादेवप्रमोददा।।

Karna and arjuna who is the best

जब महाराज युधिष्ठिर इंद्रप्रस्थ पर राज्य करते थे। वे काफी दान आदि भी करते थे। धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धि दानवीर के रूप में फैलने लगी और पांडवों को इसका अभिमान होने लगा। एक बार कृष्ण इंद्रप्रस्थ पहुंचे। भीम व अर्जुन ने युधिष्ठिर की प्रशंसा शुरू की कि वे कितने बड़े दानी हैं।

तब कृष्ण ने उन्हें बीच में ही टोक दिया और कहा- हमने कर्ण जैसा दानवीर और नहीं सुना। पांडवों को यह बात पसंद नहीं आई। भीम ने पूछ ही लिया, कैसे? कृष्ण ने कहा कि समय आने पर बतलाऊंगा।

कुछ ही दिनों में सावन का माह शुरू हो गया और वर्षा की झड़ी लग गई। उस समय एक याचक युधिष्ठिर के पास आया और बोला, महाराज! मैं आपके राज्य में रहने वाला एक ब्राह्मण हूं और मेरा व्रत है कि बिना हवन किए कुछ भी नहीं खाता-पीता। कई दिनों से मेरे पास यज्ञ के लिए चंदन की लकड़ी नहीं है। यदि आपके पास हो तो, मुझ पर कृपा करें, अन्यथा हवन तो पूरा नहीं ही होगा, मैं भी भूखा-प्यासा मर जाऊंगा।

युधिष्ठिर ने तुरंत कोषागार के कर्मचारी को बुलवाया और कोष से चंदन की लकड़ी देने का आदेश दिया। संयोग से कोषागार में सूखी लकड़ी नहीं थी। तब महाराज ने भीम व अर्जुन को चंदन की लकड़ी का प्रबंध करने का आदेश दिया। लेकिन काफी दौड़- धूप के बाद भी सूखी लकड़ी की व्यवस्था नहीं हो पाई। तब ब्राह्मण को हताश होते देख कृष्ण ने कहा, मेरे अनुमान से एक स्थान पर आपको लकड़ी मिल सकती है, आइए मेरे साथ।

ब्राह्मण की आखों में चमक आ गई। भगवान ने अर्जुन व भीम को भी इशारा किया, वेष बदलकर वे भी ब्राह्मण के संग लिए। कृष्ण सबको लेकर कर्ण के महल में गए। सभी ब्राह्मणों के वेष में थे, अत: कर्ण ने उन्हें पहचाना नहीं। याचक ब्राह्मण ने जाकर लकड़ी की अपनी वही मांग दोहराई। कर्ण ने भी अपने भंडार के मुखिया को बुलवा कर सूखी लकड़ी देने के लिए कहा, वहां भी वही उत्तर प्राप्त हुआ।

ब्राह्मण निराश हो गया। अर्जुन-भीम प्रश्न-सूचक निगाहों से भगवान को ताकने लगे। लेकिन वे अपनी चिर-परिचित मुस्कान लिए बैठे रहे। तभी कर्ण ने कहा, हे देवता! आप निराश न हों, एक उपाय है मेरे पास। उसने अपने महल के खिड़की-दरवाजों में लगी चंदन की लकड़ी काट-काट कर ढेर लगा दी, फिर ब्राह्मण से कहा, आपको जितनी लकड़ी चाहिए, कृपया ले जाइए। कर्ण ने लकड़ी पहुंचाने के लिए ब्राह्मण के साथ अपना सेवक भी भेज दिया।

ब्राह्मण लकड़ी लेकर कर्ण को आशीर्वाद देता हुआ लौट गया। पांडव व श्रीकृष्ण भी लौट आए। वापस आकर भगवान ने कहा, साधारण अवस्था में दान देना कोई विशेषता नहीं है, असाधारण परिस्थिति में किसी के लिए अपने सर्वस्व को त्याग देने का ही नाम दान है। अन्यथा चंदन की लकड़ी के खिड़की-द्वार तो आपके महल में भी थे।

संक्षेप में

हमें ऐसे कार्यों में संलग्न करना चाहिए कि भगवान स्वयं हमें देखेे। केवल एक गुण या एक कार्य में अगर हम पूरी निष्ठा से अपने को लगा दें, तो कोई कारण नहीं कि भगवान हम पर प्रसन्न न हों।

कर्ण ने कोई विशेष कार्य नहीं किया, किंतु उसने अपना यह नियम भंग नहीं होने दिया कि उसके द्वार से कोई निराश नहीं लौटेगा।

Tuesday, 1 April 2014

RBI bars foreign investors from short-term local debt

The Reserve Bank of India (RBI) on Tuesday barred foreign investors from buying government debt with less than one-year maturity to encourage longer-term fund inflows and reduce the country's dependence on hot money.

The steps had been expected given RBI officials have expressed concern that foreign institutional investors (FIIs) are excessively invested in treasury bills, creating concerns about the sturdiness of these flows.

Regulatory data showed foreign funds have utilised almost 90 percent of the permissible limit of $5.5 billion in treasury bills, whereas overall debt limit utilisation stands at just about 60 percent.

Existing investments in treasury bills would be allowed to taper off.

The RBI also allowed foreign investors to hedge against coupon proceeds due within the next 12 months, while saying it was working to allow overseas funds to hedge via currency futures in domestic exchanges, neither of which was previously allowed.

"The Reserve Bank will continue to work to ease entry while reducing risk to foreign investors from the volatility of flows," the central bank said in its policy statement.

The announcements came as part of the central bank's decision on Tuesday to keep interest rates unchanged.

Bond and currency markets were closed on Tuesday to mark the start of the new fiscal year.

Analysts said the eased hedging rules would likely have a limited impact, but should help make investing in debt easier.

The moves would also further develop domestic currency markets at a time when regulators worry about the popularity of trading of currency futures in offshore markets such as Singapore.

The rupee is only partially convertible, and thus not fully opened to foreign investors...


From reuters News

Sensex, Nifty scale new highs; blue-chip stocks rise

The BSE Sensex and Nifty rose to a record high for a seventh consecutive session as blue chips such as Larsen & Toubro extended a rally after the Reserve Bank of India (RBI) left interest rates unchanged and said it did not expect policy tightening in the near-term.

The RBI has raised the repo rate by 75 basis points since September to contain high inflation, but analysts had expected the central bank would keep rates steady ahead of general elections and an uncertain economic growth outlook.

India's record-setting share rally has been sparked by heavy foreign buying - reaching a $3.3 billion in March - as analysts cite expectations of a recovery in the domestic economy, and bets that main opposition Bharatiya Janata Party, perceived as more business-friendly, will come to power.

However, analysts warn momentum could eventually wane, with investors on Tuesday also booking profits in recent outperformers such as banks. Data on Tuesday showed manufacturing activity grew at a slower pace in March as weaker domestic demand dragged on output growth.

"We continue to believe that till the election result is clear, index will remain in the sidelines and bulk of the action will be witnessed in mid and small caps," Vinod Nair, Head-Fundamental Research, Geojit BNP Paribas Financial Services.

Profit booking in banking stocks is only a near-term phenomenon, added Nair.

The BSE Sensex rose as much as 0.44 per cent to an all-time high of 22,485.77, while Nifty gained 0.41 per cent to a record high of 6,732.25.

Sensex ended 0.27 per cent higher while Nifty ended up 0.25 per cent.

Source: Hindi News

From ndtv News

God is formless of has a form

पूरी दुनिया में विद्वान लोग ईश्वर के प्रति एक खास नजरिया रखते हैं। उनका सोचना है कि ईश्वर निराकार है। हम उसे वैसे नहीं देख सकते हैं, जैसे अपने को आईने में देखते हैं। ईश्वर पूरी तरह से बोध का मामला है। जो उस बोध से गुज़रता है, वही बुद्ध हो जाता है।

सरल लोग, जिनकी दुनिया उनकी रोजी-रोटी के इर्द-गिर्द मंडराती रहती है, वे ईश्वर को निराकार नहीं मानते। उनका खयाल है कि ईश्वर हमारी तरह ही कहीं होगा और वहीं से हमारे ऊपर नज़र रख रहा होगा। यही बात दर्शन और पौराणिक शब्दावली में कही जाए तो ईश्वर सगुण है।

ठीक वैसे ही जैसे हम लोग सगुण हैं। वहीं विद्वानों ने ईश्वर को निर्गुण बना रखा है-निरगुनिया। अब यह दर्शन का बड़ा महत्वपूर्ण द्वंद्व है। इस पर बड़ी बहसें हुई हैं। कई सिद्धांतों का प्रतिदान किया गया है। ईश्वर निराकार भी है और साकार भी। ईश्वर निर्गुण भी है और सगुण भी है। भारतीय धर्मों में इसे बहुत शांत तरीके से बताया गया है।

अगर भगवान साकार हैं, सगुण हैं तो उनके लिए ईश्वर शब्द चुना है। ब्रह्म का केवल बोध किया जा सकता है। यही बोध आध्यात्मिकता की पराकाष्ठा होगा, जिसे हम परमतत्व या अंतिम सत्य के रूप में स्वीकार करते हैं। यहां ईश्वर हमारे बहुत करीब आ जाता है और हम उसे थोड़ा नीचे ले आते हैं।

जब ईश्वर थोड़ा और नीचे आता है तो अवतार के रूप में आ जाता है-कभी राम बनकर, कभी श्याम बनकर। यहां से एक आम आदमी के लिए ईश्वर के साथ तादात्म्य बैठाना और सरल हो जाता है।

पूरी दुनिया में भक्ति की मदद से ईश्वर की निकटता आम आदमी के लिए बिलकुल ठीक-ठीक समझ में आने वाली बात हो जाती है। अवतार की थ्याेरी ईश्वर का सरलीकरण है। ईश्वर और आध्यात्मिकता से संबंधित जितने प्रतीक हैं उन पर भी गाैर करना चाहिए। ईश्वर को अगर वाणी में व्यक्त करें तो वह 'ऊँ' होगा।

अगर आंखों से देखने वाली किसी ऑब्जेक्टिव चीज़ के रूप में व्यक्त करें तो वह प्रकाश होगा। यहां तक तो सब ठीक होगा, लेकिन जो निराकार हो, जिसका कोई आकार ही नहीं है जो दिखता ही नहीं है, फिर उसे कैसे व्यक्त करेंगे? लेकिन भारतीय आध्यात्मिकता ने निराकार को भी व्यक्त करने के कुछ तरीके सोचे होंगे। हमारी आध्यात्मिक परंपरा में 'ध्यान या मेडिटेशन' निराकार को व्यक्त करता है।

इस तरीके को ही हम ध्यान या मेडिटेशन के नाम से जानते हैं। अगर आप भगवान के करीबी शिष्यों में शामिल होना चाहते हैं तो आपको उनके निराकार स्वरूप का बोध करना पड़ेगा, जो आप केवल मेडिटेशन से हासिल कर सकते हैं।

Kanya puja is done

नवरात्र में हवन करने के बाद कन्या पूजन करने का महत्तव है। बड़े पर्वों पर, पुण्य मुहूर्त में और महानवमी के दिन कन्या पूजन का बहुत महत्व माना गया है।

वेदों में कुंआरी कन्याओं को साक्षात् देवी का स्वरूप माना गया है। कन्या पूजन से सम्मान, लक्ष्मी, विद्या और तेज की प्राप्त होता है। कन्याएं विघ्न, भय और शत्रु का नाश करती हैं

शास्त्रों के अनुसार ये हैं कन्याएं

दो वर्ष कन्या की कुमारी, तीन वर्ष की त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की रोहिणी, छः वर्ष की बालिका, सात वर्ष की चण्डिका, आठ वर्ष की शाम्भरी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा कहलती हैं।

ग्यारह वर्ष से ऊपर की अवस्था की कन्याओं का पूजन वर्जित माना जाता है। कहा जाता है कि होम, जप, और दान से देवी इतनी प्रसन्न नहीं होती जितनी कि कन्या पूजन से होती हैं।

दुःख, दरिद्रता और शत्रु नाश के लिए कन्या पूजन सर्वोत्तम माना गया है। यह कोई आवश्यक नही कि नौ कन्याओं का ही पूजन किया जाए एक कन्या का पूजन भी उतना फलदायक होता है जितनी नौ कन्याओं का।

Brmhacharini get quietness of mother worship morality and restraint

मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का है। ब्रह्मचारिणी का अर्थ है तप का आचरण करने वाली देवी । देवी मां के दायं हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमण्डल धारण किए रहतीं हैं।

पूर्वजन्म में देवी ने हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था और भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इसलिए इनका नाम शास्त्रों में ब्रह्मचारिणी कहा गया है।

कठिन तपस्या करने के कारण देवी ब्रह्मचारिणी का शरीर एकदम क्षीण हो गया था। तब देवता, ऋषि, सिद्धगण, मुनि सभी ने ब्रम्हाचारिणी की तपस्या को अभूतपूर्व पुण्यकृत्य बताया।

फल की प्राप्ति

मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, और संयम की वृद्धि होती है।

करें इस मंत्र का जाप

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रम्हाचारिण्यनुत्तमा।।