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Tuesday, 29 July 2014

TI arrived on stretcher in court

हाईकोर्ट की फटकार के बाद सोमवार को दुर्घटना में घायल गौरेला टीआई एसएस शुक्ला को स्ट्रेचर में अदालत लाया गया। सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट रूम के अंदर स्ट्रेचर में सुला कर रखा गया। बहस के लिए अधिवक्ता के नहीं आने पर 30 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख दी गई है।

गौरेला पुलिस ने पिछले वर्ष गौरेला निवासी सविता सोनी को गांजा बेचने के आरोप में पकड़ा था। इस मामले में तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार नायडू की अदालत में सुनवाई चल रही है। पिछले एक वर्ष से जेल में बंद महिला ने निचली अदालत से जमानत खारिज होने पर हाईकोर्ट में आवेदन पेश किया। आवेदन में कहा गया कि बयान के लिए टीआई सहित अन्य को कई बाद समंस जारी किया गया।

इसके बावजूद पुलिस कर्मी गवाही के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे। इसके कारण आवेदिका को जेल में रहना पड़ रहा है। आवेदन को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को तलब किया था। इसमें वारंट और समंस तामीली में होने वाले विलंब व पुलिस की लापरवाही पर जमकर फटकार लगाई थी।

हाईकोर्ट में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने टीआई के बीमार होने की बात कही। हाईकोर्ट ने टीआई को स्ट्रेचर में कोर्ट लाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट की फटकार के बाद सोमवार को उन्हें पुलिस लाइन की एंबुलेंस से जिला न्यायालय लाया गया।

Naxal encounter the first day of the week a pile of martyrdom

नक्सलियों के शहीदी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के रामाराम के जंगलों में पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक नक्सली मारा गया वहीं सीआरपीएफ के दो जवान घायल हो गए हैं। शहीदी सप्ताह के चलते बस्तर के अंदरूनी इलाकों में यातायात भी प्रभावित रहा। सोमवार को सीआरपीएफ व पुलिस की संयुक्त पार्टी सर्चिंग के लिए निकली थी।

रामाराम से लगे जंगल में छिपे नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। घटना में सीआरपीएफ के एक हवलदार समेत दो जवानों को गोली छीलती हुई निकली जिससे वह मामूली रूप से घायल हो गए। उनका प्राथमिक उपचार चिंतलनार में किया गया। करीब दो घंटे तक चली गोलीबारी के बाद घटना स्थल की सर्चिंग करने पर एक वर्दीधारी नक्सली का शव बरामद किया गया है। एक भरमार बंदूक भी मिली है। घायल जवानों का नाम अभी ज्ञात नहीं हुआ है।

अफवाह निकली गोलीबारी की घटना

शहीद सप्ताह के पहले दिन कुआकोण्डा थाने पर नक्सली गोलीबारी की अफवाह ने पुलिस के आला अफसरों के कान खड़े कर दिए। रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात कुआकोण्डा थाना पर नक्सलियों द्वारा आधे घंटे तक गोलीबारी की खबर आई थी जिसे एसपी ने नकारते महज अफवाह बताया है। एसपी कमलोचन कश्यप का कहना है कि आधी रात थाने पर नक्सलियों ने गोलीबारी नहीं की। वे स्वयं कुआकोण्डा थाना में मौजूद थे।

एसपी के अनुसार पुलिस को खुफिया सूत्रों से यह जानकारी मिली थी कि कुछ संघम सदस्य सुकमा मार्ग पर भूसारास घाटी में सड़क खोदने की फिराक में हैं। इस पर वे दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। वहां मौके पर कोई नजर नहीं आया। एसपी ने बताया कि शहीद सप्ताह के मद्देनजर आलनार की तरफ सर्चिंग पर निकले जवानों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए स्मारक को ध्वस्त किया है। नक्सलियों की सक्रियता को देखते पुलिस ऐहतियात बरत रही है।

थमे बसों के पहिए

3 अगस्त तक चलने वाले शहीदी सप्ताह के पहले दिन दक्षिण बस्तर में यातायात पर नक्सली खौफ नजर आया। नक्सली दहशत से नारायणपुर के ओरछा, दंतेवाड़ा के कटेकल्याण व मारडूम मार्ग पर यात्री बसों के पहिए थमे रहे। वहीं सुकमा-कोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगने से बसों का परिचालन ठप रहा। दहशत फैलाने की मंशा से नक्सलियों ने दंतेवाड़ा-सुकमा मार्ग पर गादीरास के पास सड़क के दोनों ओर पेड़ों पर बड़ी तादाद में पर्चे चिपकाए थे। इसी तरह बारसूर-मारडूम मार्ग पर भी पर्चे मिलने की खबर है।

Sunday, 27 July 2014

Candidates rise objected on two questions and congressman one in psc exam

मप्र राज्यसेवा प्रारंभिक परीक्षा-2013 रविवार को प्रदेशभर में आयोजित हुई। इसमें सामान्य अध्ययन के दो सवालों पर उम्मीदवारों ने आपत्ति दर्ज करवाई है। उधर शहर के कुछ परीक्षा सेंटरों पर परीक्षार्थियों के अंगूठे के निशान ही नहीं लिए गए।

पहले सवाल में स्वामी विवेकानंद के विश्वधर्म सम्मेलन में दिए भाषण का वर्ष पूछा गया था। इसके विकल्प में 1863, 1892, 1881 और 1894 सन दिए हैं। अभ्यर्थी चंद्रकांत त्रिवेदी के मुताबिक सही जवाब 1893 है, लेकिन उसे दिया ही नहीं। इसी तरह एक अन्य सवाल में पूछा गया कि कौन सी नदी डेल्टा नहीं बनाती है? इसके विकल्पों में गंगा, स्वर्णरेखा, नर्मदा और ताप्ती के विकल्प दिए गए। उम्मीदवारों के मुताबिक नर्मदा और ताप्ती दोनों डेल्टा नहीं बनाती हैं, ऐसे में किसी एक विकल्प को चुना ही नहीं जा सकता।

अंगूठे नहीं लगवाए

परीक्षा के दौरान सभी उम्मीदवारों के आंसरशीट पर अंगूठे के निशान दर्ज करने थे,लेकिन कुछ केंद्रों पर इसका पालन नहीं किया गया। इसमें राजेंद्रनगर स्थित आईपीएस एकेडमी और सिक्का स्कूल सेंटर शामिल हैं। जबकी नसिया रोड स्थित गुजराती कॉलेज और महावीर बाल मंदिर के केंद्रों पर एक पेपर में ही निशान दर्ज किए गए। संयोगितागंज के शासकीय कन्या विद्यालय क्रमांक 5 में बने केंद्र पर एक ही बैंच पर दो-दो उम्मीदवारों ने बैठकर परीक्षा दी।

कांग्रेस का विरोध

सामान्य अध्ययन में पूछे गए एक सवाल-डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कब की थी ? पर कांग्रेसियों ने भी विरोध जताया है। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और सचिव महक नागर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार संघ का प्रचार करना चाहती है। परीक्षा में संघ के सवाल नहीं पूछे जा सकते।

कई सेंटर पर नहीं मिला यात्रा भत्ता

कई सेंटर पर यात्रा भत्ता नहीं देने का मामला सामने आया है। परीक्षार्थियों ने आपत्ति जताई, तो ऑर्ब्जवरों ने प्रशासन के आदेश को सामने कर दिया। इसमें मालवा कन्या स्कूल (मोती तबेला), नंदानगर बॉयज हाई स्कूल समेत कई सेंटर पर यह समस्या परीक्षार्थियों को आई। बाद में बिना भत्ता दिए लौटा दिया गया। धीरत रावलिया ने बताया कि हमें इंटरव्यू में राशि देने की बात कहीं गई है। वहीं हमारे दोस्तों को जिनका सेंटर जीडीसी और जेएसीसी था। उन्हें पूरा भत्ता दिया है। वहीं सारणी के उत्तम नर्रे को महज एक तरफ का यात्रा भत्ता दिया है।

उत्तरप्रदेश का पेपर

परीक्षा के बाद पीएससी में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि पेपर उत्तर प्रदेश के शिक्षकों ने सेट किया है। अभ्यर्थियों ने दावा किया कि भंवरकुआं स्थित पीएससी के एक कोचिंग संचालक ने अपने विद्यार्थियों से पहले ही कह दिया कि उत्तरप्रदेश को ज्यादा पड़ें। ज्यादातर सवाल उत्तरप्रदेश से जुड़े आए हैं। अभ्यर्थी कह रहे हैं कि कोचिंग वाले को पहले से इसका पता कैसे चल गया।

कठिन आया पेपर

पिछले साल के मुताबिक इस बार प्रश्न पत्र कठिन आया है। मगर पत्र का स्तर बेहतर हुआ है, जिसे पढ़ाई करने वालों को अच्छे नंबर आने की उम्मीद है।

- पुखराज गेहलोत, परीक्षार्थी

प्रदेश के बाहर के पूछे सवाल

हर बार परीक्षा में मप्र से जुड़े सवाल अधिक रहते हैं। मगर इस बार अन्य प्रदेशों व खेल संबंधी प्रश्न ज्यादा पूछे गए हैं, जिससे स्कोरिंग करने में आसानी हो गई है।

- अंकित मालवीय, परीक्षार्थी

समय बच गया

सवाल हल करने के लिए समय पर्याप्त रहा। यहां तक की समय से पहले ही मेरे दोनों पेपर हो चुके थे। सामान्य ज्ञान स्कोरिंग रहा।

- प्रदीप कुमार, परीक्षार्थी

इतिहास के सवाल थे बेहतर

सामान्य ज्ञान वाले प्रश्न पत्र में भारतीय खेलों को अधिक तवज्जो दी गई है। वहीं इतिहास के सवाल अच्छे पूछे गए हैं।

- राकेश सोलंकी, परीक्षार्थी

कोई शिकायत नहीं

परीक्षा बेहतर ढंग से संपन्न हुई। प्रदेश के किसी भी केंद्र से किसी तरह की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली है।

- मनोहर दुबे, सचिव मप्र पीएससी

Sudhir sharma office was empty before stf reached

व्यापमं की पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़े मामले में गिरफ्तार खनिज कारोबारी सुधीर शर्मा के एमपी नगर स्थित एसआर फेरो एलॉयज नाम के दफ्तर को रविवार को आनन-फानन में खाली करा लिया गया। एसटीएफ जब तक सुधीर शर्मा को लेकर उसके दफ्तर पहुंचती तब तक पूरा दफ्तर खाली हो चुका था। फाइलों, जरूरी दस्तावेजों और कुर्सी-टेबलों से भरा एक ट्रक वहां से जा चुका था। इन्हें व्यापमं में हुए फर्जीवाड़े से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

शर्मा 30 जुलाई तक एसटीएफ की रिमांड पर हैं। शर्मा के एमपी नगर जोन -2 स्थित उसके ऑफिस को इस तरह खाली कराए जाने के पीछे कई महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। काफी वक्त से बंद पड़े इस दफ्तर में व्यापमं घोटाले से संबंधित कई महत्वपूर्ण फाइलें होने की संभावनाएं जताई जा रही है।

ऐसी आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि सुधीर के दफ्तर से जिन फाइलों को हटाया गया है, वे उसकी खदानों से भी जुड़ी हो सकती हैं। सुधीर की झाबुआ जिले में मैग्नीज की दो खदान हैं। इसी का दफ्तर इस बिल्डिंग में संचालित किया जा रहा था।

पहले ही खाली कर दिया था

शर्मा ने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि वे अपना दफ्तर किराए के भवन में संचालित कर रहे थे। साथ ही उन्होंने दफ्तर 30 जून को ही खाली कर दिया था।

कराया जाएगा आमना- सामना

एसटीएफ जल्द ही सुधीर का आमना सामना व्यापमं की विभिन्ना परीक्षा में हुए फर्जीवाड़े के मामले में जेल में बंद पूर्व कांग्रेस नेता संजीव सक्सेना से कराएगी। इसके लिए एसटीएफ संजीव को दोबारा रिमांड पर लेगी। सक्सेना ने अपने बयान में कहा था कि सुधीर उसका बचपन का दोस्त है।

व्यापमं के पूर्व चीफ सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिन्द्रा ने जब उसके उम्मीदवारों को सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पास करने से इंकार कर दिया था तब उसने सुधीर के जरिए केहर सिंह और गजेन्द्र सिंह को सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा की लिखित परीक्षा में पास कराया था। सक्सेना के इन्हीं बयानों की तस्दीक के लिए एसटीएफ उसे रिमांड पर लेगी।

एसटीएफ ने साधी चुप्पी

एसटीएफ के डीएसपी डीके तिवारी से जब इस बारे में पूछा गया कि दफ्तर किसने खाली कराया है तो उन्होंने कुछ भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।

Careful avoiding to get here is threatening the bridges and culverts

गैरतगंज पुल का टूटना, जाम नदी पुल से बस गिरना, रहटगांव पुल के बहने की घटनाएं रूह कंपा देती हैं। गौरतलब है कि दो वर्ष पूर्व रायसेन जिले के गैरतगंज कस्बे के पास ट्राला के चढ़ने से पुल के दो टुकड़े हो गए थे। हरदा जिले के रहटगांव में बाढ़ से टिमरन नदी का पुल बह गया था। एक दशक पूर्व छिंदवाड़ा जिले के सौंसर में जाम नदी के पुल से बस गिरने से 35 लोगों की मौत तथा टीकमगढ़ जिले के ओरछा में बेतवा नदी के पुल से बस बहने से 40 लोगों मौत लोग भूले नहीं हैं।

जर्जर तथा रैलिंग विहीन पुल-पुलियों के कारण सैकड़ों लोगों की मौत पिछले एक दशक में हुई हैं। सरकारें सचेत हुईं और जर्जर पुल- पुलियों को दुरुस्त करने के नीतिगत फैसले लिए गए हैं। मसलन सेतु विकास निगम को समाप्त कर सड़क निर्माण एजेंसी को गारंटी के साथ पुल-पुलियों के निर्माण का जिम्मे सौंपा है। नई सड़क बनेगी तब नए पुल बनेंगे। परंतु पुराने जर्जर पुल-पुलियों को कौन दुरुस्त करे इसको लेकर विभागों के बीच नूरा-कुश्ती चलती रहती है।

मप्र में ढहने की कगार पर पहुंचे पुल-पुलियों से अब भी लाखों लोग जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं। प्रदेश के हरदा, छिंदवाड़ा, बैतूल, होशंगाबाद, रायसेन, विदिशा, सीहोर, गुना जिलों में मौत के इन जर्जर पुल-पुलियों से गुजरते वक्त न केवल ड्राइवरों बल्कि यात्रियों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है।

अजनाल नदी का पुल कभी भी गिरने की स्थिति में

हरदा। अजनाल नदी पर बना गुप्तेश्वर पुल जर्जर हो गया है। पुल की रैलिंग भी हटा दी गई है। जिसके कारण कभी भी कोई हादसा हो सकता है। सावन माह में गुप्तेश्वर मंदिर जाने वालों की संख्या बहुत अधिक हो जाती है। ऐसे में खतरा ज्यादा बना रहता है। इसी प्रकार हरदा देवास जिले की सीमा को जोड़ने वाली नर्मदा नदी का पुल भी अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा है। इस पुल से भारी वाहनों के गुजरने पर कंपन होता रहता है।

बताया कि यह पुल 1981 में बनकर तैयार हुआ था। इसके बारे में बताया जाता है कि पुल के जर्जर होने पर शासन ने एक समिति का गठन किया था, जिसने भी संभवत: पुल के खतरनाक होने की जानकारी लिखी है। हालांकि दो साल पहले इस पुल की मरम्मत की गई थी। रोलगांव में स्थित माचक पुल भी जर्जर है, पुल की मरम्मत होने के बाद भी यहां पर खतरा बना रहता है। इस पुल के दोनों छोर पर मिट्टी के कटाव से वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है।

नेशनल हाईवे पर स्थित उप जेल के समीप सुकनी नदी का पुल भी जर्जर हो गया, हालांकि इस पुुल का निर्माण बारिश के बाद होना है। नेशनल हाईवे पर ही चारखेड़ा के समीप एक पुलिया कभी भी हादसे का सबब बन सकती है। यह पुलिया जर्जर होने के साथ ही मोढ़ पर होने और सकरी होने से कई बार हादसे होते रहते हैं। याद रहे दो साल पहले रहटगांव के पास टिमरन नदी का पुराना पुल बाढ़ में बह गया था।

जर्जर पुलों में रैलिंग भी नहीं

बैतूल। भोपाल-नागपुर हाईवे पर स्थित शाहपुर व भौंरा में माचना व सूखी नदी के पुल पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसके अलावा इन पर रैलिंग तक नहीं है। बैतूल से लेकर भौंरा तक 50 किलोमीटर लम्बी सड़क पर 17 पुल-पुलिया ऐसी हैं जिन पर रैलिंग नहीं हैं। शाहपुर में हाल ही में लगाई गई रैलिंग भी गायब हो चुकी है। इसी तरह बैतूल-इंदौर हाईवे पर स्थित करबला और भडूस में स्थित पुल भी बेहद खस्ता है। करबला पुल पर रैलिंग नहीं होने से हाल में एक युवक बह गया। इसके अतिरिक्त भी यहां हादसे होते रहते हैं। गांव-गांव तक सड़क पहुंचाने प्रधानमंत्री सड़कों की पुलियाओं पर भी रैलिंग नहीं हैं। बैतूल शहर में अंग्रेजों के जमाने में गंज क्षेत्र में बनाई गई तीनों पुलियाएं भी बुरी तरह जर्जर हो चुकी हैं।

7 साल से जर्जर बीना नदी का पुल

सागर। जिले के खुरई तहसील मुख्यालय से लगभग 10-12 किमी दूर स्थित निर्तला-मण्डीबामोरा मार्ग पर बीना नदी पर बना पुल करीब 7 वर्षों में ही जर्जर हो चला है। पुल की सीसी जगह-जगह से उखड़ गई है। यह मार्ग मण्डीबामोरा को सीधा खुरई से जोड़ता है। ढ़ाना पुल के दोनों ओर पर्याप्त रैलिंग नहीं है और नदी का पानी उफान में आने के कारण बारिश के मौसम में कई बार रास्ता बंद हो जाता है। बीना से सिरोंज तक बनने वाले मार्ग में बीना-सिरोंज मार्ग का निर्माण्ा कार्य टीसीआईएल कंपनी द्वारा पुरानी पुलियों पर ही सड़क बना दी गई है। यह वर्षों पुरानी होने से यह कई जगह से जजर््ार हो चुकी है। यह भोपाल, गुना जाने वाला मुख्य मार्ग है। रिफाइनरी के वायपास रोड के पास पुलिया बहुत नीचे है।

आजादी के पहले बना था यह पुल

गंजबासौदा। पारासरी नदी पर बना पुल और नगर को सिरोंज से जोड़ने के लिए बेतवा नदी का पुल आजादी से पूर्व का बना है। दोनों ही पुलों की हालत खराब है। पुराने नगर को रेलवे स्टेशन क्षेत्र से जोड़ने के लिए आजादी के पूर्व पारासरी नदी पर पुल का निर्माण कराया गया था। इस पुल पर प्रतिदिन हजारों वाहनों के आवागमन का दबाब रहता है। बासौदा-सिरोंज मार्ग पर बेतवा नदी पर भी काफी पुराना और विशाल पुल बना हुआ है। नगर को विदिशा-अशोकनगर राजमार्ग सहित सिरोंज, कुरवाई आदि क्षेत्रों से जोड़ने वाले मार्ग पर बना यह पुल भी आवागमन की दृष्टि से काफी महत्व का है। इस पुल की देखरेख में भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। करीब चार वर्ष पूर्व हुई भारी बरसात में इस पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया थ्ाा।

हाईवे की दो जानलेवा पुलिया

होशंगाबाद। एनएच 69 पर बनी दो प्रमुख पुलियाएं जानलेवा हैं। यहां अब तक कई वाहन गिर चुके हैं। इसमें कई की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। रसूलिया क्षेत्र की दोनों पुलिया खूनी पुलिया के नाम से बदनाम है। इनके विकल्प के रूप में दूसरी पुलियाएं तैयार हो रही हैं, लेकिन इनका काम कछुआ गति से चल रहा है। हरदा मार्ग के ऊपर बनी एसपीएम के पास की संकरी पुलिया पर बीते तीन साल से रैलिंग ही नहीं है यहां पर दो ट्रक आमने सामने से टकरा गए थे, तब यहां की रैलिंग टूट गई थी। कुछ दिन तक रैलिंग का एक हिस्सा टूट गया था वह कई दिनों से खतरनाक तरीके से लटका हुआ था बाद में वह गिर गया उसके बाद से वहां पर रैंलिंग नहीं लगाई गई। एक बार तो गैस टैंकर गिर चुका है।

भारी बोझ

विदिशा। जिले के दर्जनों बूढ़े पुलों पर भारी वाहनों का बोझ पड़ रहा है। इस स्थिति में ये कभी भी किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं। जिला मुख्यालय पर ही बेतवा पर सौ-सौ सालों से पुराने दो पुल हैं, जिन पर 20 टन से अधिक के वाहन निकलना प्रतिबंधित है, लेकिन ये प्रतिबंध केवल बोर्ड पर ही नजर आता है। पिछले तीन वर्षों में बेतवा का रंगई पुल करीब आधा दर्जन बार क्षतिग्रस्त भी हो चुका है। हालांकि दोनों पुलों के लिए करीब 50 करोड़ स्र्पए स्वीकृत हो चुके हैं। लेकिन मामला अभी विभागीय प्रक्रिया में अटका हुआ है। लोक निर्माण विभाग के ईई संजय खांडे का इस संबंध में कहना है कि जिले में कोई भी पुल ऐसा नहीं है, जिसे जर्जर घोषित किया गया है।

100 पुल-पुलिया जर्जर

छिंदवाड़ा।जिले में 1855 में से करीब 100 पुल-पुलिया जर्जर हैं। बारिश में इन पुलों से गुजर रही जिंदगी भ्ाी खतरों से होकर गुजर रही है। जिले के ग्रामीण इलाकों के अलावा शहर से लगे गुरैया और खजरी को जोड़ने वाले नालों में बने पुल सालों पुराने हो चुके हैं। यहां पर जरा सी बारिश मे आवागमन बाधित होने लगता है। सौंसर को नागपुर से जोड़ने वाली पुलिया भी परेशानी का कारण बन रही है। बाध्यानाला में बनी छोटी पुलिया जरा सी बारिश मे ही उफान पर आ रही है। जिसके चलते इस सालों पुरानी जर्जर हो चुकी पुलिया के कारण मार्ग बाधित हो जाता है। जिले के ढ़ाई सौ से अधिक पुल- पुलियों में ना तो रैलिंग है और ना ही बहने से बचने के लिए अन्य उपाय।

दो सौ पुल-पुलिया खस्ताहाल

गुना। जिला मुख्यालय से गिरे करीब 110 किमी नेशनल हाइवे क्रमांक तीन सहित गुना-फतेहगढ़-नाहरगढ़ होते हुए राजस्थान को जोड़ने वाले स्टेट हाइवे, गुना-आरोन-बीना स्टेट हाइवे सहित गुना-अशोकनगर-ईसागढ़ स्टेट सहित अन्य ग्रामीण अंचल की सड़कों पर करीब एक हजार से अधिक पुल-पुलियाएं हैं। इनमें से करीब दो सैकड़ा पुल-पुलियों की हालत बेहद जर्जर है। जिले से करीब 110 किमी का नेशनल हाइवे गुजरा है। हाइवे पर ही करीब एक सैकड़ा पुल-पुलियाएं हैं। हाइवे पर गुजरने वाले वाहनों की संख्या करीब दस हजार है। बासौदा-सिरोंज मार्ग पर बेतवा नदी का पुल जर्जर। विदिशा-अशोकनगर, सिरोंज, कुरवाई मार्ग पर बना यह पुल काफी महत्व का है।

लगता है जाम

रायसेन। जिले के दो दर्जन से अधिक पुल-पुलिया जर्जर हालत में हैं। बरेली मार्ग पर पुल ओवरफ्लों होने से कई घंटे मार्ग बंद रहता है। विदिशा मार्ग पर पगनेश्वर का बेतवा पुल भी आजादी के पूर्व का बना हुआ है। यहां लगातार दो दिन की बारिश में ही रास्ता बंद हो जाता है। इसके अलावा सिलवानी, गैरतगंज, सुल्तानपुर, उदयपुरा, उमरावगंज, औबेदुल्लागंज और अनेक स्थानों पर दर्जन पुल-पुलिया जर्जर हालत में हैं। सुल्तानगंज के पास पुल से वाहनों के गिरने की आए दिन घटनाएं होती रहती हैं। गैरतगंज में दो साल पहले पुराना पुल ट्राला के भार से दो टुकड़े हो गया था।

बकरी व करबला पुल की हालत खराब

सीहोर। शहर में सीवन नदी पर बने करबला और बकरी की हालत खराब है। इन दोनों ही पुल पर बारिश का पानी आ जाता है। दोनों पुलों पर रेलिंग नहीं लगी है। इससे हमेशा खतरा बना रहता है। यहां पर कभी भी हादसा हो सकता है। सालों से यहां पर रेलिंग नहीं लग पाई है। पुलों पर जब पानी आता है तो सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां पर बचाव के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जब भी नदी में उफान आता है तो इन दोनों पुलों पर पानी जाता है। इसके बाद भी यहां से वाहन आते-जाते रहते हैं।

नगर के सीवननदी पर बने बकरी पुल पर पिछले साल जब तेज बारिश में पानी ऊपर से बहने लगा था तो दो बाइक सवार युवक इस दौरान पुल पार करने लगे थे। इसी बीच तेज बहाव के कारण वह नदी में बह गए थे। दूसरे दिन पुलिस और गोताखोरों ने इन्हें काफी तलाश किया था। इसके बाद इन दोनों के शव मिले थे।

उस समय भी नदी के दोनों तरफ वाहन चालकों को आने-जाने से रोकने वाला कोई नहीं था। जब तक इस तरह के इंतजाम नहीं किए जाएंगे तब तक समस्या बनी रहेगी। पिछले दिनों सीवन नदी पर बना पुल जर्जर हो गया था। यह पुल भोपाल-इंदौर राजमार्ग को जोड़ता है, लेकिन स्थिति जर्जर होने से इस पुल को तोड़कर नया पुल तैयार किया जा रहा है, लेकिन धीमी गति से निर्माण कार्य के चलते समय रहते इसका निर्माण नहीं हो सका है।

Thursday, 24 July 2014

Baby institution restored

बालक कल्याण समिति द्वारा सेवा भारती मातृ छाया संस्था को बच्ची सौंपने का निर्णय लिया गया है। अधिकृत पत्र मिलने के बाद सेवा भारती मातृ छाया संस्था के सदस्य जिला अस्पताल में बच्ची को लेने आए थे लेकिन फोटोग्राफर नहीं होने के विवाद ने बड़ा रूप ले लिया। मातृ छाया संस्था के सदस्यों और जिला अस्पताल के डॉक्टर, कर्मचारियों के बीच बहस की वजह से माहौल गरमा गया था। अंत में बिना बच्ची को लिए मातृ छाया संस्था को लौटना पड़ा।

शुक्रवार को शाम 5 बजे दुर्ग में संचालित सेवा भारती मातृछाया के सचिव दिनेश ताम्रकार और सदस्य अभय सलोडकर अपने साथ आया लेकर जिला अस्पताल में सवा महीना से भर्ती बच्ची को लेने आए थे। मातृछाया संस्था के सदस्यों के पास न्यायालय बालक कल्याण समिति द्वारा भेजे गए पत्र की प्रति भी थी। पत्र में जिक्र था कि 12 जून को स्टेशनपारा धमतरी में शाम 7 बजे लावारिस हालत में छोड़ी गई बच्ची नागरिकों के माध्यम से पुलिस को प्राप्त हुई।

पुलिस अज्ञात आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। वर्तमान में बच्ची जिला अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रही है तथा स्वस्थ है। इस बच्ची को संस्था अपने संरक्षण में ले। इस पत्र के आधार पर सेवा भारती मातृछाया संस्था के सदस्य यहां पहुंचे थे। फोटोग्राफर की व्यवस्था करने की बात को लेकर जिला अस्पताल प्रबंधन और संस्था के बीच ठन गई। बच्ची को संरक्षण में लेने से पहले सबूत के रूप में फोटोग्राफी कराना जरूरी था। मातृछाया संस्था के सदस्य अपने साथ फोटोग्राफर लेकर नहीं आए थे। वे चाहते थे कि अस्पताल प्रबंधन फोटोग्राफर की व्यवस्था करें।

जबकि अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि संस्था फोटोग्राफर की व्यवस्था करें। फोटोग्राफी नहीं हो पाने की वजह से मातृछाया संस्था के लोग बच्ची नहीं ले जा सके और बैरंग लौट गए। मातृछाया संस्था के सचिव और सदस्य जिला अस्पताल के मुख्य द्वार के पास मोबाइल पर अपने अन्य पदाधिकारियों को वस्तुस्थिति की जानकारी दे रहे थे।

इसी दरम्यान जिला अस्पताल के आवासीय चिकित्सा अधिकारी डॉ.जेएस खालसा, ब्लड बैंक के डीसी सिन्हा और अस्पताल के अन्य कर्मियों की उनसे बहस हो गई। अस्पतालकर्मियों का कहना है किय मातृछाया संस्था के सदस्यों ने अपशब्दों का इस्तेमाल कियाष जबकि मातृछाया संस्था के सदस्यों का कहना था कि उन्होंने नहीं बल्कि अस्पताल प्रबंधन ने फोटोग्राफर लाने की बात को लेकर अपशब्द कहे हैं। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में बहस हुई।

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. एसपी सक्सेना ने कहा कि मुझे जिला अस्पताल में संस्था और अस्पताल स्टाफ के बीच विवाद होने की जानकारी नहीं है। अस्पताल में रखी गई नन्हीं बच्ची को संस्था को सौंपने की प्रक्रिया चल रही है। संस्था वाले आए थे। 1-2 दिन में बच्ची सौंप दी जाएगी।

Monday, 21 July 2014

Bijapur three prize maoists to surrender bsf camp

तीन इनामी नक्सलियों ने शनिवार को सीमा सुरक्षा बल के उपरपारा स्थित कैम्प में बीएसएफ व पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें एक नक्सली दंपति भी है। तीनों 2005 से नक्सली अभियान से जुड़े थे। राज्य शासन ने इन पर एक से लेकर दो लाख रुपए तक के इनाम घोषित किए थे। 29 अगस्त 2010 को भुसकी में एम्बुस लगाकर किए गए नक्सली हमले में तीनों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। इस हमले में सीमा सुरक्षा बल के तीन व छत्तीसगढ़ पुलिस के दो जवान शहीद हुए थे। अन्य कई नक्सली गतिविधियों में भी तीनों संलिप्त रहे।

आत्मसर्पण करने वाले नक्सलियों में मिलेट्री कम्पनी प्लाटून के सक्रिय सदस्य सोमेश (30 वर्ष) पिता निलेश नुरेटी निवासी धनेली थाना कोरर, बत्ती बाई (23 वर्ष) पति दिलीप निवासी सराडुघामरे थाना दुर्गूकोंदल और दिलीप (25 वर्ष) पिता माहरु पोटाई निवासी पिपली थाना बड़गांव शामिल हैं। सोमेश प्लाटून नम्बर-2 का कमांडर, बत्ती बाई सेक्शन नम्बर-2 की सदस्य और दिलीप प्लाटून नंबर-2 का सेक्शन कमांडर था। तीनों कांकेर, नारायणपुर तथा महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के सक्रिय मिलेट्री कम्पनी नम्बर-5 से संबंधित थे।

सीमा सुरक्षा बल के महानिरीक्षक एचएस चाहर तथा बस्तर संभाग के पुलिस महानिरीक्षक एसआरपी कल्लुरी के समक्ष बीएसएफ चौकी अंतागढ़ में तीनों ने आत्मसमर्पण किया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक आरएन दास, एसडीओपी दौलतराम पोर्ते, यूके नायल, वाईडी वशिष्ठ, एसके गुप्ता, निमन बक्सला, राजीव बिस्ट, थाना प्रभारी अंतागढ़ जीएस ठाकुर, एसआई राठौर व सीमा सुरक्षा बल के जवान उपस्थित थे।

सिविक एक्शन कार्यक्रम से प्रेरित

सोमेश नक्सलियों के रेडिकल स्टूडेंट संगठन का सक्रिय सदस्य रहा। वह आईईडी बनाने व लगाने में माहिर है। आत्मसमर्पण के दौरान उसने कहा कि सीमा सुरक्षा बल के सिविक एक्शन कार्यक्रम से प्रेरित होकर उसने आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया।

Saturday, 19 July 2014

Indore 58 million in the bank robbery gang member has

पुलिस गिरफ्त में आए अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के सदस्यों ने इस महीने के पहले ही दिन इंदौर से भी दो कार चोरी की हैं। वहीं गिरोह का एक सदस्य संजय बिहारी छह साल पूर्व इंदौर की एक बैेंक में हुई 58 लाख रुपए की डकैती की वारदात में भी शामिल रहा है। मप्र, उत्तरप्रदेश समेत सात राज्य में फैला चारपहिया वाहन चोर गिरोह 10 साल से सक्रिय है और देशभर से 500 से ज्यादा गाड़ियां चुरा चुका है।

ये राज पुलिस रिमांड पर पूछताछ के दौरान गिरोह के सदस्य राजकुमार उर्फ राजू पिता ओमप्रकाश गौतम निवासी साकेत कॉलोनी हाथरस (उप्र) ने उगले हैं। इधर गिरोह के सदस्य के डकैती में शामिल होने की सूचना पर इंदौर क्राइम ब्रांच भी सक्रिय हो गई है।

शुक्रवार को राजकुमार से कड़ी पूछताछ की गई। इंदौर में हुई अन्य चोरियों के मामले भी सामने आ रहे हैं। उज्जैन की नीलगंगा पुलिस और सायबर सेल के हत्थे देशभर में नई गाड़ियां चुराने वाले अंतराज्‍यीय चोर गिरोह चढ़ा है। उससे अब तक चार वाहन जब्त किए जा चुके हैं। राजकुमार के अलावा योगेंद्र उर्फ जॉनी सेंगर निवासी इटावा (उप्र) भी पुलिस गिरफ्त में है। राजकुमार 22 जुलाई तक रिमांड पर है। गिरोह के खुलासे के साथ ही चोरी के और भी मामले सामने आ रहे हैं। 1 जुलाई-14 को इंदौर से चोरी हुई टवेरा व बोलेरो का भी पता चला।

मो. रजा हाशमी निवासी जनकपुरी कॉलोनी चंद्रगुप्त चौराहा इंदौर की टवेरा इसी गिरोह द्वारा चुराने का खुलासा हुआ है। इधर, इंदौर क्राइम ब्रांच, हीरानगर थाना इंदौर, रतलाम, धार पुलिस भी पूछताछ के लिए आई। दरअसल, उक्त गिरोह इन स्थानों पर भी वाहन चोरी कर चुका है। पूछताछ में राजकुमार से कई खुलासे की संभावना है।

2008 में की थी डकैती

जानकारी के अनुसार दिसंबर-2008 में इंदौर में कनाड़िया स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 58 लाख स्र्पए की डकैती हुई थी। इस समय इंदौर पुलिस और वहां की क्राइम ब्रांच ने मोबिन, आमीन, जसपाल निवासी इंदौर व अन्य को दबोचा था। इनमें कुछ आरोपी महाराष्ट्र बम ब्लास्ट में भी शामिल होना बताए जा रहे हैं। संजय बिहारी ने डकैती के दौरान गाड़ियां सप्लाई की थी और वह खुद भी वारदात में शामिल था। तभी से वह फरार है। डकैती के खुलासे में पता चला था कि 58 लाख में से आधी रकम संजय बिहारी के हिस्से आई थी।

सरगना की तलाश

टीआई एमएस परमार ने बताया गिरोह के सरगना कुंवर पिता श्रीचंद्र जाट निवासी कोसीकलां जिला मथुरा उप्र समेत चेतन मीणा निवासी कोटा राजस्थान, आरिफ मेवाती निवासी जिला नूह, संजय बिहारी निवासी पूर्णिया बिहार समेत अन्य की तलाश में टीम रवाना की जा रही है। कुंवर चौधरी के विस्र्द्ध राजस्थान, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, बिहार, यूपी, मप्र, दिल्ली आदि स्थानों पर वाहन चोरी के दर्जनों केस दर्ज है।

थाने पहुंचे गई लोग

गिरोह के सदस्यों के गिरफ्त में आने के बाद शुक्रवार को कई लोग नीलगंगा थाने पहुंचे और जानकारी ली। इनमें वे शामिल थे जिनके चार पहिया वाहन बीते कुछ महीनों में चोरी हुए। इंदौर से कुछ किन्न्र भी आए। जिनकी जुलाई में बोलेरो चोरी हो चुकी है।

Friday, 18 July 2014

Bhopal bediram on police remand till july 25 was assigned to stf

रेलवे, एलआईसी और एमपी पीएससी परीक्षाओं के पेपर लीक कांड के आरोपी बेदीराम को अदालत ने 25 जुलाई तक के पुलिस रिमांड पर एसटीएफ को सौंप दिया है। उससे मप्र की आयुर्वे मेडिकल ऑफिसर भर्ती परीक्षा सहित कुछ अन्य परीक्षाओं को लेकर पूछताछ की जाना है।

बेदीराम को एसटीएफ ने शुक्रवार को सीजेएम पंकज सिंह माहेश्वरी की अदालत में पेश किया था। एसटीएफ ने उससे और पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग की थी। गौरतलब है कि बेदीराम देश की तमाम महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक करने वाले लोगों से जुड़ा है।

उसके अहमदाबाद से लेकर हैदराबाद तक संपर्क हैं। वह पेपर लीक करने के लिए 20 से लेकर 25 लाख रुपए तक वसूलता था। उसकी दो बेटी और एक बेटा है। बेटियां कानपुर व दिल्ली में मेडिकल की पढ़ाई कर रही हैं और बेटा गाजियाबाद में इंजीनियरिंग कर रहा है।

Chhattisgarh coal shortage power crisis will not

देश में कोयले की कमी के चलते बिजली उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। पावर कंपनी के सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में कोयला है और इससे बिजली उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। कंपनी ने कोयले के स्टाक की पूर्ति के लिए एसईसीएल भी बात की है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक कोरबा पूर्व-पश्चिम के संयंत्रों से बिजली उत्पादन का कार्य जारी है और इन संयंत्रों से 2424 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है। वहीं 210 मेगावाट की एक यूनिट मरम्मत के लिए बंद की गई है। कोयले का पर्याप्त स्टॉक भी है। बताया जा रहा हैकि एसईसीएल से प्रति वर्ष 124 मिलियन टन कोयले का उत्पादन होता है ऐसे में एनटीपीसी कोरबा और सीपत में बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं हो सकता है

उल्लेखनीय है कि बीते छत्तीसगढ़ में भी कोयले का संकट खड़ा हो गया था, लेकिन राज्य सरकार ने एसईसीएल के सीएमडी से चर्चा कर कोयले की उपलब्धता और स्टॉक बढ़ाने को कहा था। इसके बाद छत्तीसगढ़ विद्युत उत्पादन कंपनी को पर्याप्त मात्रा में कोयले का स्टॉक दिया गया है। मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह और उर्जा विभाग के प्रमुख सचिव अमन सिंह ने कोयले की कमी से इंकार किया है।

छत्तीसगढ़ में कोयले की कमी नहीं है और बिजली उत्पादन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ रहा है। कोयले का पर्याप्त स्टॉक होने से बिजली उत्पादन जारी है। प्रदेश में बिजली संकट जैेसी स्थिति नहीं है।

-डॉ.रमन सिंह, मुख्यमंत्री , छत्तीसगढ़ शासन

छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन के लिए कोयले का संकट नहीं है। यहां पर पर्याप्त मात्रा में कोयले की उपलब्धता है। एसईसीएल को कोयले का स्टॉक बढ़ाने को कहा गया है।

Naxal protest on ration card

सत्यापन के नाम पर लोगों के राशनकार्ड निरस्त किए जाने का नक्सलियों ने विरोध किया है। माओवादियों का आरोप है कि भाजपा ने गोदामों में सड़ रहे अनाज का चुनावी फायदा उठाने के लिए ताबड़तोड़ राशनकार्ड बना दिए और अब सत्यापन के नाम पर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं। इस मामले में कांग्रेस की भूमिका पर भी नक्सलियों ने सवाल उठाया है कि जब गलत तरीके से कार्ड बन रहे थे तब कांग्रेसी खामोश क्यों बैठे थे?

माओवादियों की ओडिशा राज्य कमेटी के प्रवक्ता शरतचंद्र मांझी के नाम से जारी एक मेल में नक्सलियों ने राशनकार्ड का सत्यापन ग्रामसभा या मोहल्लासभा के जरिए कराने की मांग की है। मीडिया को जारी लिखित बयान में माओवादी प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार ने किसानों का अनाज औने-पौने दामों में खरीदकर गोदाम में भर दिया था, जहां वह सड़ रहा था। सरकारों के पास बोरा खरीदने के लिए भी पैसा नहीं था, इस वजह से अनाज सड़ने लगा था। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई थी।

इसका नतीजा यह कि छत्तीसगढ़ सरकार ने कल्याणकारी योजना के नाम पर राशनकार्ड के जरिए सस्ता अनाज बांटना शरू किया। इसके लिए नए नियम बनाए गए और सारे कार्ड निरस्त कर महिलाओं के नाम पर कार्ड बनाए गए। इस बीच 4 फरवरी को कांग्रेस ने सवाल उठाया तो सरकार ने बताया कि अब तक 70 लाख कार्ड बने हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह तो राज्य की जनसंख्या के अनुपात से अधिक है, इसमें धांधली हुई है, इसकी जांच होनी चाहिए।

माओवादी प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा लगा जैसे सरकार कांग्रेस की इसी मांग का इंतजार कर रही थी, मांग उठते ही सरकार ने तत्काल जांच के निर्देश दिए और अब धड़ाधड़ कार्ड निरस्त किए जा रहे हैं। इसके लिए आधार यह बनाया गया है कि एक ही छत के नीचे रहने वालों का एक से अधिक कार्ड नहीं बन सकता। माओवादियों ने मांग की है कि राशनकार्ड निरस्त किए जाने की प्रक्रिया तत्काल बंद की जाए। ग्रामसभा और मोहल्लासभा के जरिए सत्यापन कराया जाए और इसके पूरा होने तक पुराने राशनकार्डों पर लोगों को निर्बाध राशन दिया जाए।

नक्सलियों की मांग

0. राशनकार्ड का सत्यापन ग्रामसभा व मोहल्ला सभा के जरिए किया जाए।

0. पुराने राशनकार्ड पर राशन दिया जाए, जब तक कि प्रक्रिया पूरी न हो जाए।

0. धांधली व भ्रष्टाचार फैलाने वाले अधिकारियों को कड़ी सजा दी जाए।

But then came down sharply from rabid dogs, seven cut

गोकुल नगर में गुरुवार को फिर एक पागल कुत्ते ने तीन मासूमों बच्चों पर हमला किया। मासूमों के अलावा चार अन्य लोगों को भी उसी पागल कुत्ते ने काटा है। इस घटना में एक बच्चा बुरी तरह जख्मी हो गया। उसे उपचार के लिए अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना से आक्रोशित मोहल्ले के कुछ युवकों ने कुत्ते को मार डाला।

दो साल के श्रेयांश मसीह को पागल कुत्ते ने उस समय काटा, जब वह अपने पापा को ऑफिस जाते समय टाटा करने के लिए गेट पर खड़ा था। उसके साथ उसकी मम्मी थी। श्रेयांश अपने पापा को टाटा कर ही रहा था कि अचानक पागल कुत्ता आया और उसके चेहरे पर झपट पड़ा, जिससे उसके चेहरे पर गंभीर जख्म भर आए हैं। कुत्ते के अचानक हमले से सहमी मां ने किसी तरह कुत्ते को भगाया। इसके बाद बच्चे को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दूसरा मासूम भी गोकुल नगर का ही है। दो साल का हर्ष सिन्हा घर के सामने खेल रहा था। अचानक उसी पागल कुत्ते ने उसके गले पर हमला किया। इसे देखकर पास ही खड़े दौवा सिंह ने कुत्ते पर कुर्सी फेंकी, तब जाकर कुत्ता वहां से भागा, लेकिन रास्ते में जाते जाते अपने पड़ोस के बच्चे को छोड़ने जा रहे देवसिंह साहू उम्र-64 वर्ष को भी कुत्ते ने काट दिया। इससे आहत बुजुर्ग जमीन पर गिर गया।

एक दिन में सात लोगों को काटा

मठपुरैना क्षेत्र के गोकुल नगर में एक ही पागल कुत्ते ने तीन मासूमों सहित सात लोगों पर हमला किया। कुत्ते के हमले से एक और मासूम गंभीर रूप से घायल है।

शहर व आसपास इसके पहले भी कई मासूमों को आवारा कुत्तों ने काटा है। पंडरी में मासूम राजनंदिनी को आवारा कुत्तों ने जिंदा नोच खाया। अभी तक यहां 15 से अधिक लोग कुत्तों का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद भी निगम प्रशासन ने कुत्तों का बधियाकरण प्रोजेक्ट को शुरू नहीं किया है। शहर के पशु चिकित्सक डॉ.संजय जैन ने कुत्तों की नसबंदी के लिए कुछ स्टॉफ की मांग की है, लेकिन बधियाकरण को लेकर निगम प्रशासन कोई गंभीरता नहीं दिखा रही है।

पड़ोसी के बच्चे को छोड़ने जा रहा था, तभी पागल कुत्ते ने मेरे हाथ को पकड़ लिया। मैने झटकने की कोशिश की। लेकिन मैं खुद ही गिर पड़ा। कुत्ते ने मेरे हाथ में काटा है।

-देवनाथ साहू,पीड़ित,गोकुल नगर

गोकुल नगर में निगम ने एक ऐसे कुत्ते को नहीं पकड़ा है, जो भारी खतरनाक है। यहां एक बैल को पागल कुत्ते खा गए।

-सौरभ मसीह, स्थानीय निवासी

रात में आने जाने में दिक्कत होती है। कुत्ते का डर लगा रहता है। इस इलाके में मकान निर्माण चल रहा है, इसलिए मजदूरों का आना जाना लगा रहता है।

-टोनी स्वामी, स्थानीय निवासी

यहां के कुत्ते भारी खूंखार हैं। इंसान के साथ जानवरों को भी काट रहे हैं। पहले यहां कुत्ते नहीं थे, लेकिन निगम द्वारा छोड़े जाने के बाद यहां कुत्तों का आतंक बढ़ गया है।

-शहनाज बेगम, स्थानीय निवासी

इन बच्चों को कुत्ते ने काटा

अंश अग्रवाल (5 साल) बजरंग नगर आमापारा

तोरण साहू (5 साल) आमापारा

आयुष नायक (7 साल) आदर्श नगर मोवा

नंदिनी यदु, (5 साल) चंगोराभांठा

इनकी मौत कुत्ते के काटने से

जगन्नााथनगर के ओम सोनी उम्र-13 वर्ष की कुत्ते के काटने से मौत हो गई। इस बच्चे को भी डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में ही कुत्ते ने काटा था, जब वह अपनी मौसी के घर शादी में गया हुआ था।

पंडरी में 9 माह की मासूम को रात के अंधेरे में कुत्तों ने नोंच खाया था। इस घटना के बाद नगर निगम ने कुत्तों को पकड़ने का अधियान शुरू किया, लेकिन पकड़े गए कुत्ते अब वापस आने लगे हैं।

बधियाकरण के लिए जल्द ही प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। पशु चिकित्सक का प्रस्ताव भी हमारे पास है और ठेके पर नसबंदी कराने का। पशु चिकित्सक डॉ.संजय शर्मा को स्टॉफ देने की व्यवस्था हो गई है। इसे शुरू किया जाएगा।

-अवनीश कुमार शरण,आयुक्त,नगर निगम

And will treat serious diseases

रायगढ़ रेलवे स्टेशन में 26 अगस्त को एक ऐसी ट्रेन पहुंच रही है, जिसमें प्लॉस्टिक सर्जरी, मोतियाबिंद व पोलियो समेत कई गंभीर बीमारियों का मुफ्त में इलाज की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इंडिया फाउंडेशन द्वारा संचालित भारतीय रेल व स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से चलने वाली जीवन रेखा एक्सप्रेस विश्व का पहला मोबाइल अस्पताल है जो 16 जुलाई 1991 में पटरी पर आई थी। तब से यह ट्रेन पूरे देश में दौड़ रही है।

जीवन रेखा एक्सप्रेस में भारत के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराई जाती है। उस क्षेत्र की आम जनता में स्वास्थ्य जागरूकता लाने तथा विकलांग बच्चों एवं वयस्कों के विभिन्न रोगों का मौके पर ही परीक्षण एवं शल्य चिकित्सा द्वारा उपचार करने का कार्य किया जाता है। इसी उद्देश्य से यह ट्रेन बिलासपुर रेल मंडल के रायगढ़ स्टेशन में पहुंच रही है।

यह ट्रेन वहां प्लेटफार्म क्रंमाक 1 हावड़ा छोर में खड़ी होगी। 5 कोच वाली इस ट्रेन में 2 से 24 अगस्त तक इसमें मौजूद विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा विभिन्न रोगों का परीक्षण व ऑपरेशन करेंगे। मोतियाबिंद से पीड़ितों, कटे-फटे होंठ एवं पोलियो से ग्रस्त बच्चों तथा आग से जले हुए लोगों की प्लास्टिक सर्जरी निःशुल्क की जाएगी। इसमें कान व दांत से संबंधित रोगों का उपचार भी किया जाएगा।

इन तारीखों में होंगे इलाज

रायगढ़ जिला संपर्क कार्यालय द्वारा रेलवे को भेजी गई जानकारी के मुताबिक मोतियाबिंद से पीड़ित लोगों का परीक्षण 01 से 19 अगस्त तक व ऑपरेशन 2 से 20 अगस्त तक होगा। कटे-फटे होंठ वाले बच्चों का परीक्षण 13 व 14 अगस्त तथा ऑपरेशन 14 से 16 अगस्त तक किया जाएगा। 14 से कम उम्र के पोलियो ग्रसित बच्चों का परीक्षण 17 व 18 अगस्त और ऑपरेशन 18 से 20 अगस्त तक किया जाएगा। कान से जुड़े रोगों का 21 व 22 अगस्त को परीक्षण और ऑपरेशन 22 से 24 अगस्त तक किया जाएगा। दंत रोग एवं मिर्गी के मरीजों का परीक्षण व उपचार 10 से 17 अगस्त तथा 22 से 24 तक किया जाएगा।