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Monday, 4 August 2014

One and half lack students will get smart phone in madhya pradesh

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले प्रथम सेमेस्टर के सभी छात्रों को सरकार मुफ्त स्मार्ट-फोन देने जा रही है। राज्य शासन ने मौजूदा सत्र से ही इस स्कीम को लागू करने का निर्णय लिया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2014-15 में प्रदेशभर में नव-प्रवेशित लगभग 1 लाख 55 हजार विद्यार्थियों को यह स्मार्ट-फोन मिलेंगे। कॉलेज छात्र-छात्राओं को आईटी से सीधे जोड़ने और ई-लर्निंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में प्रदेश के विद्यार्थियों को अन्य विकसित देशों के शैक्षणिक स्तर के समकक्ष खड़ा किया जा सके।

प्रदेश के मूल निवासियों को ही लाभ

मध्यप्रदेश के मूल निवासी सभी विद्यार्थी, जो स्नातक प्रथम वर्ष में नियमित प्रवेश लेंगे, केवल उन्हें ही इस योजना का लाभ मिलेगा। स्वाध्यायी और दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवेशार्थी छात्र इसके लिए पात्र नहीं होंगे। स्मार्ट फोन पाने के लिए आय-सीमा और जाति का कोई बंधन नहीं रखा गया है, लेकिन बीच में असमय पढ़ाई छोड़ने या अध्ययन निरंतर नहीं रखने वाले विद्यार्थियों से स्मार्ट-फोन वापस भी ले लिए जाएंगे। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है, ताकि प्रदेश में गिरते सकल मूल्यांकन अनुपात में सुधार लाया जा सकेगा।

दो साल में 33 फीसदी बढ़े यूजर

बीते दो वर्षों में भारत में स्मार्ट-फोन यूजर्स की संख्या में लगभग 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही स्मार्ट-फोन की इस्तेमाल अवधि में भी 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में औसतन एक स्मार्ट-फोन यूजर प्रतिदिन 3 घंटे का समय अपने सेल-फोन पर व्यतीत करता है। 25 फीसदी यूजर्स दिनभर में कम से कम 100 बार से अधिक अपने स्मार्ट-फोन को चेक करते हैं।

कुल मिलाकर एक स्मार्ट-फोन के विभिन्ना एप्लीकेशंस पर भारतीय यूजर्स अपना एक तिहाई समय व्यतीत कर रहे हैं। वाट्सएप एवं वीचैट जैसे मोबाइल एप्लीकेशन ने सोशल कम्युनिकेशन में काफी कम समय में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसी कारण पॉकेट टेक्नोलॉजी के रूप में स्मार्ट-फोन युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

Recommendation of the minister sudhir jain become cmd of syndicate bank

भ्रष्टाचार के आरोप में एंटी करप्शन विंग के शिकंजे में फंसे सिंडिकेट बैंक के सीएमडी सुधीर कुमार जैन की नियुक्ति और कोल स्कैम में फंसी दो कंपनियों को पहुंचाई जाने वाली वित्तीय सहायता फिक्स थी। सीबीआई ने इस मामले में पिछले 6 माह के दौरान जो कॉल डिटेल जुटाई है, उसमें कई जगह जैन और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अफसरों के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा भी मौजूद है।

सिंडिकेट बैंक के सीएमडी पद पर जैन की नियुक्ति जुलाई 2013 में की गई थी। उनकी नियुक्ति के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार के एक मंत्री की ओर से अनुशंसा किए जाने की बात भी सामने आई है।

जैन को अगले पांच साल तक सीएमडी का पद संभालना था और इस दौरान कोल घोटाले में फंसी कंपनियों को आर्थिक घाटे से उबारने के लिए क्रेडिट लिमिट बढ़ाने का जिम्मा जैन के पास था। सूत्रों के अनुसार नियमों को ताक पर रखकर जैन ने इन कंपनियों की क्रेडिट लिमिट को 100 करोड़ रुपए तक बढ़ा भी दिया था, जिसकी एवज में उन्‍हें 50 लाख रुपए मिलने वाले थे।

रिश्वत की रकम ठिकाने लगाने के दौरान जैन और उनके दो साले विनीत गोधा एवं पुनीत गोधा को विजय पाहूजा नामक शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया। सीबीआई प्रवक्ता धारणी मिश्रा के मुताबिक कॉल डिटेल में ऐसी कई जानकारियां सामने आने के बाद ही जैन और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी हुई है। फोन डिटेल्स से वित्त मंत्रालय के कई अफसरों के जैन के संपर्क में रहने की पुष्टि हुई है।

दिल्ली-बेंगलुरु के व्यापारियों की तलाश

कोल घोटाले में फंसी बेंगलुरु की भूषण स्टील और दिल्ली की प्रकाश इंडस्ट्रीज वो दो कंपनियां हैं जिन्हें सीएमडी जैन ने फायदा पहुंचाया था। सीबीआई को इन कंपनियों के मालिक नीरज सिंघई, वेद प्रकाश अग्रवाल और विपुल अग्रवाल की तलाश है। जैन की नियुक्ति में रिमांड पर चल रहे गोधा ब्रदर्स की भूमिका की भी तलाश की जा रही है।

दिखा कार्रवाई का असर

जैन की गिरफ्तारी के ठीक दूसरे दिन रविवार होने के बावजूद कई नामी प्रायवेट वित्तीय संस्थानों के सीएमडी एमपी-छत्तीसगढ़ सर्किल हेड और ब्रांच मैनेजरों की बैठक लेने भोपाल पहुंचे। इस दौरान हाई प्रोफाईल बैंक कस्टमर के खातों के बैलेंस, लोन और उन्‍हें दी जा रही क्रेडिट लिमिट पर विस्तार से चर्चा की गई।

Failed twice becoming the third time rural transport policy

प्रदेश के गांव-गांव तक परिवहन सेवा उपलब्ध करवाने के लिए सरकार तीसरी बार नीति में बदलाव करने जा रही है। वर्ष 2010 में बनी ग्रामीण परिवहन नीति सही मायने में कागजों से बाहर ही नहीं आ पाई। इस नीति को मैदान में उतारने के लिए दो बार योजना बनाकर बस ऑपरेटरों को आमंत्रित भी किया गया, लेकिन किसी ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब तीसरी बार योजना को नए स्वरूप में मैदान में उतारने की कवायद की जा रही है इसे जल्द कैबिनेट में मंजूरी के लिए लाया जाएगा। सितंबर से पहले गांव-गांव तक छोटे वाहन दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

नई योजना के अनुसार अब गांव के युवकों को ही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में लोन देकर छोटे सवारी वाहन दिलाए जाएंगे। इन वाहनों को गांव से शहर तक चलाने के लिए टैक्स फ्री रखा जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन वाहनों में 7 से अधिक यात्री बैठाने पर प्रतिबंध होगा।

उल्लेखनीय है कि इसके पहले भी बस आपरेटरों को प्रोत्साहित करने के लिए ऑनलाइन परमिट देने के साथ-साथ चिन्हित ग्रामीण रूटों पर प्रति सीट 120 के कर को घटाकर मात्र 20 रुपए किया गया था, इसके बावजूद किसी भी बस आपरेटर ने रुचि नहीं दिखाई।

अंटोनी जेसी डिसा तत्कालीन अपर मुख्य सचिव परिवहन ने 2012 में ग्रामीण परिवहन नीति के असफल होने के कारण जानने के लिए जिला स्तर के परिवहन अधिकारियों की बैठक भी बुलाई थी। इसमें उन्होंने अन्य राज्यों की नीति का अध्ययन करने के साथ प्रदेश के बस आपरेटरों से चर्चा करने को कहा था, लेकिन नतीजे सिफर ही रहे।

1600 ग्रामीण सड़कों पर दौड़ेंगे वाहन

मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क परिहवन योजना में शुरुआती दौर में 1600 ग्रामीण सड़कों पर छोटे सवारी वाहन दौड़ाए जाएंगे। प्रस्तावित योजना के अनुसार 15 किमी तक ग्रामीण सड़कों में साधारण सड़क शामिल हो तो वे भी ग्रामीण रूट की श्रेणी में आएंगे।

रोजगार भी मिलेगा

'ग्रामीण परिवहन योजना में कई खामियां थीं, यही वजह है कि वह चार साल में मैदान में नहीं उतर पाई। नई योजना से जल्द ही गांव-गांव में परिवहन सुविधा के साथ-साथ वहां के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।" -भूपेंद्र सिंह, परिवहन मंत्री

Hard to get swine flu drugs from next month

दरअसल, केन्द्र सरकार ने दवा देने से हाथ खींच लिए हैं। वहीं पिछले सालों में आई दवाएं इसी महीने एक्सपायर हो रही हैं। यही नहीं बड़ी दिक्कत ये भी है कि बाजार में स्वाइन फ्लू की दवाएं नहीं मिल रही हैं।

इधर विशेषज्ञों का कहना है अगस्त-सितंबर में स्वाइन फ्लू के मरीज बढ़ सकते हैं, क्योंकि इस समय का मौसम (तापमान और आद्रता) किसी भी वायरस की बढ़त के लिए सबसे अच्छा होता है। गौरतलब है कि दो दिन पहले इंदौर के अरविंदो अस्पताल में स्वाइन फ्लू से एक की मौत हो चुकी है। दो महीने पहले भी इंदौर के बांबे अस्पताल में स्वाइन फ्लू से एकव्यक्ति की जान चली गई थी।

दवा खरीदी के लिए पत्र

प्रदेश में 75 एमजी की दवाएं महीने भर पहले ही एक्सपायर हो चुकी हैं। उसकी जगह 30 और 45 एमजी की दवाएं मिलाकर दी जा रही हैं। केन्द्र से मनाही होने के बाद हाल में स्वास्थ्य संचालक (आईडीएसपी) राजीव दुबे ने सभी जिलों को पत्र लिखकर स्वाइन फ्लू की दवा बाजार से खरीदने के निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि स्वाइन फ्लू के लिए सभी जिले जरूरत के अनुसार दवाओं की खरीदी करें। इसमें बड़ी दिक्कत यह है कि बाजार में टेमी फ्लू नहीं मिल रही हैं। ऐसे में सीएमएचओ और सिविल सर्जन इसे कैसे खरीदेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है 35 डिग्री से ज्यादा तापमान होने पर स्वाइन फ्लू फैलने के आसार कम रहते हैं, पर इन दिनों मौसम में कभी ठंडक तो कभी गर्मी रहती है। यह मौसम एंफ्लुएंजा के लिए बेहद अनुकूल होता है। हमीदिया अस्पताल के टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेन्द्र दवे ने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस अब आम हो गया है। यह किसी भी सीजन में फैल सकता है। जिस जिले में मरीज मिला है, वहां व उसके आसपास के जिलों में संदिग्ध मरीजों की पहचान की जानी चाहिए। साथ ही मरीज के परिजनों की भी जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौसम में जब भी बदलाव आता है इस तरह की बीमारियों के फैलने की आशंका ज्यादा रहती है।

दो महीने संक्रमण का खतरा ज्यादा

स्वास्थ्य संचालनालय के अधिकारियों ने बताया अगस्त और सितंबर का महीना स्वाइन फ्लू के वायरस (एच1एन1) के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इन दिनों तामपान करीब 30 डिग्री से. रहता है, जो इस वायरस की बढ़त के लिए सबसे अनुकूल है। बता दें कि भोपाल में अगस्त-सितंबर में 2009 में 4, 2010 में 124 और 2012 में 45 केस मिल चुके हैं। हालांकि, इस साल जिले में स्वाइन फ्लू का एक भी मरीज नहीं मिला है। सीएमएचओ डॉ. पंकज शुक्ला ने बताया कि अभी तक करीब 30 नमूने जांच के लिए भेजे जा चुके हैं, पर सभी निगेटिव आए हैं।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

-सर्दी-जुकाम

-तेज बुखार

- खांसी

-कफ आना

-बदन में दर्द

-सांस में तकलीफ

पॉजीटिव आने के पहले देना होती हैं दवाएं

स्वाइन के फ्लू की मरीज की जांच के पहले ही दवाएं शुरू कर दी जाती हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बी कटेगरी में होने पर भी दवा देना जरूरी है। ऐसे में स्वाइन फ्लू पॉजीटिव नहीं आने पर भी दवा की जरूरत होती है।

भोपाल में वर्षवार स्वाइन फ्लू स्थिति

साल-सैंपल-पॉजीटिव-डेथ

2014-30-0-0

2013-344-35 -9

2012-468-66-12

2011-79-3-1

2010-619-139-39

2009-78-8-0

स्वाइन फ्लू की दवाएं खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। कैमिस्ट एसोसिएशन से भी इस संबंध में चर्चा की गई है।

डॉ. पंकज शुक्ला, सीएमएचओ

Than second line will supply the electricity

प्रदेश में बिजली गुल ही नहीं हो, छत्तीसगढ़ पावर कंपनी इस दिशा में काम रही है। इसके तहत अब डबल लाइन का विस्तार किया जा रहा है। इससे एक लाइन बंद होने पर दूसरी लाइन से बिजली सप्लाई की जा सकती है। ऐसे में बिजली उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली मिलेगी। खास तौर पर नक्सल प्रभावित क्षेत्र जहां पर नक्सलियों द्वारा बिजली सप्लाई को प्रभावित किया जाता है, ऐसी लाइनों को विस्तार किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पावर कंपनी को इस समय प्रदेश में डबल लाइन नहीं होने से एक ही लाइन से बिजली सप्लाई करनी पड़ रही है। एक लाइन होने से बिजली गुल होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को घंटों तक बिजली के आने का इंतजार करना पड़ता है। खास तौर पर ट्रांसफार्मर और लाइनों के विस्तार के साथ ही मेन्टिनन्स की वजह से लाइनों को बंद किए जाने पर उपभोक्ताओं को दिक्कत होती है।

लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। छत्तीसगढ़ पावर कंपनी प्रदेश में डबल लाइन सिस्टम शुरू कर रही है। इसके तहत कोंडागांव में एक सब-स्टेशन का निर्माण किया गया है। इस निर्माण से अब जगदलपुर में बारसूर और कांकेर की दोनों लाइनों से बिजली सप्लाई होगी। इसी तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों को डबल लाइन से जोड़ा जा रहा है। इस नई तकनीक से किसी भी घर में बिजली बंद नहीं होगी।

कैसे करेगा काम

डबल लाइन से बिजली सप्लाई करने के लिए लंबी-लंबी लाइन खींची गई है। ऐसे लाइनों को एक निश्चत सब-स्टेशन से जोड़ा गया है, जिससे एक सब स्टेशन से बिजली गुल होने की स्थिति में दूसरे सब-स्टेशन से बिजली सप्लाई शुरू की जा सके।

फॉरेस्ट क्लियरेंस की दिक्कत

विभागीय सूत्रों के मुताबिक पावर कंपनी को सबसे अधिक दिक्कत फॉरेस्ट क्लियरेंस लेने में हुई है। ज्यादातर लाइन जंगलों से होकर गई है। ऐसे में लाइनों के लिए फारेस्ट क्लियरेंस जरूरी होता है। क्लियरेंस नहीं मिलने की वजह से कंपनी का काम अटका हुआ था। यही वजह है कि डबल लाइन स्वीकृत होने के बाद भी लाइन शुरू नहीं हो पाई थी।

बड़े शहरों में पहले

विभागीय सूत्र बताते हैं कि बड़े शहरों में डबल लाइन की योजना है। इसमें रायपुर, दुर्ग, भिलाई सहित कुछ शहर शामिल हैं। इसके बाद सभी छोटे-बड़े शहरों और ग्रामीण इलाकों को इसमें शामिल किया जाएगा। डबल लाइन होने से ट्रांसफार्मर और लाइनों के मेन्टिनन्स में इसका उपयोग किया जाएगा।

फैक्ट फाइल

0 132 केव्ही बारसूर से जगदलपुर, कांकेर से जगदलपुर

0 220 केव्ही अंबिकापुर डबल लाइन

0 132 गरियाबंद डबल लाइन

0 रायपुर, दुर्ग, भिलाई में भी डबल लाइन

उपभोक्ता सेवा में और वृद्धि करने के उदेश्य से बड़े शहरों में डबल सप्लाई का काम शुरू किया जा रहा है। कुछ लाइनों को शुरू कर दिया गया है। वहीं कुछ लाइनों को जल्द ही शुरू किया जाएगा। डबल लाइन होने से बिजली गुल की समस्या से निजात मिल सकती है। डबल लाइन होने से नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में अब बिजली गुल होने की आशंका कम है।

सुबोध सिंह, प्रबंध निदेशक, छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी

200 corer of crop insurance in pocket of insurance companies

- 40 फीसद से अधिक बारिश पर क्षतिपूर्ति नहीं देंगी कंपनियां

नईदुनिया एक्सक्लूसिव, रायपुर (ब्यूरो)। फसल आधारित बीमा में किसानों की मेहनत की कमाई की 200 करोड़ रु. से अधिक की राशि निजी बीमा कंपनियों की जेब में जाने वाली है। ऐसा सरकार से कृषि ऋण लेने वाले किसानों पर जबरिया लादी गई फसल बीमा योजना की वजह से होने वाला है। इस बात को लेकर किसान खासे चिंतित हैं कि उन्हें बीमा की शर्तों के हिसाब से क्षतिपूर्ति नहीं मिलने वाली। इसके बावजूद ऋण लेते ही उनके खाते से एक हजार रु. प्रति हेक्टेयर की दर से मौसम आधारित बीमा की प्रीमियम राशि निकाली जा रही है।

राज्य सरकार ने 31 जुलाई की स्थिति में प्रदेश के आठ लाख से अधिक किसानों को 1900 करोड़ रु. से अधिक का ऋण बांटा है। 2 लाख से अधिक किसानों को और ऋण बांटा जाएगा। यह कर्ज खाद, बीज और कीटनाशक खरीदने के लिए दिया गया है। किसानों की शिकायत है कि ऋण के साथ ही फसल बीमा की किस्त एक हजार रु.प्रति हेक्टेयर की दर से उनके खाते से काटी जा रही है।

ऐसा मौसम आधारित फसल बीमा के लिए किया जा रहा है। फसल बीमा की शर्तों के मुताबिक किसी भी क्षेत्र में 40 फीसद से अधिक बारिश होने पर वे कोई क्षतिपूर्ति नहीं देंगे, जबकि प्रदेश के 22 जिलों में 80 फीसद से अधिक बारिश हो चुकी है। अन्य जिलों में 60 फीसद से अधिक यानी साफ है कि उनके खाते से प्रीमियम काटे जाने के बाद तय है कि उन्हें नुकसान होने के बावजूद क्षतिपूर्ति नहीं मिलेगी।

अतिवृष्टि का डर दिखा रहे

प्रदेश के वरिष्ठ कृषक नेताओं ने इस बीमा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वे लगातार किसानों से बीमा नहीं कराने की सलाह दे रहे हैं। इसके बावजूद उनके खातों से प्रीमियम की राशि काटी जा रही है। विरोध करने पर अब अतिवृष्टि का डर दिखाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जैसे-तैसे प्रदेश सूखे से उबरा है। ऐसे में अतिवृष्टि के लिए केवल बीमा कराया जाए, जिसकी क्षतिपूर्ति कंपनी के नियमों के मुताबिक अधिकतम 2000 तक मिलेगी।

प्रयोग के रूप में देख रहे हैं

'यह योजना प्रयोग के तौर पर लाई गई है। किसानों को होने वाले नुकसान की ठीक तरह से भरपाई नहीं हुई तो योजना बदली जाएगी। बीमा करने वाली सभी कंपनियां केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त हैं। कंपनियां रिस्क कवरेज के लिए इंश्योरेंस कर रही हैं। उनके क्राइटेरिया में आएगा तो वे जरूर इसका रिस्क कवरेज देंगी। ऋण के साथ इसे इसलिए अनिवार्य किया गया है, क्योंकि ऋण देने वाली संस्था चाहेगी कि नुकसान होने पर उसका रिस्क न रहे।' -बृजमोहन अग्रवाल, कृषि मंत्री

एफआईआर कराएं किसान

'फसल बीमा अनिवार्य करके सरकार निजी कंपनियों को सीधे फायदा पहुंचा रही है। किसी भी किसान के खाते से बगैर उसकी मर्जी के रकम निकालना रिजर्व बैंक आफ इंडिया के नियमों के खिलाफ है। किसानों को इसका विरोध करना चाहिए। विरोध के बावजूद अगर राशि काटी जाती है तो प्रबंधक के खिलाफ किसानों को एफआईआर करानी चाहिए।"

-धनेंद्र साहू, कृषक नेता व विधायक, अभनपुर

किसानों पर छोड़ें फैसला

- निजी क्षेत्रों ने जो बीमा की शर्तें हैं, उन्हें देखकर तो नहीं लगता कि इससे किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई पर्याप्त हो सकेगी। यह काम सरकार को अपने हाथ में लेना चाहिए। जहां तक मौसम आधारित फसल बीमा का सवाल है तो वर्तमान में इतनी बारिश हो चुकी है कि बीमा की शर्तों के मुताबिक किसानों को प्रीमियम जमा करने के बावजूद क्षतिपूर्ति नहीं मिलेगी। ऐसी पॉलिसी को अनिवार्य करने के बजाय सरकार बीमा कराने का फैसला किसानों पर छोड़ देना चाहिए।

-जेएल भारद्वाज, अर्थशास्त्री

फैक्ट फाइल

छग में फसल बीमा- 10 लाख किसानों का

बीमा का प्रीमियम - 2000 स्र्पए प्रति हेक्टेयर

कुल राशि- 200 करोड़ रु. कंपनियों के खाते में

After a month in the mail bomb rumor recorded crime

मुंबई-हावड़ा मेल को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी के खिलाफ आखिरकार जीआरपी ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है। एक माह बाद मामले में रिपोर्ट दर्ज होने से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। 30 जून को किसी ने रेलवे बोर्ड के कंट्रोल रूम को सूचना देकर मुंबई से हावड़ा जाने वाली मेल एक्सप्रेस को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इसके बाद जोन को अलर्ट कर कर दिया गया था। बोर्ड की सूचना के बाद यहां हड़कंप मच गया। देखते ही देखते बम की सूचना आग की तरह फैल गई।

जोन व डिवीजन के वरिष्ठ अफसरों को चेंबर छोड़कर स्टेशन आना पड़ा। ट्रेन अपने निर्धारित समय से 10 मिनट विलंब से शाम 6.10 बजे जैसे ही बिलासपुर रेलवे स्टेशन पहुंची बम व डॉग स्क्वॉयड के अलावा जीआरपी व आरपीएफ स्टॉफ बम की तलाश में जुट गए। पूरी ट्रेन की जांच में डेढ़ घंटे का समय लग गया। तब तक ट्रेन स्टेशन में खड़ी रही। हालांकि जांच में कुछ भी नहीं मिला। बाद में माजरा समझ में आ गया कि बम की सूचना महज अफवाह थी।

ट्रेन के परिचालन में बांधा डालते हुए इस तरह का माहौल बनाना गंभीर अपराध है। लिहाजा घटना के दूसरे दिन ही इस मामले में धमकी देने वाले आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज होनी थी, लेकिन हमेशा की तरह आरपीएफ व जीआरपी के बीच एफआईआर कौन करेगा इसे लेकर खींचातानी शुरू हो गई। आरपीएफ पोस्ट मेमो जीआरपी को देने की बात कहकर पल्ला झाड़ता रहा, तो जीआरपी मेमो नहीं मिलने की बात कहकर इस मामले से दूरी बनाए रखी।

महीनों की खींचतान के बाद आखिरकार जीआरपी को ही इस मामले में रिपोर्ट दर्ज करनी पड़ी। जीआरपी थाने के मुताबिक आरपीएफ से बाद में मेमो मिला है। इसके बाद उसकी जांच की गई। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ धारा 507 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया गया है।

फोन लगने पर दुर्व्यवहार

ट्रेन में बम होने की धमकी 9074262325 नंबर से दी गई थी। इस नंबर पर तत्कालीन आरपीएफ पोस्ट प्रभारी केबी तिवारी ने बात करने की कोशिश की, तब उस व्यक्ति ने पोस्ट प्रभारी से ही गाली-गालौज किया। उसने कहा कि जांच तो शुरू हो गई है लेकिन बहुत जल्द धमाका होगा। इससे इस बात की पुष्टि भी हो गई कि धमकी देने वाला इसी ट्रेन में है। यदि उसी दिन आरपीएफ, जीआरपी व रेल प्रशासन इस मामले को लेकर सक्रियता बरतते तो वह ट्रेन में पकड़ा जाता है।

घटना के समय मेरी पदस्थापना जीआरपी थाने में नहीं हुई थी। लिहाजा मुझे इसकी जानकारी नहीं है। लेकिन अब आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। लिहाजा जल्द ही आरोपी पकड़ में आ जाएगा।

केडी प्रभाकर, थाना प्रभारी जीआरपी बिलासपुर

We have investigated no body has infection with gulcose

फफूंद लगी ग्लूकोज मामले में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) सवालों के घेरे में हैं। सवाल यह है कि क्या खरीदी करते वक्त कॉर्पोरेशन ने रिंजल लेक्टेट के सभी बैचों की जांच नहीं करवाई थी? क्योंकि कार्पोरेशन के गठन के बाद शुरुआती महीनों में जितनी भी दवाइयां खरीदी गईं, सभी की जांच करवाई जा रही थी। तब 9 दवाएं फेल हुई थीं, जिन्हें ब्लैक-लिस्टेड किया गया था। इतना ही नहीं कॉर्पोरेशन के सदस्यों ने शुरुआत में कुछ दवा कंपनियों का निरीक्षण भी किया था। क्या यह जांच बंद हो चुकी है? लेकिन इस पर कॉर्पोरेशन के अफसरों से जवाब नहीं मिला।

रिंजल लेक्टेट में फफूंद पाने का खुलासा 'नईदुनिया' में होने के बाद कॉर्पोरेशन का कहना है कि इस दवा से किसी व्यक्ति को कोई साइड-इफेक्ट नहीं हुआ है। इसकी जांच करवाई गई है। गौरतलब है कि 'नईदुनिया' ने बताया था कि कॉर्पोरेशन ने करीब 2 महीने पहले इंदौर की कंपनी डीजे लेबोरेट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को 5 लाख रिंजल लेक्टेट ड्रिप का वर्कआर्डर जारी किया था। कंपनी द्वारा सप्लाई के बाद बोतलें जिलों में भेज दी गईं। रायपुर जिला अस्पताल में इस्तेमाल के दौरान बोतल में फफूंद देखी गई और जब उसकी जांच करवाई तो 77 बैच में से 3 बैच में गड़बड़ी पाई गई। कंपनी को नोटिस जारी हुई है और अब उसे ब्लैक लिस्टेड करने की तैयारी है।

साइड-इफेक्ट नहीं पाया गया

जब हमें शिकायत मिली, उसके बाद जांच हुई, जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई। इसके तत्काल बाद रिंजल लेक्टेट की बोतल जिन मरीजों को चढ़ाई गई थी, उनमें से कुछ से पूछताछ की गई। किसी में भी साइड-इफेक्ट नहीं पाया गया है। संबंधित कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवाई जारी है।

स्वागत कुमार साहू, महाप्रबंधक (टेक्निकल), सीजीएमएससी

Snake pair at rupees 2100 will you purchase

छत्‍तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर सांपों की खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है। इस खेल में सपेरों की बड़ी भूमिका है। ये जंगलों से सांपों को पकड़ते हैं, उनका विष निकालते हैं। अधिक मात्रा में विष इकठ्ठा हो जाने पर सांपों को या तो करतब दिखाने के लिए रख लिया जाता है या फिर बेच देते हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग सांपों और उनके जोड़े यानी नाग-नागिन को खरीदते हैं, फिर उन्हें छोड़ देते हैं, इस मान्यता के चलते कि ऐसा करने से घर की कलह और दोषों से मुक्ति मिलती है।

'नईदुनिया' ने ऐसे ही कुछ सपेरों को खोजा और फिर उनसे सांप खरीदने की बात की तो शुरू हो गई इनकी सौदेबाजी। मोल-भाव के बाद 21सौ रुपए में बात पक्की हुई। इसी दौरान इन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे भी किए, जो इस कारोबार की परतें खोलती हैं।

ऐसे हुआ खुलासा-

महादेवघाट में पड़ताल के दौरान 'नईदुनिया' को दो सपेरे मिले। दोनों ने खुद को उज्जैन का बताया। इसी वक्त एक व्यक्ति इनके पास पहुंचा और उससे नाग-नागिन के जोड़े के बारे में पूछा। सपेरे भूतनाथ और फागूनाथ ने कहा कि उनके पास जोड़ा है, चाहिए तो 5 हजार रुपए लगेंगे। सौदेबाजी करते-करते ये 3 हजार तक जा पहुंचे। तभी व्यक्ति जाने लगा, भूतनाथ ने कहा कि 21 रुपए अंतिम है। 21 सौ रुपए में सौदा हो गया।

इसके बाद 'नईदुनिया' ने इनसे बात की, इन्होंने बताया कि इन नाग-नागिन को चार दिन पहले ही उन्होंने पकड़ा, बोले- आपको भी अगर अपने घर के दोष दूर करने हैं तो नाग-नागिन का जोड़ा भगवान शिव का नाम लेकर छोड़ दो, कलह कट जाएगी। इन्होंने खुद ही दावा किया कि वे हर साल सैकड़ों सांप पकड़ते हैं, उनका विष निकालते हैं और इसी तरह बेचते रहते हैं। जानकारों का मानना है कि विष का इस्तेमाल बड़ी संख्या में मेडिकल में होता है। कई बीमारियों की दवा बनाने में भी।

सांपों पर यातनाओं की सीमा नहीं-

सपेरों को उन सांपों की तलाश होती है, जिनका फन ऊंचा होता है जैसे कोबरा, रसल वाइपर, ताकि इनसे सांपों से न सिर्फ उन्हें विष मिल जाए, बल्कि वे इनका इस्तेमाल अन्य दूसरे कामों में भी कर सकें। 'नईदुनिया' को एक सर्प विशेषज्ञ ने बताया कि सांपों को पकड़ते ही उनके विष के दांत तोड़ दिए जाते हैं और यहीं से शुरू होती हैं सांपों पर यातनाएं।

अगर सांप काबू में आ गया तो ठीक, नहीं तो उस पर डंडे से तब तक हमले किए जाते हैं, जब तक वह घायल नहीं हो जाता। दांत तोड़ने के बाद उसे जंगल से दूर ले जाकर उसकी विष ग्रंथि को लोहे की गर्म राड से जला दिया जाता है, ताकि दोबारा विष पैदा न हो सके। जंगलों में रहने वाले इस सरिसृप को पिटारों में विपरीत परिस्थितियों में रखा जाता है। कई जगह तो उसे मारकर उसकी चमड़ी का इस्तेमाल कर पर्स, बैग, जूते तक बनाए जाने की सूचनाएं हैं।

घायल कोबरा से दिखा रहे करतब-

महादेवघाट में एक सपेरा कोबरा से करतब दिखा रहा था, पूछे जाने पर उसने अपना नाम नहीं बताया, लेकिन कोबरा बुरी तरह से जख्मी था, उसे कई जगह चोट लगी थी। पूछे जाने पर सपेरे ने कहा कि वे इसे जंगल से पकड़कर लाए हैं, सांपों के साथ करतब दिखाकर रोजी-रोटी कमाना उनका पुस्तैनी धंधा है। इससे ही उनका घर चलता है। जब पूछा गया कि कोबरा को चोट कहां लगी तो उन्होंने बताया-पकड़ते वक्त। और फिर वह बीन बजाकर करतब दिखाने में जुट गया। वन विभाग के ही एक अफसर ने कहा कि सपेरे सामान्य सांप पकड़ेंगे तो वह फन नहीं फैलाएगा, सपेरों को तो बड़ा सांप चाहिए जैसे कोबरा, जो फन फैलाए तभी तो उन्हें जनता पैसा देगी।

काबू में करने के लिए चोट पहुंचाते हैं

मैंने अभी सांप पकड़ते हुए यह भी देखा कि एक सपेरा कोबरा को पकड़कर करतब दिखा रहा था, कोबरा बुरी तरह से जख्मी था। मैंने खुद इसकी सूचना वन विभाग को दी थी। ऐसा होता है, किसी वन्य प्राणी को पकड़ने के लिए शिकारी उसे चोट पहुंचते हैं। घायल कर काबू में करते हैं और उसके दांत और विष को निकाल देते हैं।

-मोइज अहमद, सचिव, नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी

कार्रवाई करते हैं

किसी भी वन्य जीव को पकड़ना नियमों का उल्लंघन है, लेकिन सपेरे वर्षों से ऐसा करते आ रहे हैं, फिर भी वन विभाग लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई करता है।

-रामप्रकाश, पीसीसीएफ, वन विभाग

Municipal election now husband will fight ward election in capital

वार्डों का आरक्षण अभी नहीं हुआ है। लेकिन वार्डों में उम्मीदवारी को लेकर गणितबाजी शुरू हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के लोग आरक्षण के इंतजार में हैं। महिला आरक्षित वार्डों में पार्षद पति इस बार खुद चुनाव लड़ने की जुगत में हैं। जो वार्ड इस बार महिला आरक्षित हैं, वहां पुरुष होना निश्चित हैं। ऐसी स्थितियों में पत्नियों को किनारे करके पति खुद पार्षद चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं।

कुल मिलाकर भाजपा के राज में पार्षद पतियों के अच्छे दिन आने वाले हैं। कुछ महिला पार्षदों के बेटे और ससुर भी किस्मत आजमा सकते हैं। चुनाव का दंभ भरने वाले कई पतियों और बेटों के लिए पार्षद चुनाव पहली दफा नहीं होगा। वे पहले भी पार्षद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

पति ही संभालते हैं महिला पार्षदों का काम

अभी तक महिला पार्षदों का काम उनके पति ही संभाल रहे हैं। जनता से मिलने जुलने से लेकर चुनाव संचालन और वार्डों का सारा काम पति ही संभालते हैं। कुछ महिला पार्षदों के पति पहले भी पार्षद रह चुके हैं। इसलिए वार्ड की राजनीति में वे इतने मंज गए हैं कि जनता भी उनके इशारे पर खड़ी हो जाती है। पार्टी का कार्यक्रम हो या फिर नगर निगम का, हर जगह पार्षद पति आवश्यक रूप से मौजूद रहते हैं।

पत्नी को तीसरी बार निर्दलीय बनाने की इच्छा

शहीद मनमोहन सिंह बख्शी वार्ड-12 के पार्षद पति चंद्रशेखर तिवारी मंडी में नौकरी पर हैं। इसलिए चुनाव नहीं लड़ सकते। लिहाजा वे अपनी पत्नी को तीसरी बार निर्दलीय पार्षद बनाकर एक रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि अभी तक कोई महिला लगातार निर्दलीय पार्षद नहीं बनी है। यदि तीसरी बार वार्ड सामान्य होता है तो उसकी पत्नी अर्थात अंजू तिवारी ही चुनाव लड़ेंगी।

मीनल की जगह होंगे छगन

डॉ.खूबचंद बघेल वार्ड की वर्तमान पार्षद मीनल चौबे की छवि एक तेजतर्रार और बोल्ड महिला नेत्री की है। निगम की सामान्य सभा से लेकर पार्टी के कार्यक्रमों में भी मोर्चा की बाकी नेताओं से वे आगे ही रहती हैं। लेकिन यदि इस बार उनका वार्ड सामान्य पुरुष हुआ तो उनके पति छगन चौबे उन्हें किनारे करके चुनाव लड़ेंगे। ी चौबे इसके पहले भी पार्षद रह चुके हैं और एमआईसी के विद्युत विभाग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ऐसे में उनका पूरा अनुभव चुनाव में काम आएगा। वैसे भी चंगोराभाठा के विकास को लेकर जब भी चर्चा होती है, तो उनका नाम जरूर आता है।

मां की जगह लड़ेगा बेटा

कालीमाता वार्ड की पार्षद श्रीमती नंदावरी साहू भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती हैं। इसके पहले उनके बेटे डॉ.प्रमोद साहू निर्दलीय पार्षद थे। अबकी बार यदि यहां पर पिछड़ा वर्ग या पुरुष सामान्य होता है तो डॉ.प्रमोद साहू ही मैदान पर होंगे।

वार्ड का नाम पार्षद कौन लड़ेगा चुनाव

डॉ.खूबचंद बघेल वार्ड -67 मीनल चौबे (भाजपा) पति छगन चौबे (पति)

बंजारी माता वार्ड -5 राधिका राव (कांग्रेस) नागभूषण राव (पति)

शहीद मनमोहन सिंह बख्शी वार्ड-12 अंजू तिवारी (निर्दलीय) अंजू तिवारी

कालीमाता वार्ड - 30 नंदावरी साहू (भाजपा) डॉ.प्रमोद साहू (बेटा)

शहीद वीरनारायण सिंह वार्ड -32 सीमा साहू (भाजपा) संतोष साहू (पति)

पं.जवाहर लाल नेहरू वार्ड -37 भारती बागल(भाजपा) अवतार बागल (पति)

सदर बाजार वार्ड - 39 रानी जैन (कांग्रेस) सतीश जैन(पति)

ले. अरविन्द दीक्षित वार्ड- 47 कविता ग्वालानी(कांग्रेस) शिव ग्वालानी (पति)

महंत लक्ष्‍मी नारायण दास वार्ड-61 अनिता यादव (भाजपा) अरविंद यादव (पति)

रमण मंदिर वार्ड -21 नीतू तिवारी (कांग्रेस) राजू घनश्याम तिवारी (पति)

संत रविदास वार्ड-70 धनेश्वरी ध्रुव (भाजपा) मयाराम ध्रुव (ससुर)

वीरांगना अवंति बाई वार्ड-6 अंजनी विभार (कांग्रेस) राधेश्याम विभार (पति)

इंदिरा गांधी वार्ड -20 ममता अग्रवाल (भाजपा) सुभाष अग्रवाल (पति)

Face twisted bilaspur station after 10 hours of continuous rain

10 घंटे की लगातार बारिश ने रविवार को जोनल स्टेशन की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यहां शेड में कई छेद हैं, जहां से बरसाती पानी दिनभर टपकता रहा। कटनी गेट के नजदीक सीढी के पास शेड का पानी पाइप सहारे सीधे प्लेटफार्म में ही बहता नजर आया। इतनी अव्यवस्था के बाद भी रेल प्रशासन खामोश बैठा रहा। इस अव्यवस्था के चलते दिनभर यात्री परेशान होते रहे।

रविवार सुबह से ही तेज बारिश हो रही थी। करीब 10 घंटे की इस बारिश का प्रभाव जोनल स्टेशन पर पड़ने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्लेटफार्म नंबर-1 की बात करे, तो इस लंबे प्लेटफार्म के शेड पर अभी भी कई छेद हैं, जिससे बरसाती पानी टपकते रहता है। यहां यह बताना लाजिमी है कि वीआईपी गेट के सामने कुछ महीने पहले ही पुराने शेड बदलकर नए लगाए गए हैं। बरसाती सीजन की तैयारी थी, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। लेकिन रेल प्रशासन की यह व्यवस्था काम नहीं आई।

चलित सीढ़ी के पास आरपीएफ सीआईबी कार्यालय के बाजू में शेड ही नहीं लगाया गया। इसके कारण बरसाती पानी प्लेटफार्म में गिरता रहा। सबसे बड़ी अव्यवस्था कटनी गेट की चलित सीढ़ी के पास नजर आई। यहां दो शेड के बीच इतनी जगह है कि उसका पानी झरने की तरह प्लेटफार्म में गिरता रहा। इसके अलावा सीढ़ी के ठीक किनारे लगी पाइप से बरसाती पानी प्लेटफार्म में गिर रहा था। जबकि पाइप जोड़कर इस पानी को सीधे पटरी पर गिराया जा सकता है। सीढ़ी चढ़ने के बाद जब प्लेटफार्म नंबर-2 में उतरते ही वहां बारिश का पानी जमा हुआ था। कटनी गेट पर भी हाल ही में शेड लगाए गए हैं।

करंट का खतरा

प्लेटफार्म 2 की सीढ़ी के पास शेड का पानी सीधे बिजली के तार व बोर्ड में गिर रहा था। यहां पर रेलवे प्रशासन की ओर से करंट से बचाव की चेतावनी भी लिखी गई है। यह स्थिति किसी खतरे से कम नहीं है। भूल से भी कोई यात्री इसके संपर्क में आ गया तो उसकी जान पर बन सकती है।

पटरी के किनारे की नाली जाम

बारिश के कारण पटरी के किनारे की नाली भी जाम हो गई। किसी भी प्लेटफार्म की पटरी के किनारे की नालियां इस स्तर की नहीं बनी है कि उसका पानी बाहर निकल सके। स्टेशन प्रबंधन कई बार जाम नालियों की सफाई करा चुका है। इसके बाद भी पानी निकासी नहीं हो पाती है।

प्रतिदिन कंट्रोल के माध्यम से यात्री सुविधाओं से संबंधित समस्याओं की मॉनिटरिंग की जाती है। कमी पाए जाने पर उसे दूर भी किया जाता है। अगर प्लेटफार्म में पानी भरने की समस्या है तो इसे दूर किया जाएगा।

white tiger borrowed from gujarat to bhilai zoo

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा मैत्रीबाग जू में रखे बब्बर शेर की क्रॉस ब्रीड की प्रक्रि या पर रोक लगा दी गई है। नेशनल जू अथॉरिटी ने कहा है कि भारतीय नस्ल के बब्बर शेर को ही रखें। इसके लिए गुजरात से बब्बर शेरों का जोड़ा जल्द भिलाई लाया जाएगा।

मैत्रीबाग जू में इस समय एक ही बब्बर शेर है। वह भी अफ्रीका और भारतीय ब्रीड का है। मिक्स ब्रीड होने की वजह से इसे लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे। बताया जाता है कि इसकी नस्ल उतनी अच्छी नहीं है, जितनी की उम्मीद की जा रही थी। ऐसी स्थिति को देखते हुएही नेशनल जू अथॉरिटी ने इन पर रोक लगा दिया है। बताया जाता है कि जल्द ही गुजरात से बब्बर शेरों का जोड़ा भिलाई लाया जाएगा और उनके लिए उपयुक्त प्रजनन की व्यवस्था मैत्रीबाग जू में की जाएगी।

सफेद बाघ जाएगा गुजरात

बीएसपी द्वारा संचालित मैत्रीबाग जू में इस समय 14 सफेद बाघ हैं। इन बाघों में से एक सफेद बाघ का जोड़ा गुजरात जू को दिया जाएगा। इसके अलावा इंदौर जू के द्वारा भी सफेद बाघ की मांग की गई है। इसे लेकर भी प्रक्रि या जारी है।

मैत्रीबाग में बब्बर शेर का जोड़ा हाईब्रीड जोड़ा है। सेन्ट्रल जू अथॉरिटी ने इसका प्रजनन बंद करने का आदेश दिया था। वर्तमान में मैत्रीबाग को राजकोट जू गुजरात से एशियन बब्बर शेर का एक जोड़ा लाने की अनुमति मिली है। इसके बदले भिलाई के मैत्रीबाग द्वारा राजकोट जू गुजरात को तीन सफेद शेर जिसमें दो मादा व एक नर शामिल हैं, दिया जाएगा। सेन्ट्रल जू अथॉरिटी इसके लिए अनुमति दे चुकी है। मौसम के मद्देनजर यह काम रुका हुआ है। - विजय मैराल, डीजीएम जनसंपर्क विभाग

Vnbansaen look at the satellite collar

छत्तीसगढ़ राजकीय पशु वन भैंस के संवर्धन एवं विकास के लिए उनकी हरेक गतिविधियों पर नजर रखाने सेटेलाइट कालर लगाने की योजना चल रही है। दक्षिण उदंती के परिक्षेत्र अधिकारी जीएस परमार ने बताया कि सेटेलाइट कालर वन भैंसों के गले में पहनाया जाएगा। इसका संबंध सेटेलाइट के माध्यम से उधा अधिकारियों के कार्यालय में लगे नियंत्रण कक्ष से रहेगा जिसके द्वारा 24 घंटे वन भैंसों की सतत स्थिति पता चलते रहेगा।

सेटेलाइट कालर डब्लूटीआई द्वारा लगाया जाएगा। इसका जिसका सीधा संपर्क क्रमशः फील्ड डायरेक्टर, उप संचालक, अधीक्षक, उदंती अभ्यारण्य एवं डब्लूटीआई से रहेगा। वर्तमान में उदंती अभ्यारण्य के दो वन भैंसे राजा एवं प्रिंस रेसेक्यू सेंटर से बाहर हैं। जिनके गले में इसे लगाया जाएगा।

एक कालर की कीमत 3 लाख

श्री परमार ने बताया कि एक कालर की कीमत लगभग तीन लाख रुपए है। अक्टूबर 2014 तक कालर लगाने का प्रस्ताव है। पूर्व में भी वन प्राणियों की गतिविधियों पर नजर रखने एवं अवैध शिकार को रोकने अभ्यारण्य के ट्रेप कैमरे लगाए गए हैं। जिसके बहुत अच्छे परिणाम आए हैं।

Source: Madhya Pradesh Latest News in Hindi  & Chhattisgarh Hindi News

kelo by way of the gate opening jam

केलो डेम के चार गेट खोलने से नदी में उफान आ गया, जिसके कारण शहर के कई मार्ग जलमग्न हो गए। जिससे शहर के कई मार्ग अवरुद्घ हो गए और चौक चौराहों पर घंटों जाम लगा रहा। मरीन ड्राइव मार्ग से होकर जाने वालों को चक्रधरनगर की ओर से जाना पड़ रहा था। वहीं रेलवे क्रॉसिंग में वाहनों की भीड़ इकठ्ठी हो गई, इसलिए ट्रेन आने के समय गेट कीपर को फॉटक बंद करने काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

केलो बांध के चार गेट खोले जाने से शहर आने-जाने वाले कई मार्गों में पानी चढ़ गया, जिससे लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ा। इससे कई रास्तों पर ट्रैफिक जाम हो गया, यहां तक चक्रधरनगर फॉटक बंद होने के बाद भी ट्रैक पर गाड़ियां खड़ी हो गई।

हालांकि, कोई हादसा नहीं हुआ लेकिन गेट में तैनात गेट कीपर को ट्रैक खाली कराने में पसीने छूट गए। क्योंकि जिस लाइन पर मेन्टेनेस ट्रेन खड़ी थी, उसी ट्रैक पर उत्कल एक्सप्रेस के आने का समय हो रहा था। गेट कीपर ने मामले की जानकारी अपने अधिकारियों को दी। जिसपर अधिकारियों के निर्देश पर जैसे-तैसे कर फॉटक बंद किया गया।

फाटक बंद करने के बाद सूझबूझ का परिचय देते हुए ट्रैक पर गाड़ी को खाली कराते हुए मेन्टेनेस ट्रेन को रवाना किया गया। जिसके बाद दोबारा फॉटक को खोलने के बाद वाहनों का आवागमन शुरू हो सका। उसके बाद भी रेलवे क्रॉसिंग पर वाहनों की लाइन लगी रही। मामले की जानकारी चक्रधरनगर पुलिस को मिलते ही पुलिस के जवान मौके पर पहुंचकर आवागमन को सुचारू करने लगे रहे। करीब 25 मिनट के बाद के बाद ही ट्रैक खाली हो सका।

बंद फॉटक बना मुसीबत

मरीन ड्राइव पर केलो का जलस्तर अधिक होने के कारण वहां आवागमन बाधित रहा। जिसके कारण लोग घूमकर अपने गतव्य की ओर जा रहे थे। लेकिन चक्रधरनगर रेलवे क्रॉसिंग बार-बार बंद होने के कारण वहां जाम की स्थिति निर्मित हो रही थी। हालांकि फॉटक खुलने के बाद यातायात सामान्य होता नजर आ रहा था। वहीं शासकीय कार्यालय जाने व कॉलेज जाने वाले लोगों को फॉटक बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं लोग अपने गतव्य तक समय से नहीं पहुंच पा रहे थे।

लोगों की बढ़ी परेशानी

केलो का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में रहने वाले वाशिंदों की परेशानी बढ़ा दी। दरअसल केलो के दक्षिणी इलाके में बनाया जा रहा मरीन ड्राइव पूरी तरह डूब जाने से पानी निचले मुहल्ले में घुसना शुरू हो गया। हालांकि यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही, लेकिन जितनी देर तक पानी का बहाव रहा मोहल्ले वासियों की जान अटकी रही। तीन बजे के बाद ही पानी मरीन ड्राइव से उतर चुका था। लेकिन पानी चक्रपथ से उतरने का नाम नहीं ले रहा था।

लाखा गांव से हटाए गए लोग

बांध में बढ़ते हुए पानी को देखते हुए प्रशासन ने लाखा गांव से लोगों को हटा लिया। बारिश का पानी हालांकि रुक चुका था, फिर भी सावधानी के बतौर जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया था। लाखा गांव डूबान क्षेत्र में आता है और वहां के लोगों को हर बारिश में हटाया जाता है। इनके लिए दूसरी जगह घर बना दिया गया है पर कुछ लोग अभी भी गांव में ही रहते हैं।

प्रशासन ने अलर्ट जारी किया

महानदी में बढ़ते जलस्तर की खबरों के बीच जिला प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले गांवों को अलर्ट कर दिया है। अभी चार दिन पूर्व ही वहां के कई गांवों में पानी घुस गया था, जिससे कई एकड़ की फसल खराब हो गई थी।


Tuesday, 29 July 2014

STFS probe is in right direction uma bharti

कुछ समय पूर्व व्‍यापमं घोटाले की सीबीआई से जांच की मांग करने वाली उमा भारती के सुर अब बदल गए हैं। यहां पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय जल संसाधन व नदी संरक्षण मंत्री उमा भारती ने कहा कि व्यापमं घोटाले के मामले में विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की जांच बिल्‍कुल सही दिशा में जा रही है।

उमा का कहना था कि शुरुआत में उन्होंने भी इस मामले में सीबीआई जांच का सुझाव दिया था, क्योंकि यह मामला दूसरे राज्यों तक भी फैला था। लेकिन अब उन्‍होंने पाया है कि एसटीएफ इस मामले की ठीक से जांच कर रहा है। गौरतलब है कि उमा ने एक बार कहा था कि व्यापमं घोटाला बिहार के चारा घोटाले से भी बड़ा है, इसलिए इसकी सीबीआई से जांच होनी चाहिए।

TI arrived on stretcher in court

हाईकोर्ट की फटकार के बाद सोमवार को दुर्घटना में घायल गौरेला टीआई एसएस शुक्ला को स्ट्रेचर में अदालत लाया गया। सुनवाई के दौरान उन्हें कोर्ट रूम के अंदर स्ट्रेचर में सुला कर रखा गया। बहस के लिए अधिवक्ता के नहीं आने पर 30 जुलाई को सुनवाई की अगली तारीख दी गई है।

गौरेला पुलिस ने पिछले वर्ष गौरेला निवासी सविता सोनी को गांजा बेचने के आरोप में पकड़ा था। इस मामले में तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार नायडू की अदालत में सुनवाई चल रही है। पिछले एक वर्ष से जेल में बंद महिला ने निचली अदालत से जमानत खारिज होने पर हाईकोर्ट में आवेदन पेश किया। आवेदन में कहा गया कि बयान के लिए टीआई सहित अन्य को कई बाद समंस जारी किया गया।

इसके बावजूद पुलिस कर्मी गवाही के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे। इसके कारण आवेदिका को जेल में रहना पड़ रहा है। आवेदन को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को तलब किया था। इसमें वारंट और समंस तामीली में होने वाले विलंब व पुलिस की लापरवाही पर जमकर फटकार लगाई थी।

हाईकोर्ट में उपस्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने टीआई के बीमार होने की बात कही। हाईकोर्ट ने टीआई को स्ट्रेचर में कोर्ट लाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट की फटकार के बाद सोमवार को उन्हें पुलिस लाइन की एंबुलेंस से जिला न्यायालय लाया गया।

Naxal encounter the first day of the week a pile of martyrdom

नक्सलियों के शहीदी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को सुकमा जिले के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के रामाराम के जंगलों में पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक नक्सली मारा गया वहीं सीआरपीएफ के दो जवान घायल हो गए हैं। शहीदी सप्ताह के चलते बस्तर के अंदरूनी इलाकों में यातायात भी प्रभावित रहा। सोमवार को सीआरपीएफ व पुलिस की संयुक्त पार्टी सर्चिंग के लिए निकली थी।

रामाराम से लगे जंगल में छिपे नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई की। घटना में सीआरपीएफ के एक हवलदार समेत दो जवानों को गोली छीलती हुई निकली जिससे वह मामूली रूप से घायल हो गए। उनका प्राथमिक उपचार चिंतलनार में किया गया। करीब दो घंटे तक चली गोलीबारी के बाद घटना स्थल की सर्चिंग करने पर एक वर्दीधारी नक्सली का शव बरामद किया गया है। एक भरमार बंदूक भी मिली है। घायल जवानों का नाम अभी ज्ञात नहीं हुआ है।

अफवाह निकली गोलीबारी की घटना

शहीद सप्ताह के पहले दिन कुआकोण्डा थाने पर नक्सली गोलीबारी की अफवाह ने पुलिस के आला अफसरों के कान खड़े कर दिए। रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात कुआकोण्डा थाना पर नक्सलियों द्वारा आधे घंटे तक गोलीबारी की खबर आई थी जिसे एसपी ने नकारते महज अफवाह बताया है। एसपी कमलोचन कश्यप का कहना है कि आधी रात थाने पर नक्सलियों ने गोलीबारी नहीं की। वे स्वयं कुआकोण्डा थाना में मौजूद थे।

एसपी के अनुसार पुलिस को खुफिया सूत्रों से यह जानकारी मिली थी कि कुछ संघम सदस्य सुकमा मार्ग पर भूसारास घाटी में सड़क खोदने की फिराक में हैं। इस पर वे दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। वहां मौके पर कोई नजर नहीं आया। एसपी ने बताया कि शहीद सप्ताह के मद्देनजर आलनार की तरफ सर्चिंग पर निकले जवानों ने नक्सलियों द्वारा बनाए गए स्मारक को ध्वस्त किया है। नक्सलियों की सक्रियता को देखते पुलिस ऐहतियात बरत रही है।

थमे बसों के पहिए

3 अगस्त तक चलने वाले शहीदी सप्ताह के पहले दिन दक्षिण बस्तर में यातायात पर नक्सली खौफ नजर आया। नक्सली दहशत से नारायणपुर के ओरछा, दंतेवाड़ा के कटेकल्याण व मारडूम मार्ग पर यात्री बसों के पहिए थमे रहे। वहीं सुकमा-कोंटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगने से बसों का परिचालन ठप रहा। दहशत फैलाने की मंशा से नक्सलियों ने दंतेवाड़ा-सुकमा मार्ग पर गादीरास के पास सड़क के दोनों ओर पेड़ों पर बड़ी तादाद में पर्चे चिपकाए थे। इसी तरह बारसूर-मारडूम मार्ग पर भी पर्चे मिलने की खबर है।

Thursday, 24 July 2014

Stop sexual abuse get reward of lack rupee

प्रदेश में तेजी से बढ़ते महिला अपराध और बलात्कार की घटनाओं से निपटने पुलिस मुख्यालय ने नया एक्शन प्लान तैयार किया है। नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार योजना के तहत प्रदेश में कहीं भी महिला यौन उत्पीड़न, बलात्कार, अपहरण,चेन स्नेचिंग और मानव तस्करी जैसी घटनाओं के खिलाफ साहस का परिचय देने वाले व्यक्ति या समूह 1.5 से पांच लाख रुपए तक इनाम पाने के हकदार होंगे।

ये प्लान पीएचक्यू ने गृह विभाग को सौंप दिया है। इस पर जल्द सहमति की उम्मीद जताते हुए डीजीपी नंदन दुबे ने बताया कि व्यक्ति या समूह के लिए पुरस्कार सर्वोत्तम वीरता पुरस्कार, उत्तम वीरता पुरस्कार, वीरतापूर्ण कार्य पुरस्कार और सामूहिक प्रयास पुरस्कार की श्रेणियों में होगा।

ये है योजना-

- किसी महिला के प्रति अपराध को रोकने में पहल करने वाले की मौत होती है तो राज्य शासन व्यक्ति के परिवार को सर्वोत्‍तम वीरता श्रेणी के तहत 5 लाख रुपए देगी।

- नारी सम्मान की रक्षा में सामूहिक पहल में जनहानि पर 3 लाख रुपए।

- रक्षा करने में व्यक्ति गंभीर रूप से जख्मी हुआ तो उत्तम वीरता श्रेणी के तहत वह 3.5 लाख रुपए।

- महिला यौन उत्पीड़न, बलात्कार, और अपहरण जैसी वारदातों को निष्फल करने वाले को व्यक्तिगत श्रेणी में 1.5 लाख रुपए।

निर्णय अफसरों की ज्यूरी के हाथ

नारी सम्मान रक्षा पुरस्कारों की घोषणा गणतंत्र दिवस से हो जाएगी। प्रदेश के सभी थानों से ऐसे प्रकरण मुख्यालय मंगवाए जाएंगे। पक्षकार भी व्यक्तिगत रूप से दावे पेश कर सकेंगे। दावों पर अंतिम निर्णय लेने और पुरस्कारों की घोषणा के लिए पीएचक्यू के वरिष्ठ अधिकारियों की ज्यूरी गठित की गई है। इसमें एडीजी महिला अपराध, आईजी प्रशासन, आईजी गुप्तवार्ता, आईजी विशेष बल और एआईजी महिला अपराध को शामिल किया गया है।

एमपी में अपराध के आंकड़े

एमपी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक रोज 19 महिलाएं और 2 बच्चे औसत रूप से लापता हो रहे हैं। एनसीआरबी के अनुसार एमपी में रोज बलात्कार की 12 घटनाएं होती हैं। साल 2013 में महिलाओं के लापता होने के कुल 3209 प्रकरण दर्ज हुए थे, जबकि 2014 में मई तक पांच माह में ही ये संख्या 2924 पर जा पहुंची है। बच्चों के लापता होने के मामले में भी गिरावट नहीं आई है। 2014 में मई तक ऐसे 406 मामले दर्ज हुए हैं।

Chambal river water will come in gwalior palne will make in three month

2050 तक ग्वालियर शहर की प्यास बुझाने के स्थायी समाधान के लिए चंबल नदी से पानी लाने की योजना को सर्वसम्मति से सहमति प्रदान कर दी गई है। सभापति बृजेन्द्र सिंह जादौन ने निगमायुक्त को यह निर्देश दिए हैं कि डीपीआर अधिकतम तीन माह में तैयार कर शासन को भेज दी जाए। परिषद ने इसके लिए दो करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की।

नगर निगम परिषद की बैठक में इंदौर की कंसल्टेंट कंपनी मेहता एण्ड मेहता ग्रुप के प्रतिनिधि ने बताया कि 2050 तक शहर की आबादी 26 लाख से अधिक हो जाएगी। इस समय तक शहर की प्यास बुझाने के लिए 480 एमएलडी पानी की आवश्यकता होगी। कान्सेप्ट प्लान के प्रेजेंटेशन में ककेटो-पेहसारी, सिंध नदी से पानी लाने का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया गया।

कंसल्टेंट और पार्षदों से एकमत से तय किया गया कि चंबल से पानी लाना सबसे बेहतर उपाय है। निष्कर्ष के बाद सभापति ने फैसला सुनाया कि महापौर समीक्षा गुप्ता के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया जाता है। हालांकि प्रेजेंटेशन के बाद परिषद की बैठक में चंबल के पानी को लेकर राजनीतिक श्रेय की लड़ाई छिड़ गई। कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों ने एक-दूसरे पर पर आरोप लगाए।

सभापति ने ये भी कहा कि सत्ता एवं विपक्ष के पार्षदों का एक दल प्रदेश एवं केन्द्र सरकार के उन संबंधित विभागों से संपर्क स्थापित करे जो इस योजना के लिए आवश्यक है। इसके अलावा डीपीआर के लिए 2 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान भी रखा गया है, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।

Forgery in psc exam searchin in hotel

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग(पीएससी) को शायद लग रहा है कि राज्य सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में फर्जीवाड़ा हो सकता है। इसलिए 27 जुलाई को पूरे प्रदेश में होने वाली इस परीक्षा के लिए विशेष सतर्कता बरतने के इंतजाम किए जा रहे हैं। पीएससी ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि शहर के होटलों में तलाशी अभियान चलाकर जांच की जाए। इसमें यह देखा जाएगा कि कोई गैंग परीक्षा को प्रभावित करने में तो संलग्न नहीं है?

आयोग ने संवेदनशील परीक्षा केंद्रों की वीडियोग्राफी के निर्देश भी दिए हैं। आयोग ने परीक्षा के संबंध में शिकायत दर्ज कराने के लिए हेल्पलाइन भी शुरू की है। हेल्पलाइन नंबर 18002330182 पर कोई भी व्यक्ति राज्य सेवा परीक्षा-2013 से संबंधित शिकायत तथ्यों के साथ दर्ज करा सकता है।

यह हेल्पलाइन 3 अगस्त तक कार्य करेगी। आयोग ने तय किया है कि किसी भी परीक्षा केंद्र के एक ही रूम में एक ही परिवार के एक से अधिक प्रतियोगी नहीं बैठ सकेंगे। प्रतियोगियों के नाम, पिता का नाम और पते को जांचकर छंटनी की जाएगी। परीक्षा दो सत्र में होगी। पहला सुबह 10 से 12 बजे तक और दूसरा दोपहर 2 से 4 बजे तक रहेगा।

ड्यूटी अधिकारी को देना होगा घोषणा-पत्र

परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी करने वाले अधिकारियों को यह घोषणा-पत्र देना होगा कि उनका कोई रिश्तेदार इस परीक्षा में शामिल नहीं हो रहा है। यदि हो रहा है तो उस अधिकारी की ड्यूटी कैंसल कर दी जाएगी। हर परीक्षा केंद्र पर पुलिस बल का भी पर्याप्त इंतजाम किया जाएगा।

ये तैयारी भी

- परीक्षा केंद्र के आसपास अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा न हो इसलिए धारा-144 लागू की जा सकती है।

- आयोग की सतर्कता अधिकारी कीर्ति खुरासिया के फोन नंबर 0731-2702354 पर भी सुबह 10.30 से शाम 5.30 बजे के बीच शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

- परीक्षा केंद्रों पर ड्यूटी के लिए कलेक्टर कार्यालय, ट्रेजरी और स्कूल, कॉलेज के अधिकारियों को लिया गया है।

- केंद्रों पर निगरानी के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड भी बनाई गई हैं।

- इंदौर में परीक्षा के लिए एडीएम आलोक सिंह को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

- प्रदेश को संभागवार तीन जोन में बांटकर तीन केंद्रीय पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए गए हैं।

फैक्ट फाइल

101 सेंटर

इंदौर में

53715

प्रतियोगी

500

अधिकारी- कर्मचारी होंगे ड्यूटी पर