Wednesday, 2 July 2014

Ganga reached the desired awakening amroha

कभी कल-कल बहती निर्मल गंगा का जल आज आचमन लायक तक नहीं बचा। निर्मल-अविरल गंगा की जलधार खंड-खंड हो चुकी हैा। गंदगी और प्रदूषण से गंगा इस कदर मैली हो गई है कि उसके अस्तित्व पर भी संकट छा गया है, लेकिन अब गंगा मां को निर्मल और स्वच्छ बनाने की मुहिम शुरू हो गई है जिसके तहत शुरू की गई गंगा जागरण यात्रा बुधवार को अमरोहा जिले में पहुंच गई। जगह जगह यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था, मानों सभी ने एक साथ संकल्प कर लिया हो कि अब गंगा मां के साथ और अत्याचार सहन नहीं करेंगे और सब के पाप धोने वाली गंगा को निर्मल बनाकर ही रहेंगे।

अमरोहा से मुरादाबाद तक वातावरण गंगामय

बड़ीं संख्या में गंगा यात्रियों की मौजूदगी और शिरकत से अमरोहा से मुरादाबाद तक का वातावरण गंगा मय हो गया।

गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने का संकल्प

गंगा यात्रा के दौरान आज सुबह अमरोहा के बृजघाट पर आरती, भजन और संगीत की ऐसी छटा बिखरी कि देखने वाले मंत्रमुग्ध हो गये। यहां राजनेता हो या व्यापारी या फिर आम जनता, सभी ने एक साथ यात्रा का स्वागत करते हुए पुष्पवर्षा की। इसके बाद यात्रा जुबिलेंट पहुंची जहां हजारों की संख्या में लोगों ने यात्रा पर फूल बरसाये। पवित्र उद्देश्य को लेकर शुरू की गयी इस यात्रा को जिसने देखा वह इसकी प्रशंसा किये बगैर नहीं रह सका। तमाम लोग ऐसे भी थे जो यात्रा के साथ ही जुड़ गये और गंगा मां को हर हाल में निर्मल और स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। इसके बाद यात्रा चौपला की तरफ बढ़ चली।

झनकपुरी में भाजपाइयों ने फूल बरसाए

गजरौला के चौपला पर यात्रा का पुष्पवर्षा और गंगा मां के जयकारों से गूंज उठा। पूर्व चेयरमैन गजरौला रोहताक शर्मा, डा. आशुतोष भूषण, जूनखाड़ा के राष्ट्रीय महासचिव कर्णपुरी महाराज, महावीर सिंह समेत कई गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने यात्रा का स्वागत किया। इसके साथ ही आगे मुरादाबाद की ओर बढ़ते ही विश्वबन्धु स्कूल के प्रधानाचार्य विकास जैरथ, स्टाफ और छात्र यात्रा में शामिल हो गए। साथ ही झनकपुरी में सांसद के कार्यालय पर भाजपाइयों ने भी पुष्पवर्षा की।

अपने-अपने अंदाज में अगवानी

अमरोहा के जोया में गंगा यात्रा का भाजपा नेता अतुल जैन, जिलाध्यक्ष गिरीश त्यागी, जोया चेयरमैन समेत कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों ने यात्रा की अपने-अपने अंदाज में अगवानी की। खाता गांव में एएसएम इंटर कालेज में यात्रा में शामिल लोगों को जलपान कराया गया। यहां प्रबंधक विरेन्द्र गुप्ता, प्रधानाचार्य, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने यात्रा पर पुष्पवर्षा की। ग्राम जलालपुर कला स्थित श्रीकृष्ण इंटर कालेज में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने गंगा यात्रियों को शरबत पिलाया।

मुरादाबाद की सीमा में प्रवेश

जोया से होते हुए गंगा जागरण यात्रा मुरादाबाद जिले की सीमा में प्रवेश कर गई! इससे पहले भी तमाम स्थानों पर लोगों ने यात्रा पर पुष्पवर्षा की और गंगा को निर्मल और स्वच्छ बनाने का संकल्प लिया। लोगों ने कहा कि वह अपने स्तर से गंगा को स्वच्छ बनाने का हरसम्भव प्रयास करेंगे। मुरादाबाद में भी यात्रा के स्वागत की जबर्दस्त तैयारी है। मुरादाबाद जिले की सीमा में प्रवेश करते ही यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। पाकबड़ा में हजारों लोगों ने यात्रा पर पुष्पवर्षा की और गंगा को निर्मल बनाने का संकल्प लिया। बैंड बाजों के साथ हजारों लोग गंगा यात्रा के साक्षी बने

तीथरंकर महावीर विश्वविद्यालय परिसर में कमिश्नर शिवशंकर, महापौर बीना अग्रवाल, टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, वाइस चांसलर मनीष जैन आदि ने पुष्पवर्षा की और इसके बाद यात्रा शहर की तरफ बढ़ चली। 

Amarnath came for darshan of innocent travelers on bicycle

साइकिल पर तेरह हजार किलोमीटर की यात्रा तय कर चुके वीराब्राह्मणा सूर्य चंद्र शंकर नारायण दूसरी बार श्री अमरनाथ के दर्शनों के लिए जम्मू भगवती नगर पहुंचे। शिवभक्तों के साथ बम-बम भोले के जयघोष लगाते हुए नारायण ने कहा कि वह यहां से करंट रजिस्ट्रेशन करवा बुधवार को साइकिल पर ही अगले पड़ाव की ओर प्रस्थान करेंगे।

हाल ही में चार धाम की यात्रा समाप्त कर चुके नारायण ने बताया कि वह दिल्ली से 4 मई को श्री अमरनाथ यात्रा के लिए निकले थे। अपने आप को भोले का परम भक्त बताते हुए नारायण ने बताया कि वह कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी कर चुके हैं और उस दौरान वह भगवान शिव के दरबार में पांच दिन रहे थे। अपनी इस यात्रा के दौरान वह केवल जूस या पानी का ही सेवन करते हैं। अन्न, फलाहार का सेवन वह केवल सोमवार को ही करते हैं। बम-बम भोले के जयघोष लगाते हुए नारायण ने कहा कि यदि भोले ने चाहा तो वे हर साल साइकिल पर श्री अमरनाथ यात्रा में शामिल होने आएंगे।

भोले के भजनों के साथ कट जाएगा सफर

मुंबई के अकोला क्षेत्र से बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए भगवती नगर आधार शिविर पहुंचे बजरंग मंडल के सदस्यों ने कहा कि भोले की दिव्य महिमा उन्हें दूसरी बार इस यात्रा पर ले आई है। उनके साथ पहली बार कई नए साथी भी आए हैं जो बाबा के दर्शनों की इच्छा रखते हैं।

करीब तीन दिन बाद जम्मू पहुंचे इन श्रद्धालुओं का कहना है कि सफर काफी लंबा है परंतु भोले के प्रति उनकी आस्था दुर्गम से दुर्गम यात्रा को भी आसान बना देगी। बजरंग मंडल के सदस्य आशीष ने कहा कि मंडल में शामिल सदस्य अपने साथ ढोल आदि लेकर आए हैं और जब कभी मौका लगता है तो वे भजनों में लीन हो जाते हैं। उनके साथ यात्रा पर आने दूसरे श्रद्धालु भी भगवान शंकर की भक्ति में मंत्रमुग्ध होकर नाचने लगते हैं, यह उन्हें खुशी देती है।

मंडल सदस्यों ने कहा कि बुधवार सुबह वह यात्रा के अगले पड़ाव के लिए रवाना हो जाएंगे। जैसा वह तय करके आए थे आगे बाबा बर्फानी के द्वार तक का दुर्गम मार्ग भी भजनों के बीच ही तय करेंगे। सदस्यों ने कहा कि यह श्री अमरनाथ की कृपा का ही असर है कि वे हर साल इस यात्रा में शामिल होते हैं।

CAG report: Maha Kumbh not show up in the planning and coordination of

संगम तट पर महाकुंभ 2013 के आयोजन की सफलता पर अपनी पीठ थपथपाने वाले विभागों की खामियों को अब सीएजी ने उजागर किया है। लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार विभागों में नियोजन का अभाव था और सामंजस्य बनाने के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तक नहीं बनाया गया था।

मेला खत्म हो गया पर काम नहीं

महाकुंभ 2013 की ऑडिट रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा के पटल पर रखी गई। तेरह विभागों के अभिलेखों की जांच पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि महाकुंभ की शुरुआत 14 जनवरी 2013 से हुई थी लेकिन लोक निर्माण विभाग और नगर निगम के कई काम मेला खत्म होने के कई माह बाद तक अधूरे रहे। विशेष तौर पर सड़क निर्माण के 111 कायरें में से 65 कार्य जून 2013 तक नहीं खत्म किए जा सके थे। यही स्थिति नगर निगम की 35 सड़कों की भी थी। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र भी है कि 26.64 करोड़ लागत के चार काम तो मेला खत्म होने के बाद भी शुरू नहीं हो सके थे। कई सड़कों के चौड़ीकरण का काम बिना यातायात गणना के ही कराया गया। 23 सड़कों के चौड़ीकरण पर 57.41 करोड़ का व्यय अनियमित रहा। मेला की शुरुआत में लगभग 59 फीसद काम अधूरे थे।

लागबुक में ट्रैक्टर और पंजीकरण में रिक्शा

सीएजी रिपोर्ट ने महाकुंभ के कायरें में धांधली की ओर भी इशारा किया है। भूमि के समतलीकरण में दो ट्रैक्टरों को एक ही समय में दो स्थानों पर कार्य करता हुआ दिखाया गया। इस कार्य में 93 ट्रैक्टर लगाए गए थे लेकिन नौ की पंजीकरण संख्या मोटरसाइकिल, स्कूटर, आटो रिक्शा, खुली ट्रक एवं बसों की थी। अभिलेख परीक्षण में तीस श्रमिक भी ऐसे मिले जो एक ही समय दो स्थानों पर कार्य करते दर्शाए गए। 23 ठेकेदारों को 4.65 करोड़ अग्रिम भुगतान पर भी आपत्तियां जताई गई है। कहा गया है कि यह न सिर्फ अनियमित था बल्कि ठेकेदारों को अनुचित लाभ भी था।

मनमानी खरीदारी, दवाओं की बर्बादी

महाकुंभ में राज्य क्रय मैन्युअल की भी जमकर अवहेलना की गई। अधिक सामान खरीद लेने से धनराशि अवरुद्ध रही। मसलन स्वास्थ्य विभाग ने 93.45 लाख रुपये से 172 तरह की औषधियां खरीदी जिनमें 61.06 लाख का उपयोग नहीं किया जा सका। इनकी एक्सपायरी भी अगस्त 2013 में ही हो जानी थी। मेडिकल कालेज ने मई में इन दवाओं को गरीबों में बांटने की अनुमति मांगी लेकिन शासन से छह अगस्त 2013 को अनुमति दी गई। हालांकि शासन का कहना था कि अधिकांश दवाओं का इस्तेमाल कर लिया गया। नगर निगम ने भी अधिक सामान खरीदे।

भीड़ प्रबंधन पर सवाल

कैग ने महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन की योजना को भी कटघरे में रखते हुए कहा है कि विभागों में समन्वय एवं प्रबंधन का अभाव था। मौनी अमावस्या पर रेलवे स्टेशन पर हुए हादसे के लिए भी समन्वय की कमी को ही जिम्मेदार माना। रेलवे और मेला नियंत्रण कक्ष में सजीव प्रसारण को साझा करने की कोई सुविधा नहीं थी।

Amarnath Yatra: the number of devotees across 50 thousand

श्री अमरनाथ यात्रा के पहले चार दिनों में बाबा बर्फानी के पवित्र हिमलिंग के दर्शन करने वाले भक्तों की संख्या पचास हजार पार कर गई। मंगलवार को 15,812 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में माथा टेका। इसी के साथ अब तक दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या 50,528 पहुंच गई।

इस बीच, दुखद यह रहा कि हृदयगति रूकने से दो और शिवभक्तों की मौत हो गई। 28 जून से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में चार दिन में ही आठ यात्रियों की मौत हो चुकी है।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार सुबह बालटाल से 10146 श्रद्धालु पवित्र गुफा की तरफ रवाना हुए। इनमें 300 श्रद्धालु हेलीकॉप्टर से पवित्र गुफा तक पहुंचे। वहीं पहलगाम से भी 236 श्रद्धालु हेलीकॉप्टर के जरिए पवित्र गुफा की तरफ रवाना हुए। पहलगाम से पैदल यात्रा दो जुलाई से शुरू की जाएगी। इससे पूर्व सोमवार देर रात ब्रारीमर्ग के निकट 50 वर्षीय महिला श्रद्धालु रतना गुलाटी निवासी आइटीआइ, लेबर कॉलोनी हरियाणा ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उन्हें तुरंत निकटवर्ती चिकित्सा शिविर पहुंचाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इसी बीच, मंगलवार सुबह भी ब्रारीमर्ग इलाके के निकट 69 वर्षीय हरविंदर कुमार मखन पुत्र रामलाल मखन निवासी नई दिल्ली ने भी सीने में तेज दर्द की शिकायत की। उन्हें भी चिकित्सा शिविर पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। बता दें कि वर्ष 2013 में अमरनाथ यात्रा के दौरान 56 श्रद्धालुओं और वर्ष 2012 में 120 यात्रियों की मौत हो गई थी। 

Do not presumptuous generously donated

राजा जानुश्रुति अपने समय के महान दानी थे। एक शाम वह महल की छत पर विश्राम कर रहे थे, तभी सफेद हंसों का जोड़ा आपस में बात करता आकाश-मार्ग से गुजरा।

हंस अपनी पत्नी से कह रहा था। क्या तुझे राजा जानुश्रुति के शरीर से निकल रहा यश प्रकाश नहीं दिखाई देता। बचकर चल, नहीं तो इसमें झुलस जाएगी।

हंसिनी मुस्कराई, प्रिय मुझे आतंकित क्यों करते हो? क्या राजा के समस्त दानों में यश निहित नहीं है, इस लिए मैं ठीक हूं। जबकि संत रैक्व एकांत साधना लीन हैं? उनका तेज देखते ही बनता है। व हीं सच्चे अर्थों में दानी हैं।

जानुश्रुति के ह्दय में हंसो की बातचीत कांटों की तरह चुभी। उन्होंने सैनिकों को संत रैक्व का पता लगाने का आदेश दिया। बहुत खोजने पर किसी एकांत स्थान में वह संत अपनी गाड़ी के नीचे बैठे मिले।

जानुश्रुति राजसी वैभव से अनेक रथ, घोड़े, गौ और सोने की मुद्राएं लेकर रैक्व के पास पहुंचे। रैक्व ने बहुमूल्य भेटों को अस्वीकार करते हुए कहा कि मित्र यह सब कुछ ज्ञान से तुच्छ है। ज्ञान का व्यापार नहीं होता।

राजा शर्मिंदा होकर लौट गए कुछ दिन बाद वह खाली हाथ, जिज्ञासु की तरह रैक्व के पास पहुंचे। रैक्व ने राजा की जिज्ञासा देखकर उपदेश दिया कि दान करो, किंतु अभिमान से नहीं उदारता की, अहं से नहीं, उन्मुक्त भाव से दान करो। राजा रैक्व की बात सुनकर प्रभावित हुए और लौट गए।

संक्षेप में

दान हमेशा निश्छल भाव से करना चाहिए। दान करते समय यह नहीं सोचना चाहिए कि हमें दान करने से भविष्य में कोई लाभ मिलेगा। क्यों कि दान दान होता है।

Learn from the experience good advice of allah

इस्लाम धर्म में जाफ़र सदिक़ और उपनाम अबु मुहम्मद का नाम बड़े ही अदब से लिया जाता है। कहते हैं उनकी करामतो और गुणों के बारे में जितना लिखा जाए उतना कम है।

आपका दर्जा सहाब किराम के बाद ही आता है। आपकी जिंदगी से जुड़ी हुई कई ऐसी बातें है जो लोग आपके तजुर्बे से कुछ सीख ले सकते हैं।

अल्लाह के लिए

एक बार जाफ़र सादिक को कीमती लिबास में देख कर किसी ने आपत्ति की, कि ऐसा क़ीमती लिवास उनके लिए ठीक नहीं तो उन्होंने कहने वाले बंदे का हाथ पकड़ा और उसे अपनी आसतीन पर फेरा तो उसे आपका लिबास टाट से भी अधिक खुरदुरा लगा। उस समय आपने कहा कि लोगों की निगाहों में तो यह अच्छा लिबास है लेकिन अल्लाह के लिए यही खुरदुरा है।

एक रोचक प्रसंग

किसी व्यक्ति की दीनार की थैली खो गई उसने आप पर आरोप लगाया और कहा कि मेरी थैली तुमने चुराई है। आपने सवाल किया कि उसमें कितनी रक़म थी? उसने कहा दो हज़ार दीनार। आप अपने घर गए और दो हजार दीनार दे दिए।

बाद में जब उसकी खोयी ही थैली किसी दूसरी जगह से मिली तो उसने इस घटना के बारे में माफी मांगी। लेकिन आपने कहा कि हम किसी को कुछ देकर वापस नहीं लेते। फिर जब लोगों से उसको आपका नाम मालूम हुआ तो उसी अच्छा नहीं लगा कि इतने बड़े महान व्यक्ति के साथ उसने ऐसा किया।

बुद्दिमान कौन?

एक बार आपने इमाम अबु हनीफ़ा से सवाल किया कि बुद्धिमान की क्या परिभाषा है? इमाम सहाब ने जबाव दिया कि जो भलाई व बुराई में अंतर कर सके। आपने कहा कि यह अंतर तो जानवर भी कर लेते हैं क्योंकि जो उनकी सेवा करता है उनको वह कष्ट नहीं देते और जो उन्हें कष्ट देता है उन्हें वह काट लेते हैं।

इमाम अबु हनीफ़ा ने पूछा कि फिर आपके निकट बुद्धिमानी की क्या निशानी है? तब आपने जबाव दिया कि जो दो भलाइयों में से बेहतर भलाई को अपनाए वही बुद्धिमान है।

First to make architectural house

जब हम अपना आशियाना बनाते हैं तो इसके लिए ईंट, पत्थर, बालू, लोहे की मदद से अपने आशियाने को सुंदर बनाते हैं। तब उस घर में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना आवश्यक हो जाता है।

ऐसे घर जिनमें वायु आर-पार होती है वहां वास्तु शास्त्र के नियम लागू नहीं होते हैं। यहां कुछ ऐसे ही वास्तु टिप्स हैं जिन्हें आजमाकर आप अपने आशियाने को सुंदर और खुशहाल बना सकते हैं।

    भोजन हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके खाना चाहिए।

    जिस घर में सूर्य की किरणें और वायु प्रवेश नहीं करती वह शुभ नहीं होता है।

    पूर्व में ऊंची भूमि पुत्र और धन का नाश करती है इसलिए ऐसी परिस्थिति में भूमि को समतल बनाकर ही घर बनाएं।

    एक दीवार से मिले हुए दो मकान यमराज के समान गृहस्वामी का नाश करने वाले होते हैं। इसलिए भवन के चारों और मुख्य द्वार के सामने व पूछे कुछ जमीन छोड़ देना चाहिए।

    घर के भीतर कोई पेड़ नहीं होना चाहिए। बड़े पेड़ के कारण उसकी जड़ में सांप, बिच्छू होने के कारण घर के स्वामी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    मकान के किसी भी भाग को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। यदि बढ़ाना हो तो सभी दिशाओं में समान रूप से आगे बढ़ाना चाहिए।

    यदि मकान के किसी भी भाग को बढ़ाना अनिवार्य हो तो पूर्व या उत्तर की तरफ बड़ा सकते हैं। क्योंकि उसमें थोड़ा दोष होता है।

    घर के अंदर मांसाहार पशुओं या पक्षियों के चित्र या पेंटिंग कभी भी नहीं लगाना चाहिए।

    ध्यान रखें एक दूसरे को प्यार करते कबूतर, बच्चों को दाना खिलाती चि़ड़िया, घृणा, क्रोध और क्रूरता पैदा करना वाले चित्रों को कभी नहीं लगाना चाहिए।