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Tuesday, 5 August 2014

Tree cut in officer house

दो दिन पहले ही पौधरोपण के मामले में वर्ल्ड रिकार्ड बनाने वाले वाले महकमे ने शनिवार को अपने अफसर के आवास के लिए दर्जनों हरे-भरे पेड़ों को काट दिया। चार मजदूर दिनभर हर्बल पार्क में पेड़ों की कटाई करते रहे। कहा जा रहा है कि यहां साहब के आवास के लिए भवन बनाया जा रहा है। इसके पहले भी यहां आवास निर्माण के लिए पेड़ों की बलि चढ़ाई जा चुकी है।

कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित वन विभाग के दफ्तर के पास ही हर्बल पार्क से जुड़ी शासकीय भूमि पर बड़ी तादाद में पेड़ लगे हैं। पेड़ों की सुरक्षा के लिए यहां पहले से ही फेंसिंग की जा चुकी है। शनिवार को अचानक यहां पेड़ों की कटाई का सिलसिला शुरू हो गया। जानकारी लेने पर पता चला कि यहां विभागीय अफसर के लिए बंगला बनाया जाना है, इसलिए पेड़ों की कटाई की जा रही है।

कांटों के बहाने काटे पेड़

वन विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि यहां बबूल, शू-बबूल, रिंमझा और अन्य कांटेदार प्रजातियों के पेड़ हैं। इसके अलावा कुछ झाड़ियां हैं। इन्हें काटकर अलग किया जा रहा है। इसके बाद यहां निर्माण कार्य शुरू होगा।

उपसंचालक का निवास बनेगा

बताया जाता है कि इस स्थान पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एक अफसर का बंगला बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके पहले भी कुछ समय पहले हर्बल पार्क में एक बंगला निर्माण किया गया था। इस दौरान भी यहां पेड़ों को काटा गया था। इसके बाद बीते वर्ष पेड़ काटकर भवन का फाउंडेशन तैयार किया गया। उसके बाजू में लगे पेड़ वाली जगह पसंद आने पर फिर से पेड़ काटकर जगह साफ कराई जा रही है।

हर्बल पार्क में बनेगा विश्राम भवन

वन विभाग का एक विश्राम बनना भी प्रस्तावित है। उसका स्टीमेट तैयार हो चुका है। लाभांश की 18 लाख की लागत से हरे-भरे हर्बल पार्क के पेड़ काटकर यहां पर एक विाम भवन बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए भी पेड़ों की कटाई किए जाने की आशंका है।

आवास बनेगा

हर्बल पार्क के पास वाले क्षेत्र के बाजू में विभाग की जगह पर आवास बनाने के लिए स्थान स्वीकृत हुआ है। यहां बना पुराना आवास क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस कारण नया आवास बनाया जा रहा है। बबूल के कुछ पेड़ काटकर हटाए गए हैं। एके मिश्रा, उपसंचालक, सतपुड़ा टाईगर रिजर्व

ईको पर्यटन केंद्र बनना प्रस्तावित

कलेक्ट्रेट के पीछे स्थित हर्बल पार्क में जहां बंगला बनाने के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही है। उस स्थान पर तीन करोड़ रुपए की लागत से ईको पर्यटन केंद्र बनाया जाना पहले से ही प्रस्तावित है। इस योजना का शिलान्यास 10 नवंबर 2013 में चुनाव जीतने के बाद सरताज सिंह ने किया था। उक्त कार्यक्रम में होशंगाबाद के तत्कालीन नवनिर्वाचित विधायक डॉ सीतासरन शर्मा भी मौजूद थे।

योजना के अनुसार यहां सैलानियों के ठहरने के लिए चलित कॉटेज बनाए जाने हैं। नर्मदा किनारे एक पाथ-वे बनेगा। कैफेटेरिया, कांफ्रेंस हॉल सहित अन्य कार्य कराए जाएंगे। पूरे परिसर को सोलर गांव के रूप में विकसित किए जाने की बात उस वक्त श्री सिंह ने कही थी। यह काम ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा कराए जाने हैं। उन्होंने योजना का शिलान्यास भी किया था। कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक जी कृष्णमूर्ति भी मौजूद थे।श्री कृष्णमूर्ति ने बताया था कि बच्चों के मनोरंजन के लिए हर्बल पार्क में खेल के उपकरण भी लगाए जाएंगे। उक्त सभी कार्य पूरे हो जाने के बाद यहां सैलानियों का आना-जाना बढ़ जाएगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को रोजगार भी प्राप्त होगा।

पंचकर्म चिकित्सा इकाई बनेगी

श्री सिंह ने बताया था कि 34 एकड़ का यह परिसर पर्यटक गतिविधियों को विकसित करने के लिए काफी उपयुक्त है। यहां पंचकर्म चिकित्सा इकाई भी स्थापित की जाएगी। उन्होंने अपने वन मंत्री के कार्यकाल के दौरान प्रदेश के रीवा, दौलतपुर, पूर्वा वाटर फॉल और बीहर नदी के तट पर कराए गए विकास कार्यों का भी जिक्र किया था। अब यहां निवास बनाए जाने की नई योजना से लगता है कि पिछली योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

Chain snatching gang challenging police

आम नागरिकों की चेन उड़ाने वाले चेन स्नेचरों ने अब जिला पुलिस की नींद उड़ा दी है। जिले के हर बड़े थाना क्षेत्र में वारदातें कर चेन स्नेचर गैंग पुलिस को खुली चुनौती देती हुई नजर आ रही है। लगातार हो रही वारदातों से पुलिस की खूब किरकरी हो रही है। पुलिस कप्तान के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। होशंगाबाद व पिपरिया में शनिवार शाम व रात में हुई वारदात के बाद से पुलिस अधिकारी सो नहीं पाए हैं।

ये रातभर गश्त करते रहे, लेकिन गैंग के सदस्य वारदात को अंजाम देने के बाद फिर चूहों की तरह बिल में घुस गए। इटारसी एसडीओपी मंगल सिंह ठाकरे का कहना है कि उन्होंने स्नेचरों पर ईनाम घोषित करने का प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक को भेजा है। उनका कहना है कि पुलिस तो अपनी कोशिश पूरी तरह से कर रही है, जनता की सहभागिता की भी जरूरत पुलिस को है।

एक ही पेटर्न पर वारदातें

जिले में जहां भी चेन स्नेचिंग हो रही है, उसका पेटर्न एक जैसा ही है। स्नेचर वारदात करने के तत्काल बाद एक वारदात और करते हैं। वारदात का स्थान भी ऐसा होता है जहां पर भागने के लिए सड़कें व भीड़ अधिक हो।

इसलिए हो रही कामयाब

एक माह से जिले में चेन स्नेचिंग का सिलसिला चल रहा है, लेकिन शुरुआती वारदातों को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया। छुटभैय्ये अपराधियों द्वारा की गई वारदात को समझकर हाथ पर हाथ धरे पुलिस बैठी रही। इटारसी में तो शुरुआती वारदातों में पुलिस ने मौके पर पहुंचना भी उचित नहीं समझा। पुलिस की दूसरी कमजोरी ये है कि पुलिस का आपस में सामांजस्य नहीं है।

वारदात होने के तत्काल बाद पुलिस आसपास के थानों में घेराबंदी नहीं करती। वहीं पुलिस का मुुखबिर तंत्र भी फेल हो चुका है। अपराधियों से पुलिस की सीधे मिलीभगत होने के कारण मुखबिर भी सूचना देने से डर रहे हैं। इसके अलावा पुलिस का यातायात महकमा निठल्ला होने के कारण कोई भी खुलेआम वाहन सड़कों पर दौड़ा रहा है। चेन स्नेचर भी वारदात को अंजाम देकर इसलिए ही भाग निकलते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि सड़क पर वाहन जांचने के लिए कोई मौजूद ही नहीं होता।

Four accused fire on land disputes one injured

सिंहौनिया थाना क्षेत्र के तहत आने वाले गोपी गांव में चार नामजद आरोपियों ने मिलकर जमीन विवाद के चलते एक व्यक्ति की मारपीट कर दी और उसे जान से मारने की नियत से कट्टे से फायर कर दिया। इस घटना में फरियादी घायल हो गया।

पुलिस के मुताबिक गोपी ग्राम निवासी राजबहादुर पुत्र गुलाब सिंह तोमर के साथ आरोपी श्यामवीर, जगदीश, जगवीर, रजनू तोमर का जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोपियों और फरियादी के बीच में गांव की भूमि सर्वे क्रमांक 437 का बंटवारा होना था, लेकिन इस पर सामंजस्य नहीं बन रहा था।

आखिर में आरोपियों ने राजबहादुर को बीती शाम खेत में घेर लिया। आरोपियों ने पहले तो उसके साथ मारपीट की और फिर कट्टे से फायर किए, जिससे वह घायल हो गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है।

Molesting with women in hospital

जिला अस्पताल में शनिवार को 3 लोगों ने महिला अटेंडर के साथ छेड़छाड़ कर दी। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने अस्पताल के वार्डों में चेकिंग अभियान चलाया। इसमें अस्पताल में बैठे असामाजिक तत्वों को पीटकर भगा दिया। एएसआई विजयसिंह सिसौदिया ने बताया कि शनिवार को अकोड़ा निवासी एक युवक एक्सीडेंट के चलते उनके पैर फ्रेक्चर आ गया। इलाज के लिए उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

सर्जीकल वार्ड में युवक की पत्नी पलंग पर बैठी थी, तभी वहां तीन युवक अवधेश, जीतू कुशवाह एवं एक अन्य युवक आए और महिला से अश्लील हरकत की। रात करीब 11 बजे महिला प्रसाधन के लिए गई, तभी वहां तीनों युवक आ आए। महिला ने शोर मचाकर गार्डों को बुला लिया। इसके बाद गार्डों ने पुलिस को सूचना दे दी।

फालतू बैठे लोगों को पुलिस ने भगाया

घटना के बाद एएसआई श्री सिसौदिया ने बताया कि रात में उन्होंने साइकिल स्टैंड, मेटरनिटी वार्ड सहित अन्य वार्डों में चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान वार्डों में फालतू में बैठे लोगों को मारपीट कर भगा दिया।

इनका कहना है

रात के समय अस्पताल में चेकिंग अभियान चलाया, इसमें साइकिल स्टैंड, मेटरनिटी वार्ड सहित अन्य वार्डों में बैठे असामाजिक तत्वों को बाहर किया।

विजयसिंह सिसौदिया, एएसआई कोतवाली

Chowpati business man upset

शहर की एकमात्र चौपाटी को अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। यहां व्यवसाय करने वाले व्यवसासियों को पेयजल समस्या, बारिश के पानी के चौपाटी में जमा होने गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। चौपाटी के प्रवेश द्वार में जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे हो चुके हैं। रात के समय यहां से निकलते समय मशक्कत करनी पड़ती है। यहां व्यवासियों का ग्राहकी भी इस कारण प्रभावित हो रही है।

व्यवसायियों का कहना है कि यही हाल रहा तो चौपाटी का नाम ही सिर्फ लोगों की जुवान पर रह जाएगा इसका अस्तित्व खतरे में है। बारिश प्रारंभ होने से यहां चाट ढेला व अन्य खान पान की वस्तुओं का व्यावसाय करने वाले छोटे व्यवसायियों की रोजी-रोजी का एक मात्र साधन चौपाटी ही है।

यहां अव्यवस्थाएं होने के कारण यहां आने वाले लोगों की सेहत से खिलवाड़ भी किया जा रहा कई दिनों से बारिश का पानी यहां जमा हो रहा जिसमें काई व दुर्गध से लोगों का बुरा हाल है। इस कारण यहां ग्राहकी भी कम होती जा रही है। बारिश का पानी चौपाटी जगह-जगह जमा होने के कारण मच्छरों का प्रकोप भी यहां बढ़ चुका है।

बाहर से ढो कर ला रहे पीने का पानी

चौपाटी के व्यवसायियों ने बताया कि पेयजल की व्यवस्था चौपाटी में नहीं है। इस कारण कभी उन्हें पानी मुड़वारा स्टेशन के पास से भर कर लाना पड़ाता है तो कभी यहां लगे हेंडपंप से पानी भरकर काम चल रहा है। वही डिब्बा का पानी खरीदने के लिए 10 रूपये का ढुलाई देनी पड़ती है। चौपाटी में पेयजल की सुविधा मुहैया कराने के लिए कई बार निगम प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन कोई ध्यान इस ओर नहीं दिया गया।

वहीं व्यापारियों से बाजार शुल्क बकायदा वसूल किया जा रहा है। रात में रोशनी के लिए लगाई गई 6 में से दो लाइट बंद पड़ी हैं। उनमें कई दिनों से सुधार कार्य नहीं किया गया।

चौपाटी में व्यवसासियों को का कहना है कि यहां लगने वाले प्रत्येक स्टाल से रोजाना 5 रूपये बाजर शुल्क वसूला जा रहा है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। चौपाटी में छाया के लिए शेड आदि की भी व्यवस्था नहीं की गई है। जहां स्टाल व्यवसायी अपने ग्राहकों को सुकून से बैठा सके बास बल्ली गाड़ कर छाया करने पर उन्हें उखाड़ फेका जाता है।

बारिश के मौसम इस वजह से और समस्या आती ग्राहकों को कहा बैठाया जाए चौपाटी में स्टाल व्यवसायियों ने निगम प्रशासन से मांग की है कि चौपाटी में व्यवस्था दुरूस्त की जाए व वरना उनकी रोजी-रोटी पर संकट गहरा जाएगा। मांग करने वालों में चौपाटी व्यापारी संघ के अध्यक्ष मानसिंह बघेल, गुरूप्रसाद गुप्ता, सागर गुप्ता, अंतिम, तिवारी चाउमीन स्टाल आदि ने चौपाटी में व्यवस्थाओं के सुधार की मांग की है।

चौपाटी की व्यापारियों को आ रही समस्याओं को प्राथमिकता से ध्यान देकर चौपाटी की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा।

रूकमणि बर्मन, महापौर

Kishore ratna assumed curfew

कर्फ्यू से जनजीवन के साथ ही हरफनमौला गायक किशोर दा की जयंती के आयोजनों पर भी ग्रहण लग गया है। राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान के बाद हाल ही में घोषित किशोर रत्न सम्मान भी खटाई में पड़ गया है। शहर के माहौल को देखते हुए 4 अगस्त को उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित करने ही लोग पहुंच सकेंगे।

जयंती की पूर्व संध्या पर प्रशासन की ओर से सोमवार को कर्फ्यू में 10 घंटे की छूट का ऐलान किया गया है। बावजूद इसके किशोर नाइट एवं किशोर चैंप 2014 का लुत्फ शहरवासी नहीं उठा सकेंगे। किशोर दा के नाम से किए जाने वाले आयोजन निरस्त होने से किशोर प्रेमियों में निराशा व्याप्त है।

किशोर कुमार खंडवा वाले के सम्मान में प्रति वर्ष 13 अक्टूबर को उनकी पुण्यतिथि पर प्रदेश शासन की ओर से दिया जाने वाला राष्ट्रीय किशोर अवार्ड एक साल से लंबित है। इसे देखते हुए किशोर सांस्कृतिक प्रेरणा मंच ने स्थानीय स्तर पर 4 अगस्त को किशोर रत्न सम्मान देने की शुरुआत का ऐलान किया था।

पहला सम्मान गीतकार योगेश प्रवीण को दिए जाने का निर्णय भी हो गया था। यह सम्मान पाने वाले कलाकार को 25 हजार रुपए नकद, शील्ड एवं सम्मान पट्टिका दी जाएगी। मंच की ओर से यह कदम संस्कृति विभाग द्वारा किशोर सम्मान देने में होने वाले विलंब को देखते हुए उठाया गया था।

नहीं होगी किशोर नाइट

4 अगस्त की शाम को किशोर नाइट में गायिका भव्या पंडित की आर्केस्ट्रा प्रस्तावित थी। यह आयोजन भी निरस्त हो गया है। इतना ही नहीं मंच की ओर से किशोर कुमार की जयंती पर हर वर्ष किशोर चैंप 2014 का आयोजन भी किया जाता है। इसके ऑडिशन का प्रथम दौर चार जिलों में होने के बाद शहर का माहौल बिगड़ने से इसका क्वार्टर एवं सेमीफायनल भी टल गया। इसे देखते हुए फायनल भी नहीं हो सका।

समाधि पर गीतांजलि

किशोर कुमार की जयंती पर होने वाले बढ़े आयोजन निरस्त होने से किशोर प्रेमियों एवं मंच ने प्रशासन से 4 अगस्त को कर्फ्यू हटाने की मांग की थी। इससे किशोर के चाहने वाले उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित करने पहुंच सकें। इसे देखते हुए प्रशासन ने सोमवार को सुबह से 7 बजे से शाम 5 बजे तक कर्फ्यू में ढील की घोषणा की है। साथ ही समाधि स्थल पर सुबह के समय होने वाले संगीतमयी श्रद्वांजलि (गीताजंलि) कार्यक्रम को भी छूट दे दी है।

Six unmarried and minor pregnant

शहर के सोनोग्राफी सेंटरों पर एक्टिव ट्रेकर डिवाइस लगाने के बाद कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। सोनोग्राफी सेंटरों पर 18 साल से कम आयु की 31 लड़कियों की सोनोग्राफी रिपोर्ट की जांच में पता चला है कि 6 नाबालिग और अविवाहित लड़कियां गर्भवती हैं। इस हकीकत ने सबको हिलाकर रख दिया है।

जांच के नतीजों से सोनोग्राफी सेंटरों की हकीकत तो सामने आई ही है, समाज का छिपा हुआ रूप भी सामने आ गया है। पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट की जिला सलाहकार समिति भी पसोपेश में पड़ गई है कि इस मामले में सोनोग्राफी सेंटरों पर किस तरह की कार्रवाई की जाए।

मई और जून 2014 में शहर के कुछ सोनोग्राफी सेंटरों पर ऐसी 31 लड़कियों की भी सोनोग्राफी हुई, जिनकी उम्र 18 साल से कम थी। जिला प्रशासन के सामने यह तथ्य आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग को इस मामले की जांच दी गई। प्रशासन को आशंका थी कि 18 साल से कम उम्र होने के कारण इन लड़कियों के बाल विवाह हुए होंगे, लेकिन जांच में मामला और चौंकाने वाला निकला।

जब संबंधित लड़कियों के परिवार, उम्र आदि के दस्तावेजों की जांच की गई तो बिगड़ते सामाजिक परिवेश का स्वरूप सामने आ गया। छह लड़कियां ऐसी हैं, जिनकी उम्र 17 साल या इससे भी कम है। उनका विवाह भी नहीं हुआ, लेकिन वे गर्भवती थीं। शेष मामलों में लड़कियां विवाहित पाई गईं, लेकिन गलती से उनकी उम्र कम लिखा दी गई थी। जांच रिपोर्ट सलाहकार समिति को मिल चुकी है। अब समिति की बैठक में इस पर विचार-विमर्श होगा कि आगे क्या किया जाए।

कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए उठाया था कदम

जिले में 219 सोनोग्राफी सेंटर हैं, जिनमें 293 मशीनें हैं। कन्या भू्रण हत्या को रोकने और लिंगानुपात का संतुलन बनाए रखने के लिए कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने हर सोनोग्राफी मशीन पर निगरानी के लिए एक्टिव ट्रेकर डिवाइस लगाने की योजना बनाई। इसके तहत जिले के लगभग सभी सेंटरों पर ये डिवाइस लगाए जा चुके हैं। साथ ही सोनोग्राफी सेंटरों पर होने वाली हर सोनोग्राफी के लिए फॉर्म-एफ भरना और इसे पीसी एंड पीएनडीटी सलाहकार समिति के सर्वर पर ऑनलाइन करना अनिवार्य किया गया है। इसका कंट्रोलिंग कलेक्टर कार्यालय में है, जिसके जरिए कलेक्टर और समिति के जिम्मेदार अधिकारी इसे कभी भी ऑनलाइन देख सकते हैं।

ये है लिंगानुपात की स्थिति

स्थान लिंगानुपात

इंदौर शहर 895

इंदौर जिला 901

सांवेर ब्लॉक 903

हातोद ब्लॉक 915

देपालपुर ब्लॉक 919

महू ब्लॉक 921

Amazing nutritious vegetables grown in toxic water

विशेषज्ञों का कहना है कि नाले के पानी से उगाए गए फल और सब्जियों में कई हानिकारक तत्व पाए जाते हैं। जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। तमाम वैज्ञानिक जांचे भी इस बात को पुष्ट करती हैं। लेकिन हैरत की बात है कि राजधानी में जहरीले सीवेज के पानी से उगाई जा रहीं सब्जियां और फल 'पौष्टिक' हैं!

ये हम नहीं कह रहे बल्कि, खाद्य एवं औषधि प्रशासन की रिपोर्ट इसकी पुष्टि कर रही है, जिसमें सीवेज फार्मिंग से लिए गए फल और सब्जियों के सभी 37 नमूने पास हो गए हैं। जाहिर है इससे खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा सीवेज फार्मिंग के खिलाफ की गई कार्रवाई और जांच पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। इधर, राजधानी में सीवेज के पानी से खेती बदस्तूर जारी है।

जानकारी के मुताबिक खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने प्रत्येक सैंपल की जांच के लिए एक हजार रुपए भुगतान किया। इस तरह करीब 37 हजार रुपए खर्च कर एक भी फल व सब्जी विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाई। मानकों के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा लिए गए कुल सैंपल में से करीब 8 से 10 प्रतिशत सैंपल फेल होने चाहिए, लेकिन सीवेज फार्मिंग वाला एक भी सैंपल फेल नहीं हुआ।

इनका कहना है

अगर सभी सैंपल पास हुए हैं, तो इसमें खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा की गई सैपलिंग प्रक्रिया को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। शासन के निर्देशानुसार आगे भी फलों व सब्जियों की सैंपलिंग की जाएगी।

डॉ. पंकज शुक्ला, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी, भोपाल

सीवेज से उगाई गई सब्जियों में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए इन सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। प्रशासन को इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

-बीएमएस तोमर, पूर्व संयुक्त संचालक, कृषि विभाग

उल्लेखनीय है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे कि सीवेज के पानी से उगाई जा रही सब्जियों पर कार्रवाई की जाए। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बावड़िया कलां, कोच फैक्ट्री व पातरा नदी के किनारे स्थित खेतों से सैंपल लिए थे।

इसके अलावा विभिन्न जगहों से फल व फलों के जूस के सैंपल भी लिए गए थे। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की खाद्य प्रयोगशाला में फलों व सब्जियों के सैंपल की जांच की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते इंदौर की एक निजी लैब से अनुबंध कर नमूनों की जांच कराई गई। प्रत्येक नमूने के लिए एक हजार रुपए दिए गए।

Find missing persons in bagdari fall jabalpur

बगदरी फॉल से शव निकालने का कार्य मंगलवार सुबह फिर शुरू हो गया। राहत और पुलिस बल की टीम ने देररात तक आठ शव को निकाल लिया था। तीन शव की तलाश सुबह से शुरू हो गई। जिले के पाटन के पास बगदरी फॉल में सोमवार दोपहर जबलपुर के ठक्कर वार्ड के चार परिवार के 13 लोग पानी के तेज बहाव में बह गए थे। इनमें से एक युवती की जान पहाड़ से टकराने से बच गई थी।

जबकि किनारे से फिसले एक 13 वर्षीय बालक को इनके चालक ने बचा लिया था। तेज बहाव के कारण 11 लोग फॉल में गिर गए थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू कर दिया था। रात 10 बजे तक चले ऑपरेशन में आठ लोगों के शव निकाले जा चुके थे। एक महिला के साथ 15 वर्षीय किशोरी और पांच साल के एक बच्चे का पता नहीं चला था, जिनकी तलाश मंगलवार को सुबह से शुरू हो गई।

तिनके की तरह बहते जा रहे थे वो... मैं कुछ नहीं कर सका

घटना के चश्मदीद 50 वर्षीय अब्दुल खालिद ने बताया कि मैं भी अपने परिवार के साथ फॉल पर था, लेकिन हम सभी नाले के उस पार नहीं गए थे। अचानक पानी का बहाव तेज हुआ तो मैंने पत्थर से रस्सी बांधकर उसी के सहारे सभी को इस पार लाने की कोशिश की।

मेरे साथ आए लोग उस पार से एक दूसरे के पीछे रस्सी पकड़कर किनारे आने की कोशिश कर रहे थे। एक बार फिर पानी का बहाव तेज हो गया। सभी ने एक दूसरे का हाथ और मजबूती से पकड़ा। करीब डेढ़ घंटे तक वे लहरों के सामने खुद को जमाए रखने की कोशिश करते रहे।

लेकिन तेज बहाव के सामने लंबे समय तक नहीं टिक सके। लहरों की चोट से हाथों की पकड़ ढीली हो रही थी। फिर एक-एक कर सभी के साथ छूटने लगे और तिनके की तरह सभी पानी में गिरते चले गए।

Town in charge in your security only 3100 per day

अगर आपको किसी से जान का खतरा है और अपनी सुरक्षा में टीआई (टाउन इंस्पेक्टर) चाहते हैं तो इसके लिए आपको रोजना 3100 रुपए सरकारी खजाने में जमा कराने होंगे। एक महीने के 61 हजार व साल के 7 लाख 60 हजार रुपए में आप यह सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं। राज्य शासन ने निजी सुरक्षा गार्ड के लिए इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक का शुल्क तय कर दिया है। हालांकि, पुलिस सुरक्षा मांगने वाली संस्था व व्यक्ति को सुरक्षा दी जानी है या नहीं, इसका निर्णय एसपी द्वारा किया जाएगा।

गृह विभाग ने बैंकों व अन्य व्यावसायिक संस्थानों व निजी सुरक्षा गार्ड के लिए टीआई, एसआई, एएसआई, हवलदार और सिपाही तक का प्रतिदिन, मासिक व सालाना शुल्क तय कर दिया है।

यह शुल्क तय किया है-

अधिकारी-वार्षिक-प्रतिदिन

टीआई -7.6 लाख -3100

एसआई -6.25 लाख -2600

एएसआई -4.6 लाख -2500

हवलदार -4.25 लाख- 1700

आरक्षक -4लाख -1600

नोट - इन दरों में वेतन भत्ते आदि के साथ पेंशन, अवकाश, वेतन आर्म्स- एम्यूनेशन, बिजली, पानी आदि के समस्त, खर्चे शामिल हैं। बिना पद की स्वीकृति दिए जा रहे गार्ड के अस्थायी रूप से माना जाएगा!!! क्या

छह माह का भुगतान अग्रिम देना होगा-

निजी गार्ड के लिए 6 माह की अग्रिम राशि सरकारी खजाने में जमा करानी होगी। इसके अलावा एक वर्ष की राशि बैंक गांरटी के रूप में जमा करानी होगी।

एसपी तय करते हैं कि सुरक्षा देनी है या नहीं-

-किस व्यावसायिक संस्था या निजी व्यक्ति को किस रैंक की सुरक्षा देनी है इसका निर्णय एसपी करते हैं।

- यह जरूरी नहीं है कि कोई व्यक्ति निर्धारित राशि जमा कराने के लिए तैयार हो जाए तो उसे सुरक्षा मिल ही जाएगी। आवेदन देने पर एसपी जांच कराकर इस बात का पता लगाते हैं कि जिस कारण से व्यक्ति व संस्था सुरक्षा मांग रही है, उसे इसकी आवश्यकता है या नहीं।

- किस स्तर के कौन से अधिकारी की सुरक्षा दी जाए, यह भी एसपी ही तय करते हैं।

Gwalior crime branch encounter sameer jaat

मध्‍यप्रदेश और उत्‍तर प्रदेश के इनामी बदमाश समीर जाट को ग्‍वालियर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एनकाउंटर में मार गिराया। जानकारी के मुताबिक जाट कुछ दिन पहले ही अलीगढ़ पुलिस के एक अधिकारी पर फायर कर अपने एक साथी के साथ गिरफ्त से भाग निकला था।

सोमवार-मंगलवार के बीच रात लगभग तीन बजे पुलिस और समीर जाट के बीच पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के मोती झील पहाड़ी पर जमकर मुठभेड़ हुई। बहुत देर तक दोनों तरफ से फायरिंग चलती रही जिसमे जाट की मौत हो गई और उसका साथी भाग निकला। पुलिस ने इस दौरान 20 राउंड फायर किए। बताया जाता है कि जाट को एक साल पहले एसटीएफ ने भी पकड़ा था।

प्रेमिका ने पहुंचाई थी पिस्‍टल समीर जाट को हिरासत से भागने के लिए उसकी प्रेमिका ने उस तक पिस्‍टल पहुंचाई थी। पिस्‍टल पाने के बाद जाट ने कोर्ट में पुलिस पर फायर कर दिए थे और भाग निकला।

Branded vs generic drugs only difference in name not quality

अगर आपको यह लगता है कि ब्रांडेड दवाएं ज्यादा फायदा करती हैं और जेनरिक कम असरकारक होती हैं, तो यह आपकी गलतफहमी है। जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं में सिर्फ नाम का फर्क है क्वालिटी का नहीं। नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर लेबोरेट्री (एनएबीएल) अप्रूव्ड लैब से जेनरिक दवाएं क्वालिटी में खरी उतरी हैं। इतना ही नहीं एम्स के पास खोले गए एक दवा स्टोर पर ब्रांडेड के मुकाबले जेनरिक दवाएं 20 गुना तक सस्ती मिल रही हैं।

केन्द्र और राज्य सरकारें भी जेनरिक दवाएं आमजन को खिला रही हैं। केन्द्र सराकर के औषधि निर्माण विभाग द्वारा जगह-जगह जन औषधि केन्द्र खोले जा रहे हैं। एनएबीएल लैब से जांच में खरी उतरने वाली दवाओं की सप्लाई ही इन स्टोर्स पर की जा रही है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में निःशुल्क दवा वितरण योजना के तहत जेनरिक दवाओं की सप्लाई की जा रही है। प्रदेश के सभी अस्पतालों में मिलाकर चार से पांच लाख लोगों को रोज जेनरिक दवाएं दी जा रही हैं।

बीस गुना तक कम होती है कीमत

ब्यूरो ऑफ पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ऑफ (इंडिया) बीपीपीआई के जीएम पीके सांत्रा ने बताया कि जेनरिक और ब्रांडेड दवा में सिर्फ नाम का फर्क होता है। दोनों दवाओं की गुणवत्ता एक जैसी होती है। इसकी वजह यह कि दोनों तरह की दवाओं में एक ही तरह का कच्चा मेटेरियल उपयोग किया जाता है। दवाओं की गुणवत्ता की जांच भी ब्रांडेड दवाओं की तरह ही की जाती है। उन्होंने बताया कि रैपर, कलर और नाम जरूर ब्रांडेड दवाओं के अलग हो सकते हैं।

ब्रांडेड कंपनियां भी बनाती हैं जनरिक दवाएं

फार्मासिस्ट अरुण आदित्य दुबे ने बताया के जेनरिक दवाओं को मतलब यह नहीं है कि स्थानीय स्तर पर बनाई जाती हैं। एक से एक ब्रांडेड कंपनियां भी जेनरिक दवाएं बनाती हैं। फर्क सिर्फ इतना रहता है कि जेनरिक दवा में कंपनी का नाम रहता है, लेकिन दवा का कोई नाम नहीं दिया जाता है।

जेनरिक की बढ़ी मांग

राजधानी में मेडिकल स्टोर संचालक और दवाओं पर रिसर्च कर रहे संदीप सिंह ने बताया कि दोनों तरह की दवाओं में ज्यादा फर्क नहीं है। जेनरिक दवाओं को लेकर लोगों में जागरुकता आई है। उन्होंने बताया कि हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों को छोड़कर डॉक्टर भी ब्रांडेड दवा नहीं लिख रहे हैं। ऐसे में मेडिकल स्टोर संचालकों को चाहिए कि वे मरीज को ब्रांडेड दवा न दें। उन्होंने कहा कि मरीज भी मेडिकल स्टोर संचालक से यह पूछ सकते हैं उसे ब्रांडेड दवा दी जा रही है या जेनरिक।

दवाओं की कीमत प्रति 10 टेबलेट (रुपए में)

दवा का नाम ब्रांडेड जेनरिक

डाइक्लोफेनेक 100 एमजी- 39.73- 4.43

पेरासिटामाल 500 एमजी- 18.84- 5.60

ट्रामाडोल 50 एमजी- 78- 3.49

अमोक्सीसिलिन 500 एमजी- 65.45-37

रेबीप्रोजोल 20एमजी- 57.84-6.12

सिट्रीजिन 10 एमजी 30 3

एनालप्रिल 5 एमजी 31 7

एटोरवास्टिन 20 एमजी 175 10

अलवेंडाजोल 400 एमजी 132 20

डोमपेरिडान 10 एमजी 25 3

सिप्रोफ्लाक्सासिन 250 एमजी 47 16

निमेसुलाइड 100 एमजी 33 3

एजिथ्रोमाइसिन 500 एमजी 265 105

लोसार्टन 50 एमजी 67 7

ब्रांडेड की इसलिए ज्यादा है कीमत

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के औषधि निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दवा कंपनियां अपने ब्रांड नाम के विज्ञापन पर ज्यादा पैसा खर्च करती है। ब्रांडेड दवाओं पर टैक्स भी ज्यादा होता है। इस कारण उनकी कीमत ज्यादा होती है। ब्रांडेड दवाओं के प्रमोशन के लिए एमआर नियुक्त किए जाते हैं।

जेनरिक और ब्रांडेड दवाओं में सिर्फ नाम का अंतर है। बीमारियों पर इनका असर एक समान होता है। मल्टीनेशनल दवा निर्माता कंपनियां ज्यादा कमाई के लालच में शुरू से ही जान-बूझकर जेनरिक दवाओं को लेकर भ्रांति फैला रही हैं। जबकि वे भी नाम बदलकर जेनरिक दवाएं ही बेच रही हैं। ये कंपनियां दवाओं के स्ट्रिप पर दवा की मूल कीमत का 70 से 80 गुना तक ज्यादा मूल्य अंकित रहता है। महंगाई के दौर में जेनरिक दवाओं से आम आदमी को काफी राहत मिलेगी। सरकार का जेनरिक दवाओं के स्टोर खोलने का फैसला सराहनीय है। मैं और मेरा परिवार पांच साल से जेनरिक दवाएं खा रहे हैं और इनका असर ब्रांडेड दवाओं की तरह ही है।

Liquor party in middle of river 11 trapped

शहर से लगे पर्यटन स्थल मोरडूंगरी पर सोमवार दोपहर 2 बजे बोलेरो गाड़ी में बैठकर 8 युवक शराब पार्टी कर रहे थे। इसी दौरान अमराल नदी में उफान आ गया।

- नदी में पानी बढ़ते ही गाड़ी में बैठे युवकों के अलावा तीन अन्य बच्चे जो उस समय वहीं थे, बीच नदी में फंस गए। कुछ ही देर में बोलेरो गाड़ी आधे शीशों तक पानी में डूब गई। बीच नदी में फंसे सभी 11 व्यक्ति जान बचाने के लिए एक टापू पर फंस गए।

- घटना के एक घंटे बाद आपदा प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंच पाई। करीब दो घंटे बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। बीच नदी में फंसे लोगों में से सबसे पहले तीनों बच्‍चोंं को निकाला गया फिर शराब के नशे में धुत आठों युवकों को रस्‍सी के सहारे बाहर निकाला गया।

One and half lack students will get smart phone in madhya pradesh

प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में दाखिला लेने वाले प्रथम सेमेस्टर के सभी छात्रों को सरकार मुफ्त स्मार्ट-फोन देने जा रही है। राज्य शासन ने मौजूदा सत्र से ही इस स्कीम को लागू करने का निर्णय लिया है। वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2014-15 में प्रदेशभर में नव-प्रवेशित लगभग 1 लाख 55 हजार विद्यार्थियों को यह स्मार्ट-फोन मिलेंगे। कॉलेज छात्र-छात्राओं को आईटी से सीधे जोड़ने और ई-लर्निंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने यह कदम उठाया है, ताकि ग्लोबलाइजेशन के इस दौर में प्रदेश के विद्यार्थियों को अन्य विकसित देशों के शैक्षणिक स्तर के समकक्ष खड़ा किया जा सके।

प्रदेश के मूल निवासियों को ही लाभ

मध्यप्रदेश के मूल निवासी सभी विद्यार्थी, जो स्नातक प्रथम वर्ष में नियमित प्रवेश लेंगे, केवल उन्हें ही इस योजना का लाभ मिलेगा। स्वाध्यायी और दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवेशार्थी छात्र इसके लिए पात्र नहीं होंगे। स्मार्ट फोन पाने के लिए आय-सीमा और जाति का कोई बंधन नहीं रखा गया है, लेकिन बीच में असमय पढ़ाई छोड़ने या अध्ययन निरंतर नहीं रखने वाले विद्यार्थियों से स्मार्ट-फोन वापस भी ले लिए जाएंगे। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है, ताकि प्रदेश में गिरते सकल मूल्यांकन अनुपात में सुधार लाया जा सकेगा।

दो साल में 33 फीसदी बढ़े यूजर

बीते दो वर्षों में भारत में स्मार्ट-फोन यूजर्स की संख्या में लगभग 33 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही स्मार्ट-फोन की इस्तेमाल अवधि में भी 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत में औसतन एक स्मार्ट-फोन यूजर प्रतिदिन 3 घंटे का समय अपने सेल-फोन पर व्यतीत करता है। 25 फीसदी यूजर्स दिनभर में कम से कम 100 बार से अधिक अपने स्मार्ट-फोन को चेक करते हैं।

कुल मिलाकर एक स्मार्ट-फोन के विभिन्ना एप्लीकेशंस पर भारतीय यूजर्स अपना एक तिहाई समय व्यतीत कर रहे हैं। वाट्सएप एवं वीचैट जैसे मोबाइल एप्लीकेशन ने सोशल कम्युनिकेशन में काफी कम समय में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराई है। इसी कारण पॉकेट टेक्नोलॉजी के रूप में स्मार्ट-फोन युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।