Friday, 12 September 2014

Nota in antagarh by election

राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की गैरमौजूदगी में हो रहे अंतागढ़ विधानसभा उपचुनाव में मतदान से 36 घंटे पहले बना माहौल यह गवाही दे रहा है कि सत्ताधारी भाजपा का मुकाबला किसी अन्य दल के प्रत्याशी के बजाय नोटा (इनमें से कोई नहीं) से होने जा रहा है। भाजपा के भोजराज नाग के मुकाबले आम्बेडकराईट पार्टी के रूपधर पुडो मैदान में हैं।

कांग्रेस के प्रत्याशी मंतूराम पवार के मैदान छोड़ने से हताशा और निराशा में डूबे कांग्रेसी इस उलझन में हैं कि वे किस तरह मतदान केन्द्र में जाएं और कैसे वोट दें । प्रदेश नेतृत्व से संदेशा मिला है कि या तो वोट ही न दें या तो नोटा का विकल्प चुनें। धुर नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में नक्सलियों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर रखी है, पर वे भी नोटा पर बटन दबाने की अपील कर रहे हैं।

नजर नहीं आ रहे चुनाव चिन्‍ह और नारे

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से लेकर अब तक यह प्रदेश का शायद पहला और अकेला विधानसभा चुनाव है, जहां केवल दो प्रत्याशी मैदान में हैं। नईदुनिया ने गुरुवार को इस चुनाव क्षेत्र के कुछ हिस्सों का जायजा लेकर पाया कि अंतागढ़ के छोटे-बड़े मकानों को भी चुनावी रंग नसीब नहीं हो पाया है। चुनाव के दौरान दीवारों पर लिखे दिखने वाले नारे, चुनाव चिन्ह और चुनावी संदेश तक नजर नहीं आ रहे हैं। अंतागढ़ नगर में प्रवेश करने के बाद कुछ गिनी चुनी जगहों पर भाजपा के प्रचार अभियान की झलक दिखती है। मुकाबले में उतरे आम्बेडकराईट पार्टी के प्रत्याशी की ओर से बांटे गए पर्चे ही यह सबूत दे रहे हैं कि यह पार्टी भी चुनाव लड़ रही है।

नोटा पर जोर की वजह

इस चुनाव में निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को जागरूक करने के लिए एक खास तरह के प्रचार अभियान का सहारा लिया है । इस अभियान को अपराजित अन्तागढ़ का नाम दिया गया है। प्रचार के होर्डिंग्स में लिखा गया है कि ये देश के लिए जान दे सकते हैं, क्या आप एक वोट नहीं दे सकते हैं। जाहिर है कि निर्वाचन विभाग इस अभियान के जरिए अधिक से अधिक लोगों को वोट डालने के लिए प्रेरित कर रहा है।

इससे परे अंतागढ़ के चुनाव में नोटा पर वोट डालने को लेकर एक अलग ही हवा चल पड़ी है। अंतागढ़ ब्लॉक कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश चंदेल के मुताबिक उन्होंने संगठन पदाधिकारियों से कहा है कि या तो वे वोट ही न डालें या नोटा का विकल्प चुनें । 2013 के विधान सभा चुनाव में नोटा पर 4000 से अधिक वोट सामान्य स्थिति में पड़े थे, इस बार जब रणनीतिक तरीके से या कांग्रेसियों को मजबूरी में नोटा पर वोट डालने की नौबत आई है तो माना जा रहा है कि इस बार भाजपा के मुकाबले नोटा भी मैदान में आ गया है।

भाजपा के मुद्दों के विपक्ष में कोई सवाल नहीं

भाजपा ने इस चुनाव में राज्य सरकार के विकास कार्यों और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की छवि को अपना हथियार बनाया है। भाजपा अपने प्रचार अभियान के दौरान जो मुद्दे उठा रही है, उन्हें लेकर सवाल करने वाला भी कोई नजर नहीं आ रहा है। चुनाव अभियान शुरू होने से पहले कांग्रेस ने रणनीति बनाई थी की वह राशन कार्ड निरस्त किए जाने के मामले को मुद्दा बनाएगी, लेकिन अब मुद्दा उठाने वाले ही नदारद हैं।

आम्बेडकराईट पार्टी के मुद्दे

इस पार्टी ने अपने प्रचार अभियान में 22 सूत्री मुद्दे उठाए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में पांचवीं और छठवीं अनुसूची लागू करने की बात है। इस मुद्दे को लेकर यहां की राजनीति गरमाई हुई है। सिर्फ अंतागढ़ ही नहीं, समूचे बस्तर के लिए यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। बस्तर पर खास असर रखने वाला एक वर्ग किसी हाल में पांचवीं, छठवीं अनुसूची लागू होते नहीं देखना चाहता। यही वर्ग अंतागढ़ चुनाव में आम्बेडकराईट पार्टी को नहीं पचा पा रहा है। हालांकि इस पार्टी ने आदिवासी हित के कई और मुद्दों पर अपनी बात रखी है, पर उन मुद्दों की कोई बात नहीं हो रही है।

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